UP Cabinet Decision: बांग्लादेश से आए विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूमिधरी अधिकार
Displaced Families from Bangladesh to Receive
लखनऊ। Displaced Families from Bangladesh to Receive, पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर आए परिवारों को अब भूमिधरी का अधिकार मिलेगा। इस संदर्भ में कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह परिवार करीब 60 वर्ष पहले पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश आए थे।
इनमें से 99 परिवारों को कानपुर देहात के रसूलाबाद में एक रुपये लीज पर भूमि देकर बसाया गया है। इसी तर्ज पर रामपुर में रह रहे 2174, पीलीभीत में चार हजार, लखीमपुर खीरी में 2350 और बिजनौर में 3856 परिवारों को भी भूमिधरी का अधिकार प्रदान किया जाएगा।
पाकिस्तान के विभाजन के पश्चात वर्ष 1960 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए हजारों परिवारों को पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर में पुनर्वासित किया गया था। पहले इन परिवारों को ट्रांजिट कैंपों के माध्यम से विभिन्न गांवों में बसाया गया था।
बाद में इन्हें भूमि आवंटित कर दी गई थी, लेकिन कानूनी व अभिलेखीय विसंगतियों के चलते अधिकांश को वैध भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सका था। नतीजतन मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मामले को लेकर गठित कमेटी की सिफारिश पर इन्हें भूमिधरी का अधिकार दिया गया है। इसके लिए सरकार ने अभिलेखीय त्रुटियों को सही करके सरकारी भूमि पर बसाए गए इन परिवारों को बड़ी राहत दी है।
मकान बनाने से लेकर भूमि पर लोन लेने की भी सुविधा
अब इन परिवारों के नाम राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज किए जा सकेंगे। इससे इन्हें मकान बनाने से लेकर भूमि पर लोन लेने की भी सुविधा मिल सकेगी। राजस्व रिकार्ड में नाम दर्ज न होने के कारण इन परिवारों को संबंधित भूमि पर मालिकाना हक नहीं मिला था। नतीजतन इन्हें बैंकों से भूमि पर लोन नहीं मिल रहा था।
कैबिनेट की फरवरी माह में हुई बैठक में इसी प्रकार के 99 परिवारों को कानपुर देहात में बसाने को लेकर प्रस्ताव किया गया था, लेकिन इन्हें एक रुपये लीज पर भूमि आवंटित किए जाने का प्रस्ताव उस समय पास नहीं किया गया था। नतीजतन मंगलवार को कैबिनेट ने इस संदर्भ में कानपुर देहात के जिलाधिकारी को भूमि आवंटित करने का अधिकार दिए जाने संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।