चेक बाउंस मामले में आरोपी हरदीप सिंह गिल बरी, शिकायतकर्ता नहीं साबित कर पाया देनदारी
- By Gaurav --
- Monday, 15 Jun, 2026
Accused Acquitted in Cheque
धारा 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के तहत दायर एक चेक बाउंस मामले में आरोपी लुधियाना निवासी हरदीप सिंह गिल को बरी किया। मामला 80,000 के एक चेक से संबंधित था, जिसे कथित रूप से आरोपी द्वारा जारी किया गया बताया गया था। कैथल निवासी
शिकायतकर्ता बलदेव सिंह के अनुसार उसने आरोपी से एक वाहन खरीदा था और बाद में उसे पता चला कि उस वाहन पर ईएमआई बकाया थी। उसका कहना था कि इस देनदारी को चुकाने के लिए आरोपी ने उक्त चेक जारी किया था। हालांकि, बैंक में प्रस्तुत करने पर यह चेक “फंड्स इंसफिशिएंट” के कारण बाउंस हो गया।
वहीं आरोपी की तरफ से बचाव पक्ष वकील पलविंदर सिंह चीमा ने बताया कि अपने बचाव में स्वीकार किया कि चेक उसके खाते का है, लेकिन उसने इसे शिकायतकर्ता को जारी करने से इंकार किया। आरोपी के वकील का कहना था कि यह चेक उसने पहले वाहन के मूल मालिक रमेश्वर प्रसाद को सिक्योरिटी के तौर पर दिया था, जिसका बाद में दुरुपयोग किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान जिरह में शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि उसके और आरोपी के बीच कोई लिखित बिक्री समझौता नहीं हुआ था। इसके अलावा वाहन से जुड़े दस्तावेज मूल मालिक रमेश्वर प्रसाद के साथ ही निष्पादित हुए थे। यह भी सामने आया कि विवादित चेक का नंबर उसी सिक्योरिटी चेक से मेल खाता है जिसका उल्लेख आरोपी और रमेश्वर प्रसाद के बीच हुए पहले के समझौते में किया गया था।
अदालत ने शिकायतकर्ता के बयान में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए और यह माना कि वह आरोपी के खिलाफ कोई वैध देनदारी या कानूनी दायित्व साबित करने में असफल रहा।
अंततः अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता अपना मामला संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर आरोपी हरदीप सिंह गिल को बरी करते हुए उसे संदेह का लाभ दिया गया।