Sampat Singh ने वर्ष 1980 में उपचुनाव लड़ आरम्भ किया था राजनीतिक सफर, देखें अब क्या करेंगे
Sampat Singh ने वर्ष 1980 में उपचुनाव लड़ आरम्भ किया था राजनीतिक सफर

Sampat Singh ने वर्ष 1980 में उपचुनाव लड़ आरम्भ किया था राजनीतिक सफर, देखें अब क्या करेंगे

Sampat Singh ने वर्ष 1980 में उपचुनाव लड़ आरम्भ किया था राजनीतिक सफर, देखें अब क्या करेंगे

10 वर्ष कांग्रेस में रहने के बाद  अक्टूबर, 2019 में भाजपा से जुड़े, अब कांग्रेस में कर रहे वापसी

चंडीगढ़ - Sampat Sing: हिसार ज़िले की आदमपुर विधानसभा सीट से  दो दिन पूर्व 3 अगस्त को  निवर्तमान कांग्रेस  विधायक कुलदीप बिश्नोई ने त्यागपत्र दे दिया  जिसके अगले ही दिन उन्होंने औपचारिक तौर पर  भाजपा का दामन थाम लिया है. आगामी कुछ माह में रिक्त हुई  आदमपुर सीट पर उपचुनाव होगा जिसमें  कुलदीप या संभवत: उनके पुत्र भव्य बिश्नोई भाजपा प्रत्याशी हो सकते हैं.  

इसी बीच गत दिवस  प्रदेश   राजनीति के दिग्गज खिलाडी  माने जाने वाले प्रोफेसर सम्पत सिंह(Sampat Sing) ने  राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से मुलाक़ात की है जिससे सम्पत के  शीघ्र ही कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की प्रबल सम्भावना है. ऐसे भी कयास लग रहे है  कि  कांग्रेस द्वारा उन्हें या संभवत: उनके पुत्र गौरव सिंह को आदमपुर  उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी के तौर पर उतरा जा सकता है.

Sampat Sing: 42 वर्षो में 6 चुनाव जीते जबकि 2 लोकसभा चुनावों  सहित 7 बार मिली हार 

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने वर्तमान में  73 वर्षीय सम्पत सिंह(Sampat Sing) के राजनीतिक जीवन पर बताया कि उन्होंने आज तक  6 विधानसभा चुनाव जीते जबकि कुल 7 बार  हार का सामना करना पड़ा.  वर्ष 1972 से 1977 तक हिसार के दयानन्द कॉलेज में पोलिटिकल साइंस के लेक्चरर रह चुके  सम्पत  वर्ष 1977 से 1979 तक प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवी लाल के राजनीतिक सचिव रहे थे. 

       2008 में आदमपुर उपचुनाव और 2009 में हिसार लोकसभा चुनाव में  भजन लाल से मिली थी शिकस्त
        ऐसा माना  जाता है कि सम्पत को राजनीति में लाने वाले ही देवी लाल थे. वर्ष 1980 में जब देवी लाल सोनीपत से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए, तो उन्होंने  हिसार ज़िले की भट्टूकलां विधानसभा सीट छोड़ दी थी जिसके  उपचुनाव में सम्पत ने जनता  पार्टी सेक्युलर से उनके जीवन का पहला चुनाव लड़ा परन्तु वह कांग्रेस के रण सिंह बेनीवाल से  हार गए थे. उस समय प्रदेश के  मुख्यमंत्री भजन लाल थे.      

