मरकर भी 3 लोगों को नई जिंदगी दे गया यह शख्स; 2 की आंखों की रोशनी लौटाई, चंडीगढ़ में पति की मौत पर पत्नी ने दिखाया बड़ा दिल
Chandigarh PGI Brain Dead Man Organ Donation To Gave New Life Other Peoples
Organ Donation: आज लोग जहां जीते जी दूसरों की जिंदगी उजाड़ने पर लगे रहते हैं तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मरकर भी औरों की जिंदगी संवार जाते हैं। उन्हें इस दुनिया में बने रहने के लिए नई जिंदगी दे जाते हैं। चंडीगढ़ में 44 साल के एक शख्स ने कुछ ऐसा ही किया। वह मरकर भी 3 लोगों को नई जिंदगी दे गया और साथ ही 2 लोगों को आंखों की रोशनी। यानि शख्स दुनिया से रुखसत होकर भी 5 लोगों की दुनिया बना गया। वास्तव में यह पूरी घटना भावुक कर देने के साथ एक बड़ा संदेश देने वाली भी है।
पत्नी ने दिखाई उदारता
दरअसल यह शख्स हरियाणा का रहने वाला था। जिसे इसके परिवार ने 23 नवंबर को इलाज के लिए पीजीआई में भर्ती कराया था। शख्स के छत से गिरने के कारण उसके सिर पर गंभीर चोट लगी थी। जिससे उसे होश नहीं आ रहा था। वहीं PGI में सभी मुमकिन मेडिकल इलाज के बावजूद शख्स की की हालत बिगड़ती गई और आखिर में 27 नवंबर को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। शख्स के ब्रेन डेड घोषित होने से परिवार की सारी उम्मीदें मातम में तब्दील हो गईं।
लेकिन इस बीच इस गहरे दुख से ऊपर उठकर शख्स की पत्नी ने बड़ी उदारता दिखाई और पति के ऑर्गन डोनेशन का फैसला लिया ताकि पति के अंगों से औरों को जिंदगी दी जा सके। ऑर्गन डोनेशन के फैसले पर पत्नी ने कहा कि मेरे पति परोपकारी थे और हमेशा लोगों की मदद करने में यकीन रखते थे। उन्होंने हमेशा ही लोगों का भला चाहा। आज भले ही वह हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन मैं चाहती थी कि उनकी अच्छाई बनी रहे। मेरे पति ने मरकर भी जानें बचाई हैं, यह चीज मुझे आगे बढ़ने की ताकत देती रहेगी।
बता दें कि पत्नी के इस बड़े फैसले ने तीन गंभीर रूप से बीमार ऑर्गन फेलियर के मरीजों को जीवन दिया और दो कॉर्नियल ब्लाइंड लोगों की आंखों की रोशनी वापस लाई। ऑर्गन डोनेट करने के पत्नी के फैसले के बाद चंडीगढ़ पीजीआई ने तुरंत नेशनल ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के तहत अपना ऑर्गन रिट्रीवल और एलोकेशन सिस्टम चालू कर दिया था। जिसमें शख्स के लिवर को नेशनल नेटवर्क के जरिए पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज को दिया गया, जहां तुरंत सही जरूरत वाले एक मरीज की पहचान की गई।
इससे इंस्टीट्यूट का पहला कैडेवर लिवर ट्रांसप्लांट हुआ, जो पंजाब के ट्रांसप्लांट इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक तरक्की है। उसी समय, शख्स से निकाली गई दो किडनी को पीजीआई में ही सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे दो गंभीर रूप से बीमार किडनी फेलियर के मरीजों की जान बच गई। इसके अलावा कॉर्निया ने कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित दो लोगों की रोशनी वापस कर दी। इस तरह शख्स के अंग दान से कुल 5 लोगों को नई जिंदगी और रोशनी मिली।
वहीं इसी के साथ चंडीगढ़ पीजीआई में एक बार फिर अंगदान मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ और उम्मीद और इलाज की एक मजबूत विरासत बन गया। पीजीआई के डायरेक्टर, प्रो. विवेक लाल ने कहा कि डोनर परिवार का यह नेक काम इंसानियत का एक अनोखा संदेश है। अपने दुख से ऊपर उठने की उनकी इच्छा ने कई जानें बचाई हैं और हमारे इलाके में ऑर्गन डोनेशन मूवमेंट को मज़बूत किया है। पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज को अपना पहला कैडेवर लिवर ट्रांसप्लांट हासिल करने में मदद करना पीजीआई के लिए गर्व का पल है और पंजाब के हेल्थकेयर लैंडस्केप के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।
इसी बात को दोहराते हुए, पीजीआई के रोटो (नॉर्थ) के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और नोडल ऑफिसर, प्रो. विपिन कौशल ने कहा कि ऑर्गन डोनेशन सबसे बड़ा तोहफा है जो कोई दे सकता है। परिवार की हिम्मत बहुत प्रेरणा देने वाली है। यह मामला पीजीआई और पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के बीच बहुत अच्छे तालमेल को भी दिखाता है, जिससे यह पक्का हुआ कि ऑर्गन जल्दी, सही तरीके से और सबसे सही लोगों को दिए गए।
वहीं पीजीआई के सहयोग को लेकर पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ़ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के डायरेक्टर, डॉ. वीरेंद्र सिंह ने दिल से शुक्रिया अदा करते हुए कहा यह कामयाबी पीजीआई की लीडरशिप और पूरे पंजाब में ट्रांसप्लांट सर्विस को मजबूत करने के उसके कमिटमेंट को दिखाती है। हम मरीजों के लिए जान बचाने के मौके बढ़ाने के लिए लगातार सहयोग की उम्मीद करते हैं।
रिपोर्ट- आदित्य शर्मा