Haryana Government Decision: Haryana government's big

Haryana Govt Decision: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु घटाई

Cabinet Haryana

Haryana Government Decision: Haryana government's big

हरियाणा सरकार ने राज्य के दिव्यांग (PwD) सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा नियमों में बड़ा और अहम बदलाव किया है। सरकार ने हरियाणा सरकार के अंतर्गत लागू हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 201 में संशोधन करते हुए दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष कर दी है। यह आदेश वित्त विभाग (Finance Regulation Branch) की ओर से जारी किया गया है और आधिकारिक गजट में प्रकाशित होते ही प्रभावी माना जाएगा।

किस नियम में किया गया संशोधन

सरकार ने Rule 143 के अंतर्गत आने वाली विशेष श्रेणियों को लेकर यह बदलाव किया है। इससे पहले नियमों के अनुसार 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारी, नेत्रहीन कर्मचारी, ग्रुप ‘D’ कर्मचारी और न्यायिक अधिकारियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति थी। अब संशोधन के बाद दिव्यांग कर्मचारियों को दी गई यह विशेष छूट समाप्त कर दी गई है।

अब क्या होगा रिटायरमेंट नियम

नए संशोधन के तहत दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अब 58 वर्ष होगी, ठीक उसी तरह जैसे अन्य सामान्य सरकारी कर्मचारियों की होती है। यानी PwD कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा में बने रहने का विशेष लाभ अब नहीं मिलेगा। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जनहित और असाधारण परिस्थितियों में किसी कर्मचारी को सेवा में बनाए रखने का फैसला केवल मंत्रिमंडल (Council of Ministers) की मंजूरी से ही लिया जा सकेगा।

किन प्रावधानों को हटाया गया

गजट अधिसूचना के माध्यम से सरकार ने Rule 143 की clause (i), clause (ii), Note-1 और Note-3 को पूरी तरह से नियमों से हटा दिया है। इन्हीं प्रावधानों के तहत दिव्यांग कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलता था।

आदेश का विवरण

यह आदेश No.11/58/2023-1FR के तहत 03 फरवरी 2026 को जारी किया गया है। आदेश पर हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से अधिकृत हस्ताक्षर किए गए हैं।

कर्मचारियों में नाराज़गी की आशंका

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को लेकर दिव्यांग कर्मचारी संगठनों में नाराज़गी देखी जा सकती है। संगठनों का कहना है कि पहले दी गई छूट सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित थी, जिसे अचानक समाप्त करना उचित नहीं है। आने वाले दिनों में इस फैसले के खिलाफ प्रतिनिधिमंडल, विरोध प्रदर्शन या कानूनी चुनौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।