सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदले समीकरण, शिमला की तीन स्थानीय निकायों में अध्यक्ष चुनाव हुआ रोमांचक

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदले समीकरण, शिमला की तीन स्थानीय निकायों में अध्यक्ष चुनाव हुआ रोमांचक

Nikay-Chunav-1781525896482_v

शिमला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को स्थानीय निकायों में विधायकों के मतदान अधिकार बहाल होने से जिला शिमला की तीन स्थानीय निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव बेहद दिलचस्प हो गए हैं। अब तक भाजपा को जहां पार्षदों की संख्या के आधार पर बढ़त मिलती दिख रही थी, वहीं संबंधित क्षेत्रों के कांग्रेस विधायकों को मतदान का अधिकार मिलने से मुकाबला बराबरी पर आ गया है।

भाजपा के पास अधिक पार्षदों की संख्या

शिमला की रामपुर, ठियोग और सुन्नी नगर परिषदों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर दोनों दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। तीनों निकायों में भाजपा के पास पार्षदों की संख्या कांग्रेस से एक अधिक है।

कांग्रेस विधायक के वोट से बदले समीकरण

संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक होने के कारण मतदान के समय दोनों दलों की संख्या बराबर हो जाएगी। 

रामपुर, ठियोग व सुन्नी में क्या है स्थिति

रामपुर नगर परिषद में भाजपा के पांच और कांग्रेस के चार पार्षद हैं। यहां कांग्रेस विधायक का वोट जुड़ने के बाद दोनों दलों की ताकत पांच-पांच हो जाएगी। इसी तरह ठियोग नगर परिषद में भाजपा के चार और कांग्रेस के तीन पार्षद हैं। ठियोग के कांग्रेस विधायक का वोट शामिल होने पर यहां भी मुकाबला चार-चार की बराबरी पर पहुंच जाएगा। 

सुन्नी नगर पंचायत में भी भाजपा के चार और कांग्रेस के तीन पार्षद हैं। कांग्रेस विधायक के मतदान करने से यहां भी दोनों पक्षों के पास चार-चार वोट हो जाएंगे। 

तो टॉस तक पहुंच सकती है स्थिति

ऐसे में तीनों निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान किसी भी पक्ष को स्पष्ट बढ़त नहीं रहेगी। बराबरी की स्थिति बनने पर चुनाव का फैसला टॉस तक पहुंच सकता है। 

क्रॉस वोटिंग की भी आशंका

हालांकि उससे पहले दोनों दल अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की पूरी कोशिश करेंगे। ऐसे में क्रॉस वोटिंग या किसी पार्षद के पाला बदलने की आशंका भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है।
भाजपा जहां अपने पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि विधायकों के वोट से बने नए समीकरण उसका रास्ता आसान कर सकते हैं। 

सुप्रीमकोर्ट के फैसले ने शिमला जिले की इन तीन निकायों में सत्ता की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में हर वोट की अहमियत बढ़ गई है और राजनीतिक गलियारों में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर सत्ता की कुर्सी किसके हिस्से आती है।