राष्ट्रीय लोक अदालत में 45,946 से अधिक मामलों का निपटारा, 27.22 करोड़ रुपये के समझौते

राष्ट्रीय लोक अदालत में 45,946 से अधिक मामलों का निपटारा, 27.22 करोड़ रुपये के समझौते

Cases Settled at National Lok Adalat

Cases Settled at National Lok Adalat

-वैवाहिक विवाद को सुलझाने के लिए ईमानदार प्रयास की अपील 

चंडीगढ़, 14 मार्च: Cases Settled at National Lok Adalat: जिला  अदालत सेक्टर-43  कॉम्प्लेक्स में शनिवार को वर्ष की  पहली   राष्ट्रीय लोक  अदालत आयोजित की गई l राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित मामलों, प्री-लिटिगेटिव मामलों और ट्रैफिक चालानों सहित कुल 45,946 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान कुल 27,22,25,076 की राशि के समझौते दर्ज किए गए।

यह लोक अदालत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यूटी चंडीगढ़ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, यूटी चंडीगढ़ द्वारा आयोजित की गई। लोक अदालत में कुल 13 बेंचों का गठन किया गया, जिनकी अध्यक्षता कार्यरत न्यायिक अधिकारियों ने की।

इन बेंचों में आपराधिक समझौता योग्य मामले, एन.आई. एक्ट की धारा 138 के मामले, बैंक रिकवरी केस, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) से जुड़े मामले, वैवाहिक और श्रम विवाद, मध्यस्थता से जुड़े मामले, सिविल मामले, नगर निगम से संबंधित विवाद और ट्रैफिक चालान सहित विभिन्न मामलों का पक्षकारों की सहमति से निपटारा किया गया।

यह  मामले भी सुलझाए गए: 

इसके अतिरिक्त स्थायी लोक अदालत (पीयूएस) द्वारा 1.90 लाख से जुड़े 89 प्री-लिटिगेटिव मामलों का निपटारा किया गया, जबकि श्रम न्यायालय ने 1 लाख से जुड़े 7 श्रम विवादों का समाधान किया।
राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ ने 1,44,93,446 से जुड़े 53 मामलों का निपटारा किया। वहीं डीआरटी-II, चंडीगढ़ ने 57,83,44,707 से जुड़े 192 मामलों का समाधान किया और यूटी चंडीगढ़ के तहसीलदार (राजस्व) ने 183 म्यूटेशन मामलों का निपटारा किया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, यूटी चंडीगढ़ ने लोक अदालत स्थल का दौरा कर कार्यवाही की समीक्षा की। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और प्रशासनिक कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों की सराहना की l

उन्होंने वैवाहिक विवादों में आपसी समझ की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को अपने मतभेद सुलझाने के लिए ईमानदार प्रयास करने चाहिए और परिवार के अन्य सदस्यों को अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

विशेष रूप से लोक अदालत के दौरान पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित 23 से अधिक मामलों का भी निपटारा किया गया, जो लंबित मुकदमों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, यूटी चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत ने एक बार फिर गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में अपनी प्रभावशीलता साबित की।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यूटी चंडीगढ़ के सदस्य सचिव अरुण कुमार अग्रवाल और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंडीगढ़ के सचिव सुनील कुमार ने लोक अदालत को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी संबंधित पक्षों का आभार व्यक्त किया और नागरिकों से विवादों के त्वरित और किफायती समाधान के लिए इस मंच का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।