बिहार सरकार का नया 'पावर सेंटर': कौन हैं IAS लोकेश कुमार सिंह, जिन्हें मिली मुख्यमंत्री सचिवालय की कमान?

बिहार सरकार का नया 'पावर सेंटर': कौन हैं IAS लोकेश कुमार सिंह, जिन्हें मिली मुख्यमंत्री सचिवालय की कमान?

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Bihar government's new 'power centre': Who is IAS Lokesh Kumar Singh,

पटना। बिहार सरकार में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद आईएएस लोकेश कुमार सिंह अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय का सचिव बनाकर अपनी कोर टीम में शामिल कर लिया है।

प्रशासनिक गलियारों में इस पद को सरकार का सबसे ताकतवर और संवेदनशील पद माना जाता है।

यानी अब सरकार की बड़ी योजनाओं की मॉनिटरिंग और फैसलों के क्रियान्वयन में लोकेश कुमार सिंह की अहम भूमिका रहने वाली है।

23 साल का अनुभव, कई जिलों में रहे DM

2003 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी लोकेश कुमार सिंह का प्रशासनिक अनुभव करीब 23 वर्षों का है।

8 मई 1977 को जन्मे लोकेश कुमार सिंह ने इतिहास विषय से स्नातक और एमए की पढ़ाई की है।

उन्होंने अपने करियर में बिहार सरकार के कई अहम विभागों और जिलों में जिम्मेदारी संभाली है।

पश्चिम चंपारण, मधुबनी, गया, सिवान, सारण और मुंगेर जैसे जिलों में वे जिलाधिकारी के तौर पर काम कर चुके हैं।

जमीन से जुड़े अफसर की पहचान

लोकेश कुमार सिंह की पहचान ऐसे अधिकारी की रही है जो फाइलों से ज्यादा फील्ड में काम करने को प्राथमिकता देते हैं।

डीएम रहते हुए उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर समस्याओं के समाधान पर जोर दिया।

यही वजह है कि उन्हें बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी चुनौतियों की गहरी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है।

सरकार के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी कार्यशैली की चर्चा पहले भी होती रही है।

कोरोना काल में निभाई थी बड़ी भूमिका

स्वास्थ्य विभाग में सचिव रहते हुए कोरोना महामारी के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम मानी गई थी।

उस दौर में स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने से लेकर संसाधनों के प्रबंधन तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।

इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) जैसे संवेदनशील विभागों में भी वे काम कर चुके हैं।

प्रशासनिक स्तर पर संकट प्रबंधन में उनकी पकड़ को सरकार की बड़ी ताकत माना जाता है।

एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी

नई नियुक्ति के बाद अब लोकेश कुमार सिंह के पास कई अहम विभागों की जिम्मेदारी है। वे मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव के साथ-साथ पर्यटन विभाग के सचिव भी बनाए गए हैं।

इसके अलावा विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास रहेगा। खास बात यह है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में उनका करीब 3 साल 9 महीने का लंबा कार्यकाल रहा है।

क्यों खास माने जा रहे हैं लोकेश कुमार सिंह?

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी ने एक ऐसे अधिकारी पर भरोसा जताया है जो अनुभवी भी हैं और बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को जड़ से समझते भी हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय में उनकी तैनाती को सरकार की नई कार्यशैली का संकेत माना जा रहा है।

सरकार चाहती है कि योजनाओं की मॉनिटरिंग तेज हो और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

ऐसे में लोकेश कुमार सिंह आने वाले दिनों में बिहार सरकार के सबसे प्रभावशाली अफसरों में गिने जा सकते हैं।