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बॉलीवुड सितारों को खूब भाता है चंडीगढ़

कोई अफ़सोस नहीं

आइटम नंबर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली गायिका ममता शर्मा को ‘मुन्नी बदनाम हुई….’ गाने पर कोई अफ़सोस नहीं है। ममता का मानना है कि जब कोई आपको जनता-पहचानता नहीं हो तो आप पर कोई दबाव भी नहीं होता। आप खुद भी यह नहीं सोचते कि आइटम सॉन्ग कर रहे हैं या सैड सॉन्ग। सिर्फ एक ही बात पर फोकस रहता है कि आप कितने बड़े ब्रांड के लिए काम कर रहे हैं। यह मेरी खुशकिस्मती है कि मेरे गाये गीत हिट रहे।

‘मुन्नी बदनाम’ से मशहूर हुई ममता चंडीगढ़ में थी। उन्हें बॉलीवुड में आठ साल हो गए हैं। इस दौरान ‘फेविकोल से…’ और ‘अनारकली डिस्को चली’ जैसे गाने गा कर उन्होंने लोकप्रियता हासिल की। हाल में रैपर बोहेमिया और रामजी गुलाटी के साथ गाया उनका गाना ‘रज रज अंखियां’ काफी सराहा गया है। इस समय ममता अपने सूफियाना म्यूजिक के कारण चर्चा में है।

ममता का कहना है, ‘म्यूजिक मेरी जिंदगी है। मेरे लिए यह जिन्दा रहने के लिए सांस की तरह जरूरी है। म्यूजिक ही मुझे जिन्दा रखे हुए है। अकेले शोज करना मुझे अच्छा लगता है। स्टेज से आप कोई भी गाना गए सकते हो, ऑडियंस आप से कनेक्ट होती है। आप टाइपकास्ट नहीं होते, जो करना चाहते हैं, कर सकते हैं। हर शो में कुछ नया कर सकते हैं।

म्यूजिक के मौजूदा दौर पर ममता ने कहा कि समय के साथ यह भी बदलता रहता है। जो म्यूजिक आज से दस साल पहले टीवी पर सुनने को मिलता था, अब वैसा कुछ नहीं रहा है। पहले रिकार्डिंग, इंस्ट्रूमेंट्स और साउंड को लेकर टेक्निकली ज्यादा मजबूत थे, लेकिन अब सब डिजिटल चीजों में शिफ्ट हो गया है। स्टेज पर मैं म्यूजिक को एन्जॉय करती हूं। इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं किसके गीत गए रही हूं।

नहीं, सियासत नहीं

‘शुक्र है कि मैं सियासत में नहीं आई। इस बात के लिए भी मैं भगवान की शुक्रगुजार हूं कि लोकसभा चुनावों में अभी तक किसी राजनीतिक दल ने उन्हें प्रचार के लिए नहीं बुलाया है।’ यह कहना है फिल्म अभिनेत्री विद्या बालन का। शादी के बाद वे पहली बार अमृतसर आई थीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियां फि़ल्मी कलाकारों से अपने पक्ष में प्रचार के लिए संपर्क करती हैं और लोकसभा चुनावों के लिए बॉलीवुड सितारों में भी हौड़ लगी हुई है।

विद्या बालन ने गुरु की नगरी अमृतसर में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। सूचना केंद्र के अधिकारी सर्वजीत सिंह ने इतिहास की जानकारी देते हुए उन्हें धार्मिक किताबों का सैट देकर सम्मानित किया। इस मौके पर भारत-पाक रिश्तों पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भले ही इस समय दोनों मुल्कों के बीच तल्खी है, लेकिन यह किसी के लिए भी अच्छी नहीं है। इससे दोनों ही मुल्कों को नुक्सान होगा। वे दोनों मुल्कों के कलाकारों पर किसी तरह की पाबंदी के पक्ष में भी नहीं हैं।

अक्षय कुमार के साथ बनी अपनी नई फिल्म ‘मिशन मंगल’ के बारे में उन्होंने कहा कि यह 15 अगस्त को रिलीज होगी। उन्होंने कहा कि दर्शकों ने आज तक उनकी सभी फिल्मों को खूब पसंद किया है और यकीन है कि भविष्य में भी उनकी फि़ल्में इसी तरह पसंद की जाएंगी।

बालन ने खुद को पंजाबी सभ्याचार से प्रभावित बताते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि वे पंजाबी फिल्मों में अपना योगदान दें, लेकिन अभी इसके लिए उन्हें कोई ऑफर नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा उन्हें पसंद है और वे हमेशा इसे सीखने के लिए तैयार रहती हैं।

बच गए रे, बाबा !

