30 सेकंड में बच्चे को 8 बार पटका... मासूम आरव की जितेंद्र ने क्यों ली थी जान, दरिंदगी की पूरी कहानी
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30 सेकंड में बच्चे को 8 बार पटका... मासूम आरव की जितेंद्र ने क्यों ली थी जान, दरिंदगी की पूरी कहानी

Firozabad Aarav Murder Case

Firozabad Aarav Murder Case

Firozabad Aarav Murder Case: कभी-कभी किसी अपराध की क्रूरता सिर्फ इसलिए नहीं डराती कि उसमें किसी की जान चली गई, बल्कि इसलिए भी कि उसका कोई तर्क नहीं होता. फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या भी ऐसी ही एक घटना थी, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था. एकतरफा प्यार में अंधे विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने उस मासूम को निशाना बनाया, जिसने अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीखा था. आखिरकार इस बहुचर्चित मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है. आइए जानते हैं इस जघन्य हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम…

अरांव क्षेत्र की रहने वाली रति देवी की शादी साल 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी. वैवाहिक जीवन में विवाद बढ़ने के कारण वह पिछले करीब पांच महीनों से अपने मायके में रह रही थी. उसके साथ उसका डेढ़ वर्षीय बेटा आरव भी था इसी दौरान पति सुमित का रिश्तेदार जितेंद्र पाठक रति के संपर्क में आया. शुरुआत में उसने मदद और सहारे का भरोसा दिया, लेकिन धीरे-धीरे उसने रति से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी.

इसके बाद शादी का प्रस्ताव रख दिया. रति ने साफ शब्दों में उसे मना कर दिया. पुलिस जांच के अनुसार, इस इनकार को जितेंद्र स्वीकार नहीं कर सका. वह लगातार रति पर शादी का दबाव बनाता रहा और जब हर बार उसे असफलता मिली तो उसका गुस्सा एक मासूम बच्चे पर टूट पड़ा.

27 सेकंड… और हमेशा के लिए थम गई आरव की सांसें

30 मई को रति देवी अपनी मां के साथ एक कानूनी मामले में सलाह लेने शिकोहाबाद पहुंची थी. उसी दौरान जितेंद्र भी वहां पहुंच गया. आरोप है कि उसने मासूम आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाया और उसे अपने साथ ले गया. कुछ ही दूरी पर सुनसान जगह पर उसने ऐसी क्रूरता की, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है. उसने महज 27 सेकंड के भीतर डेढ़ वर्षीय आरव को आठ बार सड़क पर पटका. गंभीर चोटों के कारण बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई. वारदात के बाद जितेंद्र बच्चे के शव को रति के घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया. आरव को पटकने का CCTV भी सामने आया था.

पुलिस ने 6 दिन में दाखिल की चार्जशीट

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की. विवेचना को समयबद्ध तरीके से पूरा करते हुए केवल छह दिनों के भीतर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई. अभियोजन पक्ष ने अदालत में 13 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश हुआ. पुलिस ने साक्ष्यों के साथ अन्य महत्वपूर्ण सबूत भी अदालत के सामने रखे. शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी के अनुसार, अभियोजन ने मामले को मजबूत तरीके से प्रस्तुत किया और सभी साक्ष्य न्यायालय की कसौटी पर खरे उतरे.

40 दिन में सुनवाई हुई पूरी

शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई इस वारदात के महज 40 दिनों के भीतर अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुना दिया. गुरुवार को जितेंद्र पाठक को दोषी करार दिया गया और अगले दिन सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसे फांसी की सजा सुनाई. फैसले को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोषी को अदालत में पेश किया गया. सजा सुनाए जाने के बाद जितेंद्र भावुक हो गया और अदालत कक्ष में खुद को थप्पड़ मारने लगा.