पाकिस्तान सरकार ने आम चुनाव कराने की पीटीआइ की मांग ठुकराई, अपना कार्यकाल पूरा करने का किया फैसला
पाकिस्तान सरकार ने आम चुनाव कराने की पीटीआइ की मांग ठुकराई

पाकिस्तान सरकार ने आम चुनाव कराने की पीटीआइ की मांग ठुकराई, अपना कार्यकाल पूरा करने का किया फैसला

पाकिस्तान सरकार ने आम चुनाव कराने की पीटीआइ की मांग ठुकराई, अपना कार्यकाल पूरा करने का किया फैसला

इस्लामाबाद:   पाकिस्तान में गठबंधन सहयोगियों ने काफी विचार-विमर्श के बाद फैसला किया है कि मौजूदा सरकार जल्द चुनाव कराने के बजाय अपना कार्यकाल पूरा करेगी। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

जियो न्यूज के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि सरकार ने देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए कड़े फैसले लेने का भी फैसला किया है।

वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ बातचीत के लिए दोहा के लिए रवाना हो चुके हैं और कथित तौर पर कुछ दिनों के अंदर कड़े कदम उठाए जाएंगे।

यह फैसला सोमवार को सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुखों की बैठक के बाद लिया गया है।

अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा इस्लामाबाद की ओर एक लंबे मार्च की घोषणा के बाद देश में अस्थिर राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए संबद्ध दलों के प्रमुख मिले।

जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, खान के विरोध आह्वान से निपटने की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी प्रमुखों की बैठक बुलाई गई थी।

सरकार अब पीटीआई की ओर से निकाले जाने वाले लॉन्ग मार्च से निपटने के लिए विशेष तैयारी कर रही है।

सूत्रों ने कहा कि अगर पीटीआई ने धरना देने के साथ ही व्यवस्था को पंगु बनाने की कोशिश की, तो सरकार इसे रोकने के लिए कानूनी विकल्पों की ओर रुख करेगी।

खान ने रविवार को चुनाव की तारीख घोषित करने और नेशनल असेंबली को भंग करने की मांग के साथ बुधवार को इस्लामाबाद के लिए एक आजादी मार्च की घोषणा की थी।

उन्होंने सेना से तटस्थता के उसके वादे का पालन करने के लिए भी कहा।

जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार मुश्किल में है, क्योंकि आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रम को पुनर्जीवित नहीं किया गया तो देश दिवालिया होने की आशंका के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो सकती है।

आईएमएफ ने सरकार से पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी हटाने की मांग की है, जिससे महंगाई बढ़ने की संभावना है। सत्तारूढ़ दल अब इस मामले पर बातचीत कर रहे हैं, क्योंकि इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम निकलेंगे और सरकार को आम नागरिकों के भारी गुस्से का भी सामना करना पड़ सकता है।

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