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भाजपा से पहले हुड्डा से पूछें दलाल: जैन-

भाजपा से पहले हुड्डा से पूछें दलाल: जैन-

बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने वाले घड़ियाली आंसू बहाने से बाज आएं-

चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया विभाग प्रमुख राजीव जैन ने प्रदेश में बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले कांग्रेसी विधायक करण सिंह दलाल पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा से पहले उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सवाल पूछने चाहिएं। जिन्होंने दस साल के अपने शासन में बिजली चोरी को बढ़ावा दिया और व्यवस्था को सुधारने की बजाय पटरी से उतार दिया।
बुधवार देर शाम भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग प्रमुख राजीव जैन ने कांग्रेसी विधायक करण सिंह दलाल के भाजपा सरकार पर बिजली व्यवस्था पर लगाए गए आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निजी बिजली कंपनियों के संदर्भ में दलाल को भाजपा से पहले सवाल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में राज्य के बाहर से बिजली स्त्रोतों एवं निजी बिजली कंपनियों से हुए समझौते हुड्डा शासन के दौरान हुए थे। इसमे वर्ष 2010 में पीटीसी बगलीहाल जम्मू एवं कश्मीर से 50 मेगावाट बिजली 3.72 रुपए प्रति यूनिट, वर्ष 2008 में अडानी गुजरात से 1424 मेगावाट बिजली 2.94 रुपए प्रति यूनिट, वर्ष 2008 में पीटीसी जीएमआर से 300 मेगावाट बिजली 2.86 रुपए प्रति यूनिट, वर्ष 2007 में टाटा सीजीपीएल गुजरात से 400 मेगावाट बिजली 2.26 रुपए प्रति यूनिट, वर्ष 2008 में झज्जर स्थापित चाइना पावर लिमिटेड से 1320 मेगावाट बिजली 4.79 रुपए प्रति यूनिट, वर्ष 2007 में पीटीसी लैंको अमर कण्टक से 300 मेगावाट बिजली 2.92 रुपए प्रति यूनिट, वर्ष 2007 में पीटीसी करछम वांगतो हिमाचल प्रदेश से 200 मेगावाट बिजली का 3.57 रुपए प्रति यूनिट का अनुबंध किया गया था, इसमे टाटा सीजीपीएल और चाइना पावर लिमिटेड के दरों में बदलाव कोयला के रेट पर निर्भर रहता है।
भाजपा नेता राजीव जैन ने कहा कि प्रदेश में सर्दी में बिजली की मांग 3000 मेगावाट से 7000 मेगावाट तथा गर्मी में 7000 मेगावाट से 9800 मेगावाट रहती है और प्रदेश में बिजली क्षमता 11086 मेगावाट है। इसमें 80 फीसदी लोड फैक्टर के चलते बिजली खपत 8870 मेगावाट के करीब पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में हुए अनुबंधों से सरकार छेड़छाड़ नहीं कर सकती, लेकिन सरकार ने बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने और सुधारीकरण की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम सरचार्ज में बढ़ोतरी पर कहा कि 15 साल पहले पालिका क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन वर्तमान के केवल 10 फीसदी थे और दर 5 पैसे प्रति यूनिट थी। समय के साथ बढ़ी आबादी, स्ट्रीट लाइट के पॉइंट और खर्च के अनुपात में इस  राशि मे बढ़ोतरी नहीं हुई और पालिका पर करोड़ो रुपए के बिजली बकाया हो गया। उन्होंने कहा कि हुड्डा शासन में ऐसी अड़चनों को दूर करने की बजाय डिफाल्टरों के 1600 करोड़ रुपए माफ करते हुए अपना राजनीतिक फायदा देखा और व्यवस्था को पटरी से उतार दिया।
उन्होंने स्लैब में बदलाव से आम उपभोक्ता तक पहुंचे फायदे की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2014 में 50 यूनिट पर मासिक बिल 202.90 रुपए, 100 यूनिट पर मासिक बिल 489.40 रुपए, 200 यूनिट पर मासिक बिल 1062.40 रूपए तथा 300 यूनिट पर 1677.40 रुपए मासिक बिल आता था, लेकिन वर्ष 2017 में 50 यूनिट पर मासिक बिल 153.50 रुपए, 100 यूनिट पर मासिक बिल 497.00 रुपए, 200 यूनिट पर मासिक बिल 1011.40 रूपए तथा 300 यूनिट पर 1626.00 रुपए मासिक बिल आया, जिसमें सीधा लाभ आम उपभोक्ता तक पहुंचा।
उन्होंने कहा कि 2014 से पहले प्रदेश में 40 से 60 प्रतिशत तक बिजली चोरी होती थी, इसमे तकनीकी कारणों से 15 से 20 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 60 से 80 फीसदी तक लाइन लॉस था। वर्तमान सरकार के प्रयासों से बिजली बिलों की वसूली 90 प्रतिशत हो गई, जो पूर्व में 50 प्रतिशत ही थी। आज प्रदेश के 1340 गांवों में 24 घण्टे तथा 81 गांवो में 18 घण्टे बिजली दे रहे हैं। औसतन प्रत्येक फीडर पर 40 प्रतिशत बिजली चोरी पर रोक लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है कि भाजपा सरकार बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

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