क्या जंक फूड के विज्ञापनों पर लगेगी रोक? आर्थिक सर्वे में मोटापे को लेकर कही गई बड़ी बात

Ban Junk Food Ads

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नई दिल्ली: Ban Junk Food Ads: आर्थिक सर्वेक्षण ने भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) यानी जंक फूड की तेजी से बढ़ती खपत और इसके कारण बच्चों व युवाओं में मोटापे के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है. लोकसभा में पेश प्री-बजट दस्तावेज में कहा गया है कि भारत अब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते UPF बाजारों में शामिल हो गया है, जिससे दीर्घकाल में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और असमानताएं बढ़ सकती हैं.

बच्चों में बढ़ता मोटापा

सर्वेक्षण के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन की समस्या तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2015-16 में जहां यह आंकड़ा 2.1 प्रतिशत था, वहीं 2019-21 में बढ़कर 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गया. अनुमान है कि वर्ष 2020 में देश में लगभग 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे, जो 2035 तक बढ़कर 8.3 करोड़ हो सकते हैं.

वयस्कों में भी बढ़ रही समस्या

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आर्थिक सर्वेक्षण ने बताया कि भारत में 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आते हैं. 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में 6.4 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 4 प्रतिशत है.

विज्ञापनों पर सख्ती की सिफारिश

सर्वेक्षण ने जंक फूड की खपत को नियंत्रित करने के लिए सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक सभी मीडिया प्लेटफॉर्म पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया है. खासतौर पर बच्चों को लक्षित विज्ञापनों, डिजिटल मीडिया तथा दूध और पेय पदार्थों के प्रचार पर सख्ती की बात कही गई है.

नीतिगत सुधारों की जरूरत

आर्थिक सर्वेक्षण का मानना है कि केवल उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव से स्वस्थ खानपान संभव नहीं है. इसके लिए खाद्य प्रणाली से जुड़े समन्वित नीतिगत सुधार आवश्यक हैं. इनमें हाई फैट, शुगर और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल, फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग, जिम्मेदार मार्केटिंग और यूपीएफ उत्पादन के नियमन जैसे कदम शामिल हैं.

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

सर्वेक्षण ने चिली, नॉर्वे और ब्रिटेन जैसे देशों का उदाहरण दिया है, जहां जंक फूड के विज्ञापनों पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं. ब्रिटेन में हाल ही में बच्चों पर प्रभाव कम करने के उद्देश्य से रात 9 बजे से पहले जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाई गई है.

तेजी से बढ़ता कारोबार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में UPF की बिक्री 2009 से 2023 के बीच 150 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है. वर्ष 2006 में जहां इसका बाजार आकार 0.9 अरब डॉलर था, वहीं 2019 तक यह बढ़कर लगभग 38 अरब डॉलर पहुंच गया. इसी अवधि में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापे की दर लगभग दोगुनी हो गई है.