संचारी रोग अभियान के सम्बंध में मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश
संचारी रोग अभियान के सम्बंध में मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश

संचारी रोग अभियान के सम्बंध में मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश

संचारी रोग अभियान के सम्बंध में मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश

लखनऊ ( विजय निगम)
संचारी रोग अभियान के सम्बंध में मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश
विजय कुमार निगम, लखनऊ ब्यूरोचीफ
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने एक प्रशासनिक बैठक  में  कहा  कि प्रतिवर्ष अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर में संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अंतर्विभागीय समन्वय के साथ विशेष अभियान संचालित होता है। इस वर्ष 01 जुलाई से इसका नवीन चरण प्रारंभ हो रहा है। अभियान को प्रभावी बनाना सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकारी प्रयास के साथ-साथ जनसहभागिता भी महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, पाथ जैसी संस्थाओं का सहयोग लिया जाना चाहिए। हमारे सामने अपना इंसेफेलाइटिस नियंत्रण और कोविड प्रबंधन के दो सफल मॉडल हैं, जो संचारी रोग अभियान में हमारे लिए उपयोगी होंगे।

                 उन्होंने  कहा कि विगत वर्षों के अनुभव बताते हैं कि लखनऊ, फिरोजाबाद, मथुरा, आगरा, बरेली, पीलीभीत और कानपुर नगर जनपद डेंगू से प्रभावित रहे हैं, जबकि बरेली, सोनभद्र, बदायूं और मिर्जापुर में मलेरिया का असर रहा है। सिद्धार्थनगर, भदोही, मिर्जापुर, गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ में दस्त, हैजा आदि जलजनित रोग और बाराबंकी, बलिया, वाराणसी, फतेहपुर और लखनऊ में चिकेनपॉक्स के मरीज मिलते रहे हैं। इसी प्रकार फिरोजाबाद, मथुरा, ललितपुर, झांसी और गोरखपुर मंडल के जिलों ने स्क्रब टाइफस तथा लेप्टोस्पायरोसिस का प्रभाव देखा गया है। 
 आगे श्री योगी  ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में इंसेफेलाइटिस से हजारों बच्चों की मौत होती थी। 50 हजार बच्चों की मौत हुई। 2017 में हमने अंतर्विभागीय समिति बनाई, सभी विभागों ने मिलकर काम किया। अस्पताल बनवाये, पीकू बनवाये, चिकित्सक तैनात किये। साथ साथ पीने के साफ पानी और शौचालय की व्यवस्था भी कराई। नतीजा आज इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों में 95% की कमी आ गई है। 04 दशक तक कहर बनी रही बीमारी पर हमने 05 वर्ष में नियंत्रण पा लिया। नियंत्रण के बाद अब हमारा अगला लक्ष्य उन्मूलन है।

   मुख्य मंत्री ने कहा कि बस्ती -गोरखपुर मंडल के 38 जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस का प्रभाव रहा है, इनमें से 18 जिले हाई रिस्क वाले हैं। यद्यपि बीते 05 वर्ष में जेई से असमय मृत्यु पर 95% तक गिरावट आ चुकी है, किंतु हमें सतत-सतर्क सावधान रहना होगा। आज यहां ब्लॉक स्तर पर इंसेफेलाइटिस केयर सेंटर है, पीकू बेड्स हैं। ट्रेंड चिकित्साकर्मी हैं। पीडियाट्रिक आईसीयू के सफल संचालन के लिए जिलों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, स्टाफ नर्सेज को तथा ए.ई.एस. और जे.ई. प्रयोगशालाओं में टेक्नीशियन की संख्या पर्याप्त हो और सभी प्रशिक्षित हों।

उन्होंने निर्देशित  किया कि संचारी रोग अभियान की सफलता के लिए अंतर्विभागीय समन्वय महत्वपूर्ण आधार है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, ग्राम्य विकास, नगर विकास, महिला बाल विकास, कृषि, बेसिक माध्यमिक शिक्षा द्वारा अंतर्विभागीय समन्वय के साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस प्रयास किया जाएं। अभियान के दौरान मंत्रीगण जिलों में उपस्थित होंगे। आमजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग करेंगे। नोडल अधिकारियों की सहभागिता भी होगी। 

 श्री योगी ने कहा कि हाल के परिणाम बताते हैं कि प्रदेश में मलेरिया और कालाजार रोग समाप्ति की ओर है। प्रति 1,000 की जनसंख्या पर एक से भी कम लोगों में मलेरिया की समस्या देखी गई, जबकि कालाजार रोग 22 चिन्हित ब्लॉक में हर 10,000 की आबादी में एक से कम लोगों में ही देखा गया है। यह बड़ी उपलब्धि है। टीम यूपी को बधाई। बहुत जल्द हमारा प्रदेश कालाजार मुक्त हो जाएगा और मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण भी हो जाएगा। 

 उन्होंनेे  यह भी निर्देशित किया कि सूकर बाड़ों को यथासंभव आबादी से दूर व्यवस्थापित किया जाए। इन स्थानों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जाता रहे। स्क्रबटाइफस से बचाव के लिए शहरों/गांवों में झाड़ियों की साफ-सफाई/कटाई करा ली जाए। यह झाड़ियां चूहों के अड्डा बनती हैं और बीमारी का प्रसार करती हैं।  फ्रंट लाइन वर्कर्स द्वारा उपलब्ध कराई गई क्षय रोग लक्षण युक्त व्यक्तियों के उपचार की समुचित व्यवस्था कराई जाए।

   श्री योगी ने कहा  कि ग्रामीण क्षेत्रों ने आबादी के बीच वाले तालाबों को अपशिष्ट तथा प्रदूषण मुक्त रखने के नियोजित प्रयास किए जाएं। विगत वर्षों के अनुभव के आधार पर चिन्हित हाई रिस्क क्षेत्रों तथा दस्तक अभियान के दौरान घर-घर टीमों के द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित अधिक मच्छर/लार्वा घनत्व वाले क्षेत्रों में फॉगिंग आदि के माध्यम से मच्छर नियंत्रण के प्रयास हों।  स्वच्छता की आदत अनेक बीमारियों से बचाव का सहज माध्यम है। स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया जाए। इस बाबत स्कूलों में वाद-विवाद, निबंध, पर्यावरणीय स्वच्छता, प्रश्नोत्तरी आदि विषयक प्रतियोगिता कराई जानी चाहिए। 

मुख्यम़ंत्री ने निर्देशित किया कि बरसात के दृष्टिगत नालों की सफाई करा ली जाए। सिल्ट जमा न हो, ताकि बारिश में जलभराव न हो। मलिन बस्तियों में साफ-सफाई की अत्यधिक आवश्यकता है। यहां नियमित फॉगिंग भी कराई जाए। सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के लिए ठोस प्रयास करें। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो। लोगों के सामने क्लोरीनेशन डेमो दिया जाए। पानी उबाल कर छान कर पीने की जानकारी दें। क्लोरीन की गोलियां वितरित की जाएं।