Chandigarh- मिस्टर मसीह, आप दोषी हैं, कार्रवाई क्यों न की जाए... सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अनिल मसीह आफत में, बेंच ने कहा- जानबूझकर सब किया
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मिस्टर मसीह, आप दोषी हैं, कार्रवाई क्यों न की जाए... सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अनिल मसीह आफत में, बेंच ने कहा- जानबूझकर सब किया

Chandigarh Presiding Officer Anil Masih In upreme Court News Update

Chandigarh Presiding Officer Anil Masih In upreme Court News Update

Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में फैसला दे दिया है। जिससे बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। अब चंडीगढ़ में AAP का मेयर होगा। वहीं दूसरी तरफ चुनाव के इस पूरे मुद्दे पर मुख्य किरदार रहे पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के लिए आफत पैदा हो गई है। दरअसल, अनिल मसीह ने चुनाव में जो 8 वोट अवैध घोषित कर दिए थे, वो वोट जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने वैध माने।

बेंच ने कहा कि, मिस्टर मसीह द्वारा जो वोट अवैध किए गए हैं। उनमें अवैध होने का आधार नजर नहीं आता है। इसका मतलब पीठासीन अधिकारी मसीह ने जानबूझकर 8 वोटों को अवैध किया ताकि दूसरे पक्ष को मेयर निर्वाचित किया जा सके। इसके साथ ही मसीह ने बेंच के सामने निशान लगाने को लेकर पूछे गए सवाल पर झूठा बयान दिया।

बेंच ने कहा कि अनिल मसीह ने दो अपराध किए हैं। एक तो मेयर चुनाव प्रक्रिया को अपने गलत अचारण से गैरकानूनी रूप दिया। दूसरा कोर्ट में आकर बेंच के सामने झूठा बोला। यह सब बहुत गंभीर है। जबकि बेंच ने पहले ही गलत बयान देने के परिणामों से अवगत करा दिया था। बेंच ने कहा कि इसके लिए अब अनिल मसीह को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ऐसा करके पीठासीन अधिकारी मसीह ने वैधानिक नियमों के दायरे से बाहर जाकर काम किया है। पीठासीन अधिकारी मसीह गलत काम और हेराफेरी के दोषी हैं।

बेंच ने कहा कि, हम इसीलिए पीठासीन अधिकारी द्वारा मेयर चुनाव के लिए घोषित गैरकानूनी परिणाम को रद्द करते हैं। हम पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द नहीं करेंगे। क्योंकि हमारा मानना है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द करना अनुचित है क्योंकि केवल मतगणना प्रक्रिया में ही गड़बड़ी पाई जाती है। इसलिए संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का विनाश होगा जो पीठासीन अधिकारी के आचरण के कारण हुआ।

बेंच ने कहा कि, यह न्यायालय यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया इस तरह के हथकंडों से नष्ट न हो। न्यायालय को ऐसी असाधारण परिस्थितियों में बुनियादी लोकतांत्रिक जनादेश सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना चाहिए।

मिस्टर मसीह, आप पर कार्रवाई क्यों न की जाए?

बेंच ने कहा कि, अनिल मसीह के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए एक उपयुक्त मामला बनता है। बेंच ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को आदेश दिया है कि अनिल मसीह को नोटिस जारी कर यह पूछा जाए कि क्यों न उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई शुरू की जाए। बता दें कि इस धारा के अंतर्गत किसी कानूनी मामले व प्रक्रिया में अवरोध पैदा करने और सबूतों को बाधित करने या झूठा बयान देकर अदालत का समय बर्बाद करने और न्याय में देरी करने पर कार्रवाई होती है।