रिमझिम होटल पर चला प्रशासन का 'पीला पंजा', हाईकोर्ट के आदेश पर 8 साल पुराना विवाद खत्म
भागलपुर। शराब बरामदगी मामले में विवादों में रहे रिमझिम होटल पर आखिरकार आठ साल बाद गुरुवार को प्रशासन का पीला पंजा चल गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए शाम पांच बजे से देर रात तक होटल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई पूरी होने के बाद तिलकामांझी-बरारी मार्ग का स्वरूप बदल गया और सड़क पहले से अधिक चौड़ी हो गई।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़ी कार्रवाई
रिमझिम होटल को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया। नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीनों की मदद से होटल को ध्वस्त करना शुरू कियाइस कार्रवाई को पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
शाम से देर रात तक चला ध्वस्तीकरण अभियान
गुरुवार शाम लगभग पांच बजे से शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही। भारी संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारी मौके पर तैनात रहे। होटल के ढांचे को धीरे-धीरे पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। होटल के गिरते ही आसपास का क्षेत्र खुला और तिलकामांझी-बरारी मार्ग की चौड़ाई स्पष्ट रूप से बढ़ गई, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
जाम से मिलेगी राहत, एंबुलेंस को होगा फायदा
स्थानीय प्रशासन के अनुसार होटल हटाए जाने से इस मार्ग पर लंबे समय से बनी जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होगी। विशेष रूप से अस्पताल आने-जाने वाली एंबुलेंस, स्कूल वाहनों और आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब सड़क चौड़ी होने से यातायात का दबाव कम होगा और आवागमन सुगम हो सकेगा।
मलबा हटाने का तत्काल निर्देश
नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने कार्रवाई के तुरंत बाद मलबा हटाने के निर्देश दिए। नगर निगम की टीम को मौके पर ही सफाई और मलबा निष्कासन का काम सौंपा गया ताकि यातायात बहाल किया जा सके। जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य संसाधनों के साथ बड़ी संख्या में मजदूरों को भी तैनात किया गया।
दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती
सदर एसडीओ द्वारा इस कार्रवाई के लिए दो दंडाधिकारी नियुक्त किए गए। अवर सांख्यिकी पदाधिकारी राजेश कुमार और मत्स्य प्रसार पदाधिकारी शशिरंजन को जिम्मेदारी सौंपी गई। तिलकामांझी थाना और पुलिस केंद्र से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल को भी तैनात किया गया ताकि कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके।
गैरकानूनी गतिविधियों का आरोप
नगर निगम ने यह जमीन व्यवसायिक उपयोग के लिए लीज पर दी थी, लेकिन बाद में इसका उपयोग गैरकानूनी गतिविधियों में होने के आरोप सामने आए। जांच में सामने आया कि होटल परिसर में शराब से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
उत्पाद विभाग की कार्रवाई में हुआ था खुलासा
13 अक्टूबर 2020 को उत्पाद विभाग की टीम ने होटल के ग्राउंड फ्लोर के एक कमरे से 18 बोतल विदेशी शराब बरामद की थी। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद होटल संचालक ने अपना पक्ष रखा, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाने के कारण समाहर्ता की सुनवाई में होटल की संलिप्तता सिद्ध मानी गई।
2021 में लीज रद्द, फिर भी चलता रहा संचालन
समाहर्ता भागलपुर द्वारा 2020 में उत्पाद वाद में आदेश पारित किया गया था। इसके आधार पर 31 दिसंबर 2021 को नगर निगम ने होटल की लीज रद्द कर दी थी। इसके बावजूद होटल और आसपास की कुछ दुकानों का संचालन कथित रूप से जारी रहा, जिस पर प्रशासन ने गंभीर आपत्ति जताई।
99 साल की लीज और लंबा विवाद
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1985 में तत्कालीन कार्यपालक अधिकारी द्वारा यह जमीन 99 वर्षों की लीज पर दी गई थी। उस समय भवन निर्माण पर लगभग 1.76 लाख रुपये खर्च हुए थे। निगम के साथ हुए समझौते के अनुसार प्रतिमाह किराया तय किया गया था, जिसमें निर्माण लागत की कटौती का भी प्रावधान था। वर्षों तक भुगतान होता रहा, लेकिन बाद में विवाद बढ़ता गया।
हाईकोर्ट में चला मामला, फिर मिली अनुमति
वर्ष 2019 में आसपास की दुकानों को हटाए जाने के बाद रिमझिम होटल ने नगर निगम के आदेश के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन रहा, जिसके कारण कार्रवाई पर रोक लगी रही। लेकिन हालिया आदेश के बाद प्रशासन को कार्रवाई की अनुमति मिली।
चौराहे के विकास की योजना
प्रशासन का कहना है कि इस जमीन का उपयोग अब चौराहे के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए किया जाएगा। इससे न केवल सड़क चौड़ी होगी, बल्कि यातायात व्यवस्था भी बेहतर होगी। अस्पतालों की ओर जाने वाले रास्ते पर अब एंबुलेंस को जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे आपातकालीन सेवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा।
स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे यातायात सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कुछ ने लंबे समय तक चले विवाद और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए।
रिमझिम होटल विवाद का अंत
आठ वर्षों से लंबित रिमझिम होटल विवाद का अंत अंततः हाईकोर्ट के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ हो गया। इस ध्वस्तीकरण से जहां एक ओर तिलकामांझी-बरारी मार्ग चौड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।