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत को निर्वाचन विभाग की क्लीन चिट मिल गई है। रनौत के हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र की मतदाता सूची में नाम होने पर निर्वाचन विभाग को कोई ऐतराज नहीं है। दो जगह मतदाता पहचान पत्र होने को लेकर कंगना पर पिछले कुछ दिनों से सवाल खड़े किये जा रहे थे। निर्वाचन विभाग का मानना है कि मतदाता सूची में नाम दो जगह हो सकते हैं, लेकिन मतदान एक ही जगह किया जा सकता है। कंगना रनौत का पहला मतदाता पहचान पत्र 18 साल की उम्र में हिमाचल प्रदेश के सरकाघाट इलाके में बना था। जब वे मुंबई चली गई और फिल्मों में काम करने के दौरान घर खरीद लिया तो वहां अपना वोट भी बनवा लिया। हालांकि, उसके परिजनों ने हिमाचल में बने अपने राशनकार्ड से कंगना का नाम हटवा दिया था।

इस संबंध में किसी व्यक्ति ने निर्वाचन विभाग से कंगना के पास दो मतदाता पहचान पत्र होने की शिकायत की थी। इसके बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की तरफ से मंडी के जिला निर्वाचन अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश जारी किये गए थे। जांच में सामने आया कि सरकाघाट हलके के भांवला गांव में कंगना रनौत का वोट और पहचान पत्र बना है। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि यह सारी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई थी। इसके बाद निर्वाचन विभाग ने कंगना को इस मामले में क्लीन चिट दे दी।

इच्छा कॉमेडी फिल्म की

कल्कि कोचलिन की इच्छा है कि वे अब रोमांटिक कॉमेडी फिल्म करें। मौका मिला तो वे कॉमेडी फिल्म में जोरदार किरदार निभाएंगी। यह उनका एक सपना है। खुद कल्कि ने यह खुलासा किया है। एक फैशन शो में हिस्सा लेने चंडीगढ़ आई कल्कि ने कहा कि वे कई फिल्मों में विभिन्न तरह के चैलेंजिंग किरदार निभा चुकी हैं। अब कॉमेडी फिल्म करने की इच्छा है। कल्कि के माता-पिता फ्रांस से हैं, जबकि उनका जन्म तमिलनाडु में हुआ है। कई भाषाओं की जानकार कल्कि ने कहा कि चंडीगढ़ से उनकी बहुत-सी यादें जुड़ी हैं। उनकी पहली फिल्म ‘देव-डी’ की शूटिंग भी यहीं हुई थी। टीवी से लेकर रैम्प तक अपनी क़ाबलियत दिखा चुकी कल्कि का कहना है वे अपने पापा के सफर पर एक दिलचस्प किताब लिखना चाहती हूं। कल्कि के पिता फ्रांस से भारत आये, फिर अफगानिस्तान में भी रहे. इसके बाद उन्होंने बनारस सहित कई जगहों का दौरा किया। उनका यह सफर बहुत ही मजेदार था और इसे वे अब कलमबद्ध करना चाहती हैं।

खुशियां बांटता हूं

फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार राजनीति में आने के कतई इच्छुक नहीं हैं। क्यों? इसके जवाब में उनका कहना है कि जो चीजें फिल्मों के जरिये कर रहा हूं, राजनीति में रह कर नहीं कर सकता। चंडीगढ़ आये अक्षय कुमार ने देश प्रेम और मुद्दों पर आधारित फिल्में करने के सवाल पर कहा कि ऐसे मुद्दों के बारे में लोगों बताने के लिए सिनेमा एक शक्तिशाली माध्यम है। ‘एयरलिफ्ट’, एक ऐसा मिशन था, जो हमारा इतिहास है और गिनीज बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज है। लोग इसके बारे में पहले बहुत कम जानते थे, लेकिन फिल्म बनने के बाद गूगल पर अब हजारों आर्टिकल आ गए हैं। ‘टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें मैसेज के साथ एंटरटेनमेंट भी था। इसे दिखा कर गांवों में लोगों को जागरुक किया जा रहा है। अपनी नई फिल्म ‘केसरी’ के बारे में उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी जंगों में से सारागढ़ी की जंग दूसरे नंबर पर है। दुख की बात है कि स्कूलों में पढाई जाने वाली इतिहास की किताबों में इसका जिक्र तक नहीं है। घी, मक्खन और पराठों के शौक़ीन अक्षय को खाने के बाद मीठा जरूर चाहिए। कसरत भी वे ट्रेडिशनल पंजाबी स्टाइल में करते हैं। फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं आज भी सीख रहा हूं। एक्टर हूं और मेरा काम खुशियां बांटना है और लगातार खुशियां ही बांट रहा हूं।

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