कहीं मलबे में दबे, तो कहीं बाढ़ में बहे लोग... हिमाचल में मानसून का कहर, 80 मौतें और 121 सड़कें बंद
People buried under debris or swept away by floods
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के सीजन में पहाड़ दरकने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएं बढ़ने लगी हैं। इस कारण हादसे भी हो रहे हैं। शुक्रवार को जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के उदयपुर-किलाड़ (तांदी-संसारी राष्ट्रीय राजमार्ग) के पास एक टाटा सूमो गाड़ी चट्टाने गिरने से बड़ा हादसा हो गया, इसमें 13 लोगों की जान चली गई। ये लोग टैक्सी में कुल्लू-मनाली से वीरवार को पांगी की ओर निकले थे। उदयपुर पहुंचने पर इन्हें पता चला कि कढ़ू नाला में रास्ता बंद है। इसके बाद सभी उदयपुर से आगे तिंदी में रुक गए।

मानसून सीजन में 80 लोगों की मौत
प्रदेश में इस मानसून सीजन में भूस्खलन और बारिश से जुड़ी घटनाएं में अब तक 80 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, प्रदेश को अब तक 800 से 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भारी बारिश और भूस्खलन के चलते प्रदेश में 121 सड़कें बंद हैं। जिन्हें खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। ये अधिकतर संपर्क सड़कें हैं।
बादल फटने से तबाही
हिमाचल प्रदेश में कई जगहों पर बादल फटने की घटनाएं भी सामने आईं। बीते दिनों जिला कांगड़ा के शाहपुर क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही मची। शाहपुर की बोह घाटी के स्पैड़ा और गढ़गून गांव में बादल फटने से आई बाढ़ में 18 मकान और एक स्कूल भवन बह गया। अचानक आई बाढ़ व मलबे से कई लोग बचने में कामयाब रहे, लेकिन एक महिला और दो बच्चे इसकी चपेट में आ गए।

आपदा से निपटने के लिए हाई-लेवल मीटिंग
हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) के स्पेशल सेक्रेटरी पुष्पेंद्र राणा ने गुरुवार को कहा कि इस सीजन में मानसून की वजह से हुई आपदाओं से राज्य को अनुमानित 800-1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि राज्य ने "बेहतरीन" तैयारी के साथ आपदा से निपटने का एक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड सिस्टम लागू किया है।
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए राणा ने कहा कि राज्य सरकार ने मानसून से काफी पहले ही तैयारी को लेकर हाई-लेवल बैठकें पूरी कर ली थीं और सभी डिप्टी कमिश्नरों को आवश्यक निर्देश और मदद दी गई थी।

उन्होंने कहा कि किसी भी इमरजेंसी में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ज़िला प्रशासन को उनकी जरूरतों के हिसाब से तुरंत मदद दी जा रही है। पुष्पेंद्र राणा ने कहा कि हमारी आपदा की तैयारी बेहतरीन है। पूरा रिस्पॉन्स सिस्टम पूरी तरह से एक्टिव है। राणा ने आगे कहा कि आपदा प्रबंधन में शामिल हर विभाग और हर एजेंसी हिमाचल प्रदेश में किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए मिलकर काम कर रही है।