आज सूर्य का मकर राशि में प्रवेश; शनि के घर में आने से क्या होगा प्रभाव? ये परिवर्तन इन राशियों के लोगों के लिए लाभदायक, पढ़ें

Surya Makar Rashi Parivartan 2026 Makar Sankranti Kyon Manate Hain

Surya Makar Rashi Parivartan 2026 Makar Sankranti Kyon Manate Hain

Surya Rashi Parivartan 2026: इस साल 2026 में ग्रहों के राजा सूर्य देव का आज (14 जनवरी) पहला राशि परिवर्तन हो रहा है। सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। सूर्य के मकर राशि में आने के साथ ही मकर संक्रांति का उत्सव भी मनाया जा रहा है। मालूम हो मकर राशि के स्वामी शनि हैं और शास्त्रों में वर्णन है कि शनि सूर्य के पुत्र हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। भले ही शनि और सूर्य की नही बनती। लेकिन पिता के घर आने पर शनिदेव बड़े सम्मान से सूर्य का स्वागत करते हैं। इसलिए शनि की राशि में सूर्य का यह गोचर विशेष माना जाता है।

ज्योतिष के अनुसार, बताया जा रहा है कि आज सूर्य देव दोपहर 3 बजकर 13 मिनट के आस-पास धनु राशि को छोड़कर मकर राशि (शनि की राशि) में प्रवेश करेंगे। मकर राशि में आने के साथ सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। वहीं सूर्य के इस विशेष परिवर्तन से कुछ राशि वालों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के इस गोचर से मेष राशि, सिंह राशि, वृश्चिक राशि और धनु राशि इन चार राशियों के जातकों को करियर, धन और प्रतिष्ठा के मामलों में शुभ और लाभकारी परिणाम मिल सकते हैं।

मकर संक्रांति पर सूर्य आराधना से बदलेगी किस्मत

मकर संक्रांति का पावन त्योहार इस बार कोई 14 जनवरी को मना रहा है तो कोई 15 जनवरी को मनाएगा। मकर संक्रांति के पर्व पर गंगा, यमुना-नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य कर्मों का विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस दिन सूर्यदेव की आराधना जरूर करनी चाहिए। खासकर मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा से शुभ फल, सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक लाभ की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर किया सूर्य तप जीवन की कई परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है। सूर्य पूजा से आपको शुभ फल, आर्थिक लाभ और पॉजिटिव एनर्जी मिलती और आपका करियर सूर्य की तरह चमकता है।

सूर्यदेव को अर्घ्य और गायत्री मंत्र जाप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर आप अपने जीवन में ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं और चाहते हैं की जीवन में दरिद्रता न आए तो इसके लिए आप मकर संक्रांति के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर, सूर्य के उगने पर तांबे के लोटे या गिलास में शुद्ध जल लेकर, उसमें कुमकुम और लाल फूल डालकर भगवान को अर्घ्य अवश्य दें। इसके बाद कुश के आसन पर बैठकर सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करें। मंत्र इस प्रकार है- "ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।।" आपको बता दें कि मकर संक्रांति पर काले तिल दान करने का भी विशेष महत्व है। आप इस दिन शनि देव पर भी काले तिल चढ़ा सकते हैं। जिससे शनि देव भी प्रसन्न होते हैं।

मकर संक्रांति क्यों खास?