जप का अर्थ है मंत्र की पुनरावृत्ति : मुनिश्री आलोक - Arth Parkash
Saturday, September 22, 2018
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जप का अर्थ है मंत्र की पुनरावृत्ति : मुनिश्री आलोक

जप का अर्थ है मंत्र की पुनरावृत्ति : मुनिश्री आलोक

एक शब्द की आवृत्ति करना, उसे बार-बार दोहराना जप कहलाता है। जप का अर्थ है मंत्र की पुनरावृत्ति। वैदिक परपरा को देखें, जैन या बौद्ध परपरा को देखें तो सबने मंत्रों का चुनाव किया है। दुनिया में अनेक प्रकार के मंत्र होते है। कुछ मारक मंत्र-दूसरों का अहित करने वाले होते है। एक जैन शावक को ऐसे मंत्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मनीषी श्रीसंत ने मंत्र ऊं की रचना पर प्रकाश डालते हुए व्याकरणिक दृष्टि से इसका विवेचन किया। जैन धर्म के अनुसार इस छोटे से मंत्र में पाच पदों का समावेश है। अर्हम का जप लयबद्ध करने से एक प्रकार का रसायन बनता है, जो हमारे भीतर के विकारों का शमन कर हमें पवित्र बनाता है।

मंत्र तो अनेक है, लेकिन नमस्कार महामंत्र मंत्राधिराज है। यह सभी पापों का नाश करने वाला है। यह मंत्र बड़ा चमत्कारिक है। इसकी विशेषता यह है कि किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं है। जप का लक्ष्य है निर्जरा, जप शब्द दो अक्षरों से बना है। जप मानसिक एवं वाचिक दोनों प्रकार से किया जाता है। जप के मंत्र का शुद्ध उच्चारण, अर्थ का ध्यान, तन्मयता एवं श्रद्धा से किया गया जप फलित होता है। ये शब्द मनीषीसंत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक पुर्यषण के छठे दिन जप दिवस पर अणुव्रत भवन सैक्टर -24सी के तुलसी सभागार में कहे। मनीषी श्रीसंत ने आगे कहा उपदेश और संकेत देकर दूसरो को सुधार सके या न सुधार सके लेकिन अपने आपको जरूर बनाया जा सकता है। इस प्रक्रिया से, जिसे स्वंयकेत या आटो सजेशन कहते है, अवचेतना मे गहराई मे प्रवेश क र, व्यक्ति मे अभीष्ट सुधार परिवर्तन किया जा सकता है। मन ही हमारे संपूर्ण शारीरिक एंव मानसिक क्रियाकलापो का संचालक है। विचारो को उत्पन्न, परिवर्तन व परिवद्र्धन करने का कार्य भी इसी संचालन यंत्र के जरिये होता है। अंत स्वंय संकेत का सीधा प्रभाव हमारे मन पर पडता है।

जब मन इन संकेतो से अपना पूर्ण तादात्म्य स्थापित कर लेता है, तब वह क्रिया व्यापार, व्यवसाय उनके अनुसार करने लगता हैै। सफलता व सिद्धि तब दूर नही रह जाती मनुष्य का चेतन क्षेत्र समुद्र की तरह गहरा और विशाल है। ऊपरी सतह से नीचे उतरने पर पाई जाने वाली अलग अलग परतो को अचेतना, अवचेतना, सुपरचेतना की परतें कहते है। जप व्यक्ति के ध्यान मे लीन होने की, ईश्वर के साथ ईकमिक होने की, बाहरी पदार्थो से ऊपर उठने की अनूठी व अचूक औषधी है।

मनीषी श्रीसंत ने कहा उपदेश संकेत व सुझाव आज बिना किसी पैसे के हर जगह से बिना कहे ही मिल जाते है लेकिन उसको कर्म रूप में ढालना और जो कह रहा हेै पहले वह चले तो फिर उसकी उपदेश नही बल्कि उसका कर्म बोलता है। दुनिया मे कोई भी कार्य बिना अच्छी सोच व सकारात्मक विचारो से नही हो सकता। सकारात्मक व नकारात्मक दो तरह की प्रवृत्तियां है लेकिन जो सकारात्मक को पकड कर उसके अनुसार ही जीवन रूपी कश्ती को चलाता है वह भवसागर से पार हो जाता है। बल्व जलता है जब सकरात्मक और नकारात्मक स्र्कल उसके साथ चलते हेै यदि नकारात्मक हो या सकारात्मक एक है तो बल्व नही जगेगा ठीक उसी प्रकार से हमे अपने भीतर को प्रज्जवलित करने के लिए सकारात्मक शक्ति को जागरूक करना होगा। जब तक सकारात्मक शक्ति प्रज्जवलित नही होती तब तक हमारे भीतर का बल्व नही जल सकता। बाहरी बल्व मे दोनो शक्तियां जरूरी है और भीतरी बल्व मे सकारात्मक शक्ति का ही उपयोग होता है जप एक ऐसी साधन है जो व्यक्ति की नकारात्मक भावो को समाप्त करती है और सकारात्मक भाव को पैदा करती है। जप स्वयं के शोधन मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। जप आत्मा से आत्मा को मिलाने का कारगार तरीका है। जप से अनंत शक्ति का विस्तार होता है। जप से शरीर और आत्मा की दूरी पटती है जप साधना के विभिन्न आयामो में सहज और सरल विधि है।

मनीषी श्रीसंत ने अंत मे फरमाया यदि एक मनुष्य धार्मिक है, तो वह जीवन के प्रति अपनी धार्मिकता का चिन्ह अंकित करता चलेगा। वह व्यक्तिगत जीवन में न तो अन्याय करेगा और न ही अन्याय को सहेगा। वह सामाजिक जीवन में भी कोई अन्याय नहीं होने देगा। जिस ओर अन्न, वस्त्र, शिक्षा, चिकित्सा की व्यवस्था हो, उस ओर वह अवश्य देखेगा। मानवीय कर्तव्य से आशय समाज की चेतना से जुडऩा होगा।
दुख, दरिद्रता, कष्ट, यातना भोग रहे मनुष्यों का सहायक बनना होगा। जीवनभर केवल अपने भौतिक लक्ष्य प्राप्त करने की कामना करते रहना और लक्ष्य प्राप्त कर लेने भर से अपने अहं को पोषित करना, इससे मनुष्य के कर्तव्यों का निर्वाह नहीं होगा। समाज में अपने जैसे मानवों के मध्य जीवन के मूलभूत सिद्धांत मानवता की अलख जगानी होगी। तब यह विश्वास के साथ माना जाना चाहिए कि जिस काल में धरती मानवता के विचार से फलीभूत होगी, उस समयकाल में मानव-जीवन अमरत्व का कुछ रहस्य अवश्य प्राप्त कर लेगा।

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