श्री अकाल तख्त पर टिप्पणी से विवाद, HSGMC प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने जताई कड़ी आपत्ति

श्री अकाल तख्त पर टिप्पणी से विवाद, HSGMC प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने जताई कड़ी आपत्ति

Controversy over remarks regarding Sri Akal Takht

Controversy over remarks regarding Sri Akal Takht

 कुरुक्षेत्र। Controversy over remarks regarding Sri Akal Takht, हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के श्री अकाल तख्त साहिब को लेकर दिए जा रहे बयानों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त के बारे में गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

अगर किसी मुद्दे पर अपनी बात रखनी है तो पूरी गरिमा और मर्यादा के साथ रखनी चाहिए। झींडा सोमवार को श्री गुरु हरगोबिंद साहिब के प्रकाश पर्व पर आयोजित नगर कीर्तन से पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। श्री अकाल तख्त का आदेश पूरी दुनिया में सिख समुदाय मानता है।

यह सिर्फ एक धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सिख पंथ की सबसे बड़ी न्याय व्यवस्था है। झींडा ने कहा कि यहां हमेशा सरबत के भले और पंथ से जुड़े मामलों पर फैसले लिए जाते रहे हैं। इतिहास गवाह है कि महाराजा रणजीत सिंह, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला जैसे बड़े नेता भी श्री अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख चुके हैं। किसी भी व्यक्ति को श्री अकाल तख्त की गरिमा पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।

सरकार को करना चाहिए विचार: झींडा

झींडा ने कहा कि अगर बेअदबी कानून में किसी तरह के सुधार की जरूरत महसूस होती है तो सरकार को उस पर विचार करना चाहिए, क्योंकि यह मामला सीधे गुरु घर और करोड़ों सिख श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। पंजाब सरकार को अपना पक्ष और अपनी बात रखनी चाहिए।

गुरुघर की मर्यादा कानून से ऊपर

झींडा ने कहा कि गुरु घर की अपनी मर्यादा है। पूरा हिंदुस्तान संविधान को मानता है, लेकिन ये संविधान तब तक ही लागू है, जब तक हम गुरुद्वारा साहिब की दर्शनी जोड़ी पार नहीं कर लेते। जैसे ही दर्शनी जोड़ी पार करते हैं, वहां हिंदुस्तान का कानून नहीं चलता, बल्कि गुरु मर्यादा चलती है।

सिख समाज की राय लेना जरूरी

प्रधान झींडा ने श्री नांदेड़ साहिब से जुड़े कानून में बदलाव के मामले पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार ने फिलहाल कानून में बदलाव की प्रक्रिया रोक दी है। इसके लिए सरकार का धन्यवाद, लेकिन भविष्य में किसी भी धार्मिक संस्था से जुड़े कानून में बदलाव करने से पहले संबंधित संस्थाओं और सिख समाज की राय जरूर ली जानी चाहिए।