Chandigarh: Janta Colony will be a holiday on Sunday, see what the administration has planned
Chandigarh: Janta Colony will be a holiday on Sunday, see what the administration has planned

Chandigarh: Janta Colony will be a holiday on Sunday, see what the administration has planned

चंडीगढ़: रविवार को जनता कालोनी की होगी छुट्टी, देखें प्रशासन क्या बनाई योजना

डीसी विनय प्रताप सिंह ने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर बुधवार को लिया फैसला

10 एकड़ जमीन को चार सैक्टरों में किया गया विभाजित, हर सेक्टर में एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात

प्रशासन को इस जमीन पर बनानी है डिस्पेंसरी, प्राइमरी स्कूल, कमयूनिटी सेंटर व शॉपिंग प्लाजा

चंडीगढ़ (साजन शर्मा)। सेक्टर 25 की जनता कालोनी पर आगामी रविवार को पीला पंजा चलेगा। डीसी विनय प्रताप सिंह की अगुवाई में हुई मीटिंग में इस पर बुधवार को फैसला लिया गया। एडवाइजर धर्मपाल कालोनी को हटाये जाने की स्वीकृति पहले ही दे चुके हैं।

प्रशासन का शहर को स्लम मुक्त करने का अभियान आगे बढ़ता जा रहा है। 1 मई मजदूर दिवस पर कालोनी नंबर चार पर प्रशासन ने अवैध कब्जा हटाओ अभियान चलाया था। अब जनता कालोनी की बारी है। मई माह में ही यह दूसरी कालोनी है जिस पर प्रशासन का पीला पंजा चल रहा है। यहां रह रहे लोगों को यहां बनी झुग्गी झौंपडिय़ां हटाने के लिए पहले ही आगाह किया जा चुका है। जनता कालोनी में जो भी झुग्गियां या अन्य स्ट्रक्चर बने हैं वह पूरी तरह से अवैध हैं। करीब दस एकड़ सरकारी जमीन पर लोगों ने ये कब्जे किये हुए हैं। इस जमीन पर प्रशासन को डिस्पैंसरी, प्राइमरी स्कूल, कमयूनिटी सेंटर व शॉपिंग प्लाजा खोलना है। इसकी योजना पहले ही तय की जा चुकी है।

अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रशासन ने 15 दिन पहले यहां कालोनी खाली करने व इसे गिराये जाने को लेकर नोटिस बोर्ड लगाये थे। इसका असर भी दिखाई दिया। लोगों ने खुद बखुद ही कालोनी खाली करनी शुरू कर दी। यहां पब्लिक अनाउसमेंट भी की गई कि कालोनी खाली कर दी जाए क्योंकि जल्द ही प्रशासन इसे हटाने की कार्रवाई करने जा रहा है। लोग अपना सामान लेकर साथ सटते गांवों या रामदरबार इत्यादि के इलाकों में किराये के मकानों पर पहुंच गए। बहुत से लोग अभी भी वहां इस आस में जमे हैं कि शायद अंतिम वक्त पर राजनीतिक पार्टियां मसीहा बनकर उनके समर्थन में उतर सकें और अतिक्रमण हटाओ अभियान रुक जाए।

10 एकड़ भूमि चार सेक्टरों में विभाजित

जनता कालोनी के कुल 10 एकड़ एरिया को चार सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चार ड्यूटी मजिस्ट्रेटों की यहां कब्जा हटाओ अभियान के दौरान ड्यूटी लगाई गई है। अभियान के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना पर रोक लग सके।

और जगह के कब्जे भी जल्द हटेंगे

डिप्टी कमिशनर ने इंजीनियरिंग विभाग को निर्देश दिया है कि वह अवैध कब्जे हटाये जाने के बाद जमीन का पजेशन लेने की योजना तैयार करे। डीसी ने कहा है कि शहर में जहां जहां भी अब अवैध कब्जे हैं उन्हें जल्द हटाया जाएगा और शहर को स्लम फ्री किया जाएगा। इंडस्ट्रियल एरिया स्थित संजय कालोनी को हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है। यह कालोनी भी इसी हफ्ते हटाई जा सकती है। मीटिंग में सभी एसडीएम, असिस्टेंट एस्टेट अफसर, चंडीगढ़ हाऊसिंग बोर्ड के सेक्रेट्री, डीएसपी सेंट्रल, इंजीनियरिंग विंग के अफसर, एमसी व फायर आफिस सहित तहसीलदार (कालोनी) व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

पुनर्वास योजना के तहत प्रशासन दे रहा एक मौका

चंडीगढ़ प्रशासन ने जनता कालोनी में उन लोगों को पुनर्वास योजना के लिए फ्लैट पाने का भी मौका दिया है जिनके पास प्रशासन की  जरूरत के मुताबिक सभी कागजात हैं। ऐसे लोगों को शुक्रवार को एस्टेट ऑफिस बुलाया गया है।

इनके ऐलान का क्या होगा

प्रवासी भलाई मंच के अविनाश शर्मा ने भी ऐलान कर रखा है कि कालोनी को किसी सूरत में नहीं गिरने दिया जाएगा लेकिन लगता है कि इस चेतावनी का प्रशासन पर कोई असर नहीं होने वाला। अविनाश शर्मा ने अवैध कालोनियां तोड़े जाने को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका भी लगा रखी है जिसकी तारीख 12 सितंबर बताई जा रही है। इससे पहले प्रशासन के अवैध कब्जा हटाओ अभियान चलाये जाने को वह गलत बता रहे हैं।

प्रशासन ने मानवीय पहलू पर विचार नहीं किया

कालोनियां हटाये जाने का मानवीय पहलू भी है। फिलहाल बच्चों के दसवीं व बारहवीं के पेपर चल रहे हैं। इन कालोनियों में रह रहे बहुत से बच्चे इन पेपरों में अपीयर हो रहे हैं। प्रशासन को इनकी तकलीफ दिखाई नहीं दे रही। बीच पेपर घर से दर बदर करने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि क्या इन बच्चों के मानस पटल पर इसका असर नहीं होगा? क्या ये बच्चे बढिय़ा ढंग से पेपर कर पाएंगे? वहीं दूसरी तरफ चंडीगढ़ व आसपास के सटते इलाकों में इस वक्त जबरदस्त गर्मी पड़ रही है। पारा लगातार 40 डिग्री से ऊपर चल रहा है। ऐसे में प्रशासन की मुहिम पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक ऐसा समय नहीं चुना जा सकता था जब गर्मी या अन्य मौसम से थोड़ी राहत होती?