ट्रांसफर पॉलिसी में फील्ड कर्मचारी भी शामिल, यूनियनों का विरोध जारी

Transfer Policy now includes Field Staff

Transfer Policy now includes Field Staff

कहा नई जगह बिना नेटवर्क संरचना-फॉल्ट पॉइंट्स की जानकारी के ट्रांसफर से कभी भी जान को खतरा
ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी एवं निगम अधिकारियों की मनमानी

अर्थ प्रकाश संवाददाता
पंचकूला। Transfer Policy now includes Field Staff: 
हरियाणा सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर्स यूनियन ने फिर से लामबंद होने की तैयारी कर ली है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना क्षेत्रीय भू-परिस्थितियों, नेटवर्क संरचना, फॉल्ट पॉइंट्स व सुरक्षा मानकों की जानकारी के कार्य करना अत्यंत जोखिमपूर्ण है। यह पॉलिसी न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा, बल्कि निगम की आर्थिक सेहत पर भी गंभीर और दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। कर्मचारियों ने कहा कि निगम अधिकारी सरकार को पूर्ण एवं सही तथ्य उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा मंत्री अनिल विज से इस नीति की निष्पक्ष समीक्षा कर इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। 

हरियाणा कर्मचारी महासंघ, मुख्यालय भिवानी के बैनर तले केन्द्रीय परिषद के आह्वान पर यूनियन ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी एवं निगम अधिकारियों का विरोध किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य 20 जनवरी को प्रस्तावित एसीएस पावर घेराव की तैयारियों को अंतिम रूप देना रहा। यूनियन के प्रांतीय प्रधान इक़बाल चंदाना ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि संचालन प्रांतीय महासचिव यशपाल देशवाल द्वारा किया गया। उनके साथ बैठक में वरिष्ठ उपप्रधान अशोक शर्मा, वित्त सचिव अनिल पहल, राज्य प्रेस सचिव श्याम लाल खोड, राज्य ऑडिटर मनोज शर्मा, राज्य उप-महासचिव विजय हुड्डा, सतेन्द्र सहारण, संपादक सत्यवान यादव एवं कानूनी सलाहकार विकास नेहरा सहित भारी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।

प्रांतीय प्रधान इकबाल चंदाना ने स्पष्ट कहा कि हरियाणा सरकार एवं निगम प्रबंधन द्वारा थोपी जा रही ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी फील्ड में कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से खतरे में डालती है। यह पॉलिसी केवल कर्मचारी-विरोधी ही नहीं, बल्कि फील्ड में कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों को मौत के मुँह में धकेलने वाला तानाशाही फरमान है। जब तक यह पॉलिसी पूर्णतः वापस नहीं ली जाती, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। चंदाना ने यह भी चेतावनी दी कि 20 जनवरी को पंचकूला में एसीएस पावर के खिलाफ प्रचंड घेराव किया जाएगा। 

प्रांतीय महासचिव यशपाल देशवाल ने कहा कि फील्ड में कार्यरत तकनीकी स्टाफ को इस पॉलिसी के दायरे में लाना उन्हें सीधे तौर पर जानलेवा परिस्थितियों में धकेलने जैसा है। वरिष्ठ उपप्रधान अशोक शर्मा ने कहा कि बड़े पैमाने पर ट्रांसफर होने से कर्मचारियों को नए क्षेत्रों की जानकारी न होने के कारण डिफॉल्टर्स की पहचान व वसूली अत्यधिक प्रभावित होगी, जिससे निगम को प्रदेशभर में करोड़ों रुपये का राजस्व घाटा झेलना पड़ेगा।

मुख्य संगठनकर्ता विनोद शर्मा ने कहा कि नए सर्कल/डिवीज़न में जाने पर डिफॉल्टिंग अमाउंट, बकाया उपभोक्ताओं एवं क्षेत्रीय रिकॉर्ड का वास्तविक आकलन करना लगभग असंभव हो जाएगा। राज्य प्रेस सचिव श्याम लाल खोड, राज्य ऑडिटर मनोज सैनी एवं राज्य उप-महासचिव विजय हुड्डा ने संयुक्त रूप से कहा कि जब तक यह तानाशाही निर्णय वापस नहीं होता, यूनियन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेगी। वित्त सचिव अनिल पहल एवं कानूनी सलाहकार विकास नेहरा ने कहा कि यदि सरकार एवं एसीएस पावर ने समय रहते यूनियन को वार्ता के लिए आमंत्रित नहीं किया, तो 20 जनवरी को अतिरिक्त मुख्य सचिव (बिजली) का पूरे प्रदेश का बिजली कर्मचारी पंचकूला में घेराव करेगा। औद्योगिक शांति भंग होने की पूरी जिम्मेदारी सरकार एवं निगम प्रबंधन की होगी।