चंडीगढ़ में निकली भव्य वाहन संकीर्तन यात्रा, हजारों बच्चों ने किया मातृ-पितृ पूजन

चंडीगढ़ में निकली भव्य वाहन संकीर्तन यात्रा, हजारों बच्चों ने किया मातृ-पितृ पूजन

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A grand vehicle Sankirtan Yatra was organised in Chandigarh, where thousands of children worshipped

14 फरवरी को जहाँ एक ओर युवाओं के बीच वैलेंटाइन डे की चर्चा रहती है, वहीं चंडीगढ़ में इस दिन को ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ के रूप में मनाते हुए एक भव्य और दिव्य आयोजन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। श्री योग वेदान्त सेवा समिति और युवा सेवा संघ के संयुक्त तत्वावधान में विशाल वाहन संकीर्तन यात्रा एवं सामूहिक मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

शहरभर में निकली संकीर्तन यात्रा

दोपहर 12 बजे सेक्टर-23 स्थित मुनि जी के मंदिर से प्रारंभ हुई यह विशाल वाहन संकीर्तन यात्रा सेक्टर 23, 22, 21, 20, 30, 29 की मार्केटों, ट्रिब्यून चौक सहित सेक्टर 31 से 39 तक विभिन्न क्षेत्रों से गुजरती हुई धनास में संपन्न हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन और भारतीय संस्कृति के संदेशों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

आयोजकों के अनुसार इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और समाज को जागरूक करना था कि पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल के स्थान पर अपने माता-पिता के प्रति आदर-सम्मान और कृतज्ञता प्रकट की जाए तथा 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाया जाए।

2007 से चल रहा अभियान

समिति से जुड़े संतों के अनुसार वर्ष 2007 में संत श्री आशारामजी बापू ने 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया था। तब से पिछले लगभग दो दशकों से यह अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि इस सकारात्मक पहल को देश-विदेश में सराहना मिल रही है और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त आधार मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव” जैसे मूल सिद्धांत भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और इन्हीं मूल्यों को पुनः स्थापित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।

आश्रम में हुआ विशाल सामूहिक पूजन

इसी अवसर पर सेक्टर स्थित संत श्री आशारामजी आश्रम में भी विशाल सामूहिक मातृ-पितृ पूजन समारोह आयोजित किया गया। चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, कालका-पिंजौर एवं आसपास के क्षेत्रों से हजारों अभिभावक अपने बच्चों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम में बच्चों ने विधि-विधान से अपने माता-पिता का पूजन किया, उनकी परिक्रमा की, आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भावनात्मक दृश्य देखने को मिला जब भजन प्रस्तुतियों के बीच कई अभिभावक और बच्चे भावुक हो उठे। बच्चों ने अपने माता-पिता के चरणों में शीश झुकाकर उनके बताए मार्ग पर चलने और जीवन में उन्नति प्राप्त करने का संकल्प लिया।

एक लाख से अधिक विद्यालयों में आयोजन

समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान 14 फरवरी से पूर्व देशभर के लगभग एक लाख विद्यालयों में मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली क्षेत्र के 166 विद्यालयों में विशेष रूप से इस प्रकार के कार्यक्रम संपन्न हुए।

इन कार्यक्रमों में लाखों विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से अपने माता-पिता का पूजन कर हर वर्ष 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया। अनेक विद्यालयों के प्राचार्यों ने इस पहल की सराहना करते हुए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा भी व्यक्त की।

गणमान्य व्यक्तियों ने की सराहना

प्रेस नोट के अनुसार भारतीय संस्कृति के उत्थान हेतु चलाए जा रहे इस अभियान की देश के राष्ट्रपति, विभिन्न राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों तथा शिक्षाविदों द्वारा सराहना की गई है।

आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और परिवार संस्था को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।

चंडीगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी परिवारिक मूल्यों को पुनर्स्मरण कराने वाला आयोजन साबित हुआ।