उत्तर प्रदेश में ईंधन अधिभार शुल्क पर विवाद: पावर कारपोरेशन को आयोग से नोटिस
Dispute over Fuel Surcharge in Uttar Pradesh
लखनऊ। Dispute over Fuel Surcharge in Uttar Pradesh, पावर कारपोरेशन द्वारा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से इस माह ईंधन अधिभार शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) के रूप में दस प्रतिशत अधिक बिजली बिल वसूलने के आदेश को नियामक आयोग द्वारा विनियमों के विपरीत करार देते हुए नोटिस जारी किए जाने के बाद मंगलवार को पावर कारपोरेशन की टीम आयोग पहुंची।
अधिकारियों ने आयोग द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने के कानूनी पहलुओं को समझने की कोशिश की। आयोग की नोटिस के हवाले से विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क लिए जाने के कारपोरेशन के आदेश को निरस्त कराने की मांग की है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि नियामक आयोग ने कारपोरेशन के 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क के आदेश को मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन-2025 की धारा 16.1 के उल्लंघन का मामला मानते हुए जवाब मांगा है।
विनियमों के विपरीत जाकर इस तरह की कोई भी अतिरिक्त वसूली उपभोक्ताओं से नहीं की जा सकती है। बताया है कि इस मामले में कारपोरेशन के अधिकारियों की टीम मंगलवार को आयोग पहुंची थी।
अधिकारी इस मामले में बचाव का रास्ता तलाशते नजर आए। परिषद इस प्रकरण पर नजर बनाए हुए है। यदि कारपोरेशन अपने आदेश को लागू करने का प्रयास करता है तो यह रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का उल्लंघन होगा।
सरकार की छवि को धूमिल करने वाला है निर्णय
उन्होंने कहा है कि आयोग ने विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित की है, जबकि कारपोरेशन प्रबंधन ने 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाते हुए उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त भार डाला है।
मार्च में वास्तविक बिजली खरीद की लागत के साथ ही 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया दावों व पहले की देनदारियों को भी जोड़ा गया है जो नियामकीय व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए आदेश निरस्त कराने की मांग की है।