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Thursday, October 18, 2018
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गुलाबी पगड़ी पहन छात्राओं ने मनाया इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

गुलाबी पगड़ी पहन छात्राओं ने मनाया इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

 महिलाओं के अधिकारों व गरिमा को बढ़ावा देने के लिए पिंक टर्बन कैंपेन

चंडीगढ़। सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वीरवार हुई मार्निंग असेंबली में युवा छात्राओं ने करुणा, देखभाल और प्यार के प्रतीक गुलाबी रंग की पगड़ी पहनी। इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे के मौके पर लड़कियों और महिलाओं के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने वाली स्वयंसेवी संगठन युवसत्ता और गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-18 सी के अरुणिमा पीस क्लब की ओर से इस पहल का आयोजन किया गया था। इस मौके पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की एडवोकेट रीटा कोहली और युवसत्ता के संयोजक प्रमोद शर्मा मुख्य वक्ता थे।

स्कूल की प्रिंसिपल राज बाला ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि उन्होंने लड़कियों के लिए मौजूदा रोल मॉडल माउंट एवरेस्ट पर चढऩे वाली पहली अपंग महिला पदम श्री अरुणिमा सिन्हा के नाम पर अपने स्कूल के पीस क्लब का नाम रखा है। वह एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं, जिन्हें 2011 में कुछ लुटेरों ने विरोध करने पर चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था। नतीजतन, उसके एक पैर को घुटने के नीचे से काटना पड़ा था। लेकिन यह अपंगता उनके सभी महाद्वीपों की उच्चतम चोटियों पर चढ़ाई करने और वहां भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने के उद्देश्य को किसी भी तरह से रोक नहीं पाक्र और उन्होंने पूरे साहस के साथ छह चोटियों पर चढ़ाई कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इनमें एशिया में एवरेस्ट, अफ्रीका में किलिमंजारो, यूरोप में एल्बस, आस्ट्रेलिया में कोज़िअस्को, अर्जेंटीना में अकोंकागुआ और इंडोनेशिया में कार्स्टेंज़ पिरामिड शामिल हैं।

‘पिंक टर्बन कैंपेन’ को अपना सहयोग देते हुए रीटा कोहली ने कहा कि हम दुनिया की महिलाओं ने सदियों तक समाज में मिलने वाले उचित अधिकारों और हैसियत को पाने के लिए इंतजार किया है। अब समय बदलाव लाने का है। युवा छात्राओं को संबोधित करते हुए युवसत्ता के संयोजक प्रमोद शर्मा ने कहा कि उन्होंने पगड़ी का चयन इसलिए किया है क्योंकि सभी क्षेत्रों में, खासकर उत्तर भारत में पगड़ी सम्मान और आदर का प्रतीक होती है तथा इसे बांधना एक प्रथा होती है और उत्तर भारत में ही सबसे खराब लिंग अनुपात है और यहां कन्या भ्रूणहत्या के मामले ज्यादा पाए जाते हैं। और अब यह समय है कि लड़कियों और महिलाओं को अंदर से सशक्त महसूस करना चाहिए। और अपने उचित अधिकारों का दावा करने के लिए खड़ा होना चाहिए। इसलिए यह पगडयि़ां ‘लड़की या महिला होने पर गर्व है’ तथा ‘एक दूसरे के साथ खड़े होने की भावना को जगाने के लिए होती हैं।

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