पंजाब: सरकारी तंत्र में 'दलालों' का मकड़जाल, CBI की जांच में 'प्रेशर टू पे' मॉडल का खुलासा

पंजाब: सरकारी तंत्र में 'दलालों' का मकड़जाल, CBI की जांच में 'प्रेशर टू पे' मॉडल का खुलासा

A Web of Middlemen Within the Government Machinery

A Web of 'Middlemen' Within the Government Machinery

चंडीगढ़। A Web of 'Middlemen' Within the Government Machinery, पंजाब में केंद्रीय जांच एजेंसियों की हालिया कार्रवाइयों में एक पैटर्न बार-बार सामने आ रहा है। संवेदनशील सरकारी मामलों के बीच सक्रिय दलालों की भूमिका। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के ताजा रिश्वत प्रकरण में केंद्रीय इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (सीबीआई) की जांच अब इस दिशा में बढ़ रही है।

शिकायत दर्ज कराने से लेकर मामले को निपटाने तक कथित दलाल किस तरह सरकारी तंत्र के भीतर पहुंच बनाकर काम कर रहे हैं। अफसरों तक पहुंच का दावा कर अफसरों के ही निजी सहायक दलालों के जरिए शिकायतों को हथियार बनाकर वसूली करने का प्रेशर टू पे या डराकर वसूली माडल का खेल जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आ रहा है।

आरोप है कि कुछ मामलों में झूठी शिकायतें दर्ज करवाकर अधिकारियों को डराया जाता है, जबकि कहीं लंबित शिकायतों को बंद कराने या केस में फंसाने का भय दिखाकर रकम मांगी जाती है। इसी तरह दलालों के जरिए मंजौले व उच्च स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए पोस्टिंग व ट्रांसफर का खेल का भी पता चला है।

भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद खुले राज

निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद दलालों के जरिए पोस्टिंग व ट्रांसफर का पर्दाफाश हुआ था। इस मामले में कई आईपीएस और आईएएस अधिकारियों के शामिल होने की बात कहीं जा रही थी। जिस की जांच अभी भी सीबीआई की ओर से की जा रही है। अब पंजाब विजिलेंस से जुड़े ताजा प्रकरण ने इस नेटवर्क पर फिर सवाल खड़े किए हैं।

सीबीआई की ओर से विजिलेंस मुख्यालय से जब्त सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस जांच की अहम कड़ी बन गई है। मोहाली स्थित विजिलेंस मुख्यालय से सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग और जब्त डीवीआर की फुटेज में 29 अप्रैल को शिकायतकर्ता एक्साइज टैक्सशन आफिसर (ईटीओ) अमित कुमार मुख्यालय में प्रवेश करते दिखाई दिए।

वीडियो से बदला जांच का फोकस

सूत्रों के अनुसार, पहले उन्हें अतिथि कक्ष में बैठाया गया और फिर डीजीपी विजिलेंस के रीडर इंस्पेक्टर ओपी राणा के कमरे में ले जाया गया, जहां वह काफी देर तक मौजूद रहे। यहीं से जांच का फोकस बदल गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रीडर ने उन्हें उनके खिलाफ दर्ज शिकायत दिखाई और कहा कि यदि रकम दी जाए तो मामला बंद कराया जा सकता है।

सीबीआई अब इस फुटेज को उस कथित नेटवर्क की पहली प्रत्यक्ष कड़ी मान रही है, जिसमें शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारी को दफ्तर बुलाकर दबाव बनाया जाता था और फिर बाहर बैठे बिचौलिये संपर्क साधते थे।

मोबाइल से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्य

सूत्र बताते हैं कि एजेंसी ने राघव गोयल के मोबाइल फोन से भी कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। इनमें बातचीत, संदेश और संपर्कों का विवरण शामिल है। शिकायतकर्ता को विश्वास दिलाने के लिए राघव ने कथित तौर पर ओपी राणा के साथ अपनी बातचीत भी दिखाई थी। इसी आधार पर सीबीआई को शक है कि विभाग के भीतर से संवेदनशील जानकारी बाहर पहुंचाई जा रही थी और उसी का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए किया जाता था।

जांच में एक अहम पहलू यह भी उभरा है कि अमित कुमार के खिलाफ दर्ज मूल शिकायत की सत्यता पर सवाल हैं। एजेंसी यह जांच रही है कि क्या शिकायत केवल दबाव बनाने के लिए करवाई गई थी। यदि ऐसा साबित होता है, तो मामला साधारण रिश्वतखोरी से आगे बढ़कर सुनियोजित उगाही का बन सकता है, जिसमें पहले शिकायत का डर और फिर बिचौलियों के जरिए समझौते की पेशकश की जाती थी।

आय से अधिक संपत्ति बता करते थे ब्लैकमेल

मामले में शिकायतकर्ता अमित कुमार को आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसा कर करियर खत्म करने का डर दिखाया जा रहा था। मलोट में तैनात ईटीओ ने सीबीआई को बताया है कि उसे कहा गया था कि अगर जल्द पैसा नहीं दिया गया तो मामला दर्ज कर लिया जाएगा। जिसके बाद परेशान होकर उसने शिकायत सीबीआई को की। अभी तक की जांच में शिकायत भी फर्जी पाई गई है।