प्रदेश के प्राइमरी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत, कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी कराने के निर्देश जारी
Major Relief for the State's Primary Teachers
लखनऊ। Major Relief for the State's Primary Teachers: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए जल्द ही विशेष टीईटी ( शिक्षक पात्रता परीक्षा ) आयोजित किया जाएगा। शासन ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज से परीक्षा कराने की विस्तृत कार्ययोजना तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है।
विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी ने 21 जुलाई को इस संबंध में पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में एक सितंबर 2025 के फैसले में सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया था।
इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका पर 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसले को बरकरार रखते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी। साथ ही राज्यों को निर्देश दिया कि टीईटी परीक्षा समय-समय पर और संभव हो तो वर्ष में दो बार, लगभग छह माह के अंतराल पर कराई जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे समय बढ़ाने की कोई मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। शासन के अनुसार, इस आदेश से प्रदेश के प्राथमिक स्तर के लगभग 64,062 और उच्च प्राथमिक स्तर के करीब 76,256 कार्यरत शिक्षक प्रभावित होंगे। इन्हें टीईटी का अवसर देने के लिए विशेष टीईटी आयोजित कराने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा, रजनीश कुमार पाण्डेय बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले में सात मार्च 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और छह सितंबर 2025 के शासनादेश के अनुपालन में 5,352 विशेष शिक्षक पद चिह्नित किए गए हैं। इनमें संविदा और डेलीवेज पर कार्यरत शिक्षकों के चयन के लिए भी स्पेशल टीईटी कराने का निर्णय लिया गया है।
इसके तहत करीब 2,500 विशेष शिक्षक/सहायक अध्यापक परीक्षा में शामिल होंगे। चयन आयोग से दोनों वर्गों के लिए स्पेशल टीईटी आयोजित कराने की पूरी कार्ययोजना जल्द उपलब्ध कराने को कहा है।