आजम खान को बड़ा झटका, जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल रजिस्ट्रेशन रद्द, IT विभाग ने बताया ‘फैमिली ट्रस्ट’

आजम खान को बड़ा झटका, जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल रजिस्ट्रेशन रद्द, IT विभाग ने बताया ‘फैमिली ट्रस्ट’

Azam Khan Jauhar Trust

Azam Khan Jauhar Trust

मुरादाबाद। Azam Khan Jauhar Trust: मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल पंजीकरण निरस्त करने के पीछे आयकर विभाग (लखनऊ) ने केवल वित्तीय अनियमितताओं को ही आधार नहीं बनाया है। विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर में अवैध मस्जिद निर्माण, भूमि आवंटन की शर्तों के उल्लंघन और ट्रस्ट पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां व उनके परिवार के पूर्ण नियंत्रण को 'फैमिली ट्रस्ट' की संज्ञा देते हुए इसे गंभीर आपत्ति माना है।

आयकर विभाग ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय, प्रशासनिक जांच रिपोर्टों और ट्रस्ट की संरचना का हवाला देते हुए इसे चैरिटेबल संस्था के मूल उद्देश्यों का खुला उल्लंघन माना है। यह कार्रवाई साल 2023 में हुई छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों और ट्रस्ट की ओर से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद की गई है। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (केंद्रीय), लखनऊ गौरव बाथम द्वारा जारी 147 पेज के आदेश में ट्रस्ट द्वारा दिखाए गए करोड़ों रुपये के चंदे को संदिग्ध माना गया है।

 46 करोड़ खर्च होने का किया था दावा

जौहर ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी निर्माण में करीब ₹46 करोड़ खर्च होने का दावा किया था, जबकि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने इसका मूल्यांकन ₹494 करोड़ आंका था। लागत के इस भारी अंतर को विभाग ने वित्तीय गड़बड़ी का बड़ा साक्ष्य माना है। विश्वविद्यालय परिसर में अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर विभाग ने वर्ष 2021 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय, एसडीएम की जांच रिपोर्ट और राज्य सरकार के निष्कर्षों का हवाला दिया है।

आदेश के मुताबिक, वर्ष 2005 में शैक्षणिक एवं चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए भूमि खरीदने की अनुमति दी गई थी, लेकिन शर्तों के विपरीत परिसर में मस्जिद बना दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी अन्य ट्रस्टी ने इस मस्जिद निर्माण की जानकारी होने से ही साफ इन्कार कर दिया, जिसे विभाग ने नामुमकिन माना है। आयकर विभाग ने ट्रस्ट की संरचना पर भी कड़ा रुख अपनाया है। वर्ष 2010 के नवीनीकरण दस्तावेजों के अनुसार, आजम खां इस ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष हैं और उनके परिवार के सदस्य आजीवन संरक्षक हैं।

कुल नौ ट्रस्टियों में से पांच सदस्य अकेले आजम खां के परिवार से हैं। बाकी गैर-पारिवारिक सदस्यों के बयानों के आधार पर विभाग ने उन्हें 'डमी ट्रस्टी' (नाममात्र के सदस्य) माना। इसी एकाधिकार के कारण विभाग ने टिप्पणियों में इसे चैरिटेबल ट्रस्ट की जगह ‘फैमिली ट्रस्ट’ कहा है। पंजीकरण रद होने के बाद अब ट्रस्ट आयकर में छूट नहीं ले सकेगा।

हालांकि, ट्रस्ट के पास आदेश के विरोध में अभी इन्कम टैक्स अपीलेंट ट्रिब्यूनल (आइटीएटी) में जाने का मौका है। जौहर ट्रस्ट को 100 रुपये सालाना लीज पर मिला था 10 करोड़ से बना शोध संस्थान : सपा सरकार में मौलाना मोहम्मद अली जौहर शोध संस्थान मात्र 100 रुपये की लीज पर 33 वर्षों के लिए आजम खां के निजी जौहर अली ट्रस्ट को दे दिया गया था। इसकी लीज 33-33 वर्षों के लिए दो बार बढ़ाने के भी प्रविधान किए गए थे।