Accused Granted Bail in Minor

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को जमानत, जिला अदालत का फैसला

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Accused Granted Bail in Minor

जिला अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार आरोपी को नियमित जमानत दे दी । अदालत ने खरक रामजी, जिला जींद (हरियाणा) निवासी रविंदर को नियमित जमानत दी। जिसने
जमानत याचिका दायर की थी। थाना सैक्टर-26 के दर्ज मामले के अनुसार पीड़िता का पिता मामले में शिकायकर्ता था। जिसने पिछले वर्ष 8 दिसंबर को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी 17 साल 6 माह की बेटी, जो कि सेक्टर-28 के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती है, 06 दिसंबर 2025 को सुबह 4 बजे घर से लापता हो गई थी। परिवार को शक था कि कोई उसे बहला-फुसलाकर ले गया है।           
जांच के दौरान लड़की को मुंबई से बरामद किया गया। 23 दिसंबर 2025 को पुलिस ने पीड़िता को आरोपी के साथ मुंबई से बरामद किया। पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसे मुंबई ले गया और 10 दिसंबर तथा 22 दिसंबर 2025 को उसके साथ बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाए।                                                                                                                                        
पुलिस ने मेडिकल जांच और बयान के आधार पर संबंधित धाराएं जोड़ते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश कर दिया। आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धाराएं 137(2), 87, 64(2)(एम ) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आरोप लगाए लगाए गए थे।
अ•िायोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 8 दिसंबर 2025 को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी 17 साल 6 माह की बेटी, जो कि सेक्टर-28 के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती है, 06 दिसंबर 2025 को सुबह 4 बजे घर से लापता हो गई थी। परिवार को शक था कि कोई उसे बहला-फुसलाकर ले गया है।
जांच के दौरान लड़की को मुंबई से बरामद किया गया। 23 दिसंबर 2025 को पुलिस ने पीड़िता को आरोपी के साथ मुंबई से बरामद किया। पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसे मुंबई ले गया और 10 दिसंबर तथा 22 दिसंबर 2025 को उसके साथ बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाए।
पुलिस ने मेडिकल जांच और बयान के आधार पर संबंधित धाराएं जोड़ते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश कर दिया।                                                                                   
याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने प्रारं•िाक बयान में स्वयं पारिवारिक विवाद के कारण मुंबई जाने की बात कही थी। आरोपी 27 दिसंबर 2025 से हिरासत में है, जबकि पीड़िता और मुख्य गवाहों के बयान हो चुके हैं। ऐसे में ट्रायल लंबा चलने की सं•ाावना को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए।                                                                 
वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गं•ाीर हैं और आरोपी के फरार होने की आशंका है, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।                                                                         
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि पीड़िता और शिकायतकर्ता के बयान दर्ज हो चुके हैं तथा बाकी गवाह औपचारिक हैं। साथ ही आरोपी 27 दिसंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है और ट्रायल में समय लगने की सं•ाावना है।                                                                                                                    
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को 50,000 रुपये के जमानती बांड और समान राशि के एक जमानती पर रिहा किया जाए। जमानत बांड ड्यूटी मजिस्ट्रेट, चंडीगढ़ के समक्ष •ाी प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान की गई टिप्पणियां केवल इस याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और ट्रायल के मेरिट पर कोई प्र•ााव नहीं डालेंगी।