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सातवां पे कमीशन लागू करो अन्यथा-10 दिसंबर को शहर के कालेजों पर लगेंगे ताले

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एडिड कालेजों के टीचरों व नॉन टीचिंग कर्मियों ने भरी यूटी प्रशासन के खिलाफ हुंकार

अर्थ प्रकाश/साजन शर्मा

apply seventh pay commission otherwise : चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन (Chandigarh Administration) ने अगर चंडीगढ़ के एडिड कॉलेजों के टीचिंग व नॉन टीचिंग कर्मचारियों (Teaching and non-teaching staff of aided colleges) की मांगों को न माना तो जल्द शहर के कालेज और इनमें चल रही पढ़ाई पूरी तरह बंद हो सकती है। यूटी प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए इन शिक्षकों व गैर शिक्षक कर्मचारियों ने चेतावनी दी (Teachers and non-teaching staff warned) है कि या तो प्रशासन उनकी मांगें मान ले अन्यथा 10 दिसंबर को कालेजों को बंद कर चॉबियां डायरेक्टर हायर एजूकेशन (डीएचई) को सौंप दी जाएंगे। वीरवार को डीएवी कॉलेज में हुई पत्रकार वार्ता के दौरान कालेज टीचर्स, नॉन-टीचर्स एवं छात्र प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जायज मांगे न माने को लेकर अपनी परेशानी को बताया। शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी संघों और छात्रों के प्रतिनिधियों ने यूजीसी रेगुलेशन लागू करने में की जा रही देरी के खिलाफ नाराजगी प्रकट की।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की 29 मार्च की अधिसूचना के अनुसार यूटी में अब सेंट्रल रूल लागू होने हैं, जिसमें कालेज स्टाफ को यूजीसी के संशोधित पे-स्केल और केंद्रीय सेवा शर्तों का लागू किया जाना शामिल है। 30 मार्च को चंडीगढ़ प्रशासन और अप्रैल में कॉलेजों को इस संबंध में नोटिफिकेशन भेजा जा चुका है। यूटी चंडीगढ़ ही देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां अभी तक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान और अन्य लाभ नहीं मिले हैं।

यूजीसी रेगुलेशन लागू करने में की जा रही देरी के खिलाफ नाराजगी प्रकट

चंडीगढ़ के कॉलेजों के करीब 900 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों में इसको लेकर भारी नाराजगी है क्योंकि उनके कई अन्य मुद्दे भी अनसुलझे हैं। इनमें कैस (करिअर एडवांसमेंट स्कीम) लंबित पदोन्नति, प्रोबेशन अवधि और यूजीसी के मानदंडों के अनुसार नई भर्ती के लिए वेतनमान आदि शामिल हैं। गृहमंत्री द्वारा की गई घोषणा और बाद में राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद भी चंडीगढ़ प्रशासन इसे लागू नहीं कर रहा है। शिक्षक संघ नेता सुमित गोकलानी, डॉ. शुतापा, सीनेटर नीरू मलिक, गुरमेज सिंह, नीला पवार, शमिंदर संधू सहित कई नेताओं ने अपने विचार रखे।

 
टीचरों के समर्थन में छात्र भी उतरे / Students also came out in support of the teachers

छात्र प्रतिनिधियों तरन चीमा, गोल्डी, महक गिल (Taran Cheema, Goldie, Mehak Gill) ने कहा कि छात्र हितों को देखते हुए शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने दिसंबर-2022 सेमेस्टर परीक्षा (December-2022 Semester Exam) के सुचारू संचालन के लिए अपना आंदोलन स्थगित किया है। हालांकि, वे पूरे दिल से शिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हैं और परीक्षाओं के बाद प्रशासन की मनमानी के खिलाफ उनकी लड़ाई (His fight against the arbitrariness of the administration) में शामिल होंगे। छात्र प्रतिनिधियों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर आने वाले दिनों में शिक्षकों के लंबित मुद्दों का प्रशासन द्वारा समाधान नहीं किया गया तो वे जनवरी 2023 में अगला सेमेस्टर शुरू नहीं होने देंगे और चंडीगढ़ के कॉलेजों के पचास हजार छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों का भी जमावड़ा (gathering of parents) होगा जो अपनी मांगों को लेकर शिक्षकों के साथ सडक़ पर उतरेंगे। प्रतिनिधियों ने प्रशासन को उनकी मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया और निर्धारित समय सीमा में शिक्षकों को लंबित लाभ नहीं देने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी।

सरकारी और गैर सरकारी कर्मियों में हो रहा भेद / Distinction between government and non-government workers

यूटी प्रशासन चंडीगढ़ सरकारी और एडिड कालेजों में भेद कर रहा (Discrimination against Aided Colleges) है। सरकारी कालेजों में तो कई नये नियम लागू हो गये पर एडिड में यह नियम लागू नहीं किये गये। शहर के सात कालेजों-डीएवी कालेज-10 (DAV College-10) , एमसीएम डीएवी कालेज-36 (MCM DAV College-36), देव समाज कालेज-45 (Dev Samaj College-45), देव समाज कालेज आफ एजुकेशन -36, एसडी कालेज -32, गुरु गोबिंद सिंह कालेज-26, गुरु गोबिंद सिंह कालेज फार वूमेन-26 (Guru Gobind Singh College for Women-26) सरकारी सहायता-प्राप्त कालेजों में आते हैं। किसी भी फैकल्टी मैंबर के 60 साल का होने पर सरकारी कालेज में तो एक्सटेंशन मिल रही है मगर एडिड में कहीं मिल रही है तो कहीं नहीं मिल रही है। एसडी, एमसीएम डीएवी और देव समाज कालेज ने अपने यहां सशर्त ऐसे टीचर्स को सेवा विस्तार दे दिया है मगर एसजीजीएसडब्ल्यू-26 की मैनेजमेंट ने रिटायर होने वाले टीचर्स को सेवा विस्तार ने मना कर दिया। यह बात अलग है कि डीएचई ने इस बारे में एक लेटर भी जारी कर दिया है कि ऐसे टीचर्स को एक्सटेंशन दी जा सकती है।

मजदूरों से भी कम वेतन ले रहे शिक्षक

डीएवी कालेज-10 व एसडी कालेज (DAV College-10 and SD College) सहित करीब तीन दर्जन ऐसे भी टीचर्स हैं जो हैं तो रेगुलर हैं मगर प्रोबेशन पर रखे गये हैं। इस दौरान इन्हें एक अनस्किल्ड मजदूर से भी कम वेतन दिया जा रहा है। इन टीचर्स को तीन साल तक बेसिक सैलरी पर रखा जाता है और तीन साल के बाद ही पूरी सैलरी दी जाती है। पंजाब के सेवा नियमों के तहत पंजाब 21600 दे रहा है जबकि यूटी मात्र 15,600 (Punjab is giving 21600 while UT only 15,600) ही दे रहा है। सेंट्रल रूल लागू होने के बाद तीन साल प्रोबेशन की शर्त  भी समाप्त हो गई। नये नियमों में सिर्फ बेसिक सैलरी देने की शर्त भी नहीं है। देश के किसी भी राज्य में प्रोबेशन पर मात्र बेसिक सैलरी देने का प्रावधान नहीं है, पंजाब में वित्तीय संकट के चलते पिछली सरकारों में यह नियम बना था, जो अभी तक चला आ रहा है।

 

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