हेमंत ने बताया

हेमंत ने आगे बताया कि हालांकि उसके बाद वर्ष 1982  में हुए हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में सम्पत   भट्टूकलां से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और उन्होंने कांग्रेस के रण सिंह को पराजित किया.   पांच वर्ष  बाद  वर्ष 1987 में प्रदेश के अगले विधानसभा आम चुनावों में सम्पत ने  लोक दल से चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के मणिराम  गोदारा को हराया. पहले  देवी लाल और उसके पश्चात  ओम प्रकाश चौटाला, बनारसी दास गुप्ता और मास्टर हुक्म सिंह की लोकदल सरकार के  दौरान सम्पत गृह विभाग सहित विभिन्न विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे थे.  वर्ष 1991 विधानसभा चुनावों में उन्होंने जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए एवं  फिर से गोदारा  को पराजित किया जो तब बंसी लाल की हविपा से चुनाव लड़े थे. उन चुनावों के बाद बनी कांग्रेस की भजन लाल सरकार दौरान सम्पत पूरे पांच वर्षो तक हरियाणा विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष रहे थे.      

इसके बाद वर्ष 1996 विधानसभा आम चुनावों  में समता पार्टी से चुनाव लड़ सम्पत हालांकि हविपा के मणिराम गोदारा से चुनाव हार गए थे. इसके करीब दो वर्ष बाद जब फतेहाबाद उपचुनाव हुआ, तब सम्पत हरियाणा लोक दल (राष्ट्रीय) से चुनाव लड़ जीते गए थे. इसके बाद वर्ष 2000 में सम्पत ने इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ कांग्रेस के जगदीश नेहरा को हराया और  चौटाला सरकार में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री बने. इसके बाद वर्ष 2005 हरियाणा विधानसभा चुनावो में सम्पत हालांकि  कांग्रेस के कुलवीर सिंह से चुनाव हार गए थे.

Sampat Sing को इनेलो उम्मीदवार के तौर पर भजन लाल के विरूद्ध उतारा

हेमंत ने आगे बताया कि वर्ष 2008 में जब हिसार ज़िले की आदमपुर सीट से उपचुनाव हुआ, उसमें इनेलो ने सम्पत को  इनेलो उम्मीदवार के तौर पर भजन लाल के विरूद्ध उतारा जबकि  कांग्रेस पार्टी के  प्रत्याशी   रणजीत चौटाला (वर्तमान में प्रदेश के बिजली और जेल मंत्री )  थे. उस उपचुनाव में सम्पत भजन लाल से हार गए थे. उसके  अगले वर्ष 2009 में 15 वी  लोकसभा आम चुनावों में सम्पत ने इनेलो उम्मीदवार  के तौर  हिसार लोकसभा सीट से भजन लाल के विरूद्ध चुनाव लड़  उन्हें कड़ी टक्कर तो दी परन्तु सम्पत  सात हज़ार वोटों से वह चुनाव हार गए.      

32 वर्षो तक देवी लाल- चौटाला  के साथ रहने के  बाद  सम्पत  जुलाई, 2009 में कांग्रेस  में शामिल हो गए.  उन्होंने अक्टूबर, 2009 विधानसभा आम चुनावों  में हजका उम्मीदवार जसमा देवी, जो भजन लाल की धर्मपत्नी है, को नलवा विधानसभा हलके से पराजित किया और पहली बार कांग्रेस पार्टी से विधायक बने.  वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में सम्पत ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर हिसार लोकसभा से दोबारा चुनाव लड़ा परन्तु वह दुष्यंत चौटाला (वर्तमान में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ), जो तब इनेलो में थे, से चुनाव हार गए.  अक्टूबर, 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में  सम्पत नलवा विधानसभा सीट से इनेलो के रणबीर गंगवा (वर्तमान में हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष) से  चुनाव हार गए.

10 वर्ष कांग्रेस में रहने के  बाद  अक्टूबर, 2019 में सम्पत भाजपा से जुड़ गए  हालांकि  उन्हें पिछले  विधानसभा चुनावों में न तो नलवा सीट से और न ही किसी अन्य  सीट से भाजपा का टिकट मिला. वर्ष 2020 में  केंद्र की मोदी सरकार द्वारा बनाये गए  तीन  कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए सम्पत ने भाजपा से भी किनारा कर लिया था.