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त्रयोदशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है : कृष्ण नारंग

त्रयोदशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है : कृष्ण नारंग

कैथल (मोहित गुलाटी)। त्रयोदशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है। त्रयोदशी का व्रत करने वाले को दो गायों को दान देने के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धूल जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है। त्रयोदशी को लेकर एक पौराणिक तथ्य सामने आता है कि एक दिन जब चारों और अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगी।

यह अभिव्यक्ति प्रताप गेट स्थित श्री सिद्धपीठ शिव वाटिका के प्रधान कृष्ण नारंग ने त्रयोदशी अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में की। शिव वाटिका में त्रयोदशी का त्यौहार बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रधान कृष्ण नारंग ने बताया कि ङ्क्षहदू पंचाग की तेरहवीं तिथि त्रयोदशी होती है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को अधिक करेगा उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव आराधना करेगा, उस पर शिव कृपा होगी।

इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म- जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने मिलकर पूरे विधि विधान से महादेव की पूजा अर्चना की।

कैथल (मोहित गुलाटी)। त्रयोदशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है। त्रयोदशी का व्रत करने वाले को दो गायों को दान देने के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धूल जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है। त्रयोदशी को लेकर एक पौराणिक तथ्य सामने आता है कि एक दिन जब चारों और अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगी। यह अभिव्यक्ति प्रताप गेट स्थित श्री सिद्धपीठ शिव वाटिका के प्रधान कृष्ण नारंग ने त्रयोदशी अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में की। शिव वाटिका में त्रयोदशी का त्यौहार बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रधान कृष्ण नारंग ने बताया कि ङ्क्षहदू पंचाग की तेरहवीं तिथि त्रयोदशी होती है।

उन्होंने बताया कि व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को अधिक करेगा उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव आराधना करेगा, उस पर शिव कृपा होगी। इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म- जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने मिलकर पूरे विधि विधान से महादेव की पूजा अर्चना की।  त्रयोदशी अवसर पर महिला मंडल ने मिलकर संकीर्तन किया और भंडारा भी वितरण किया।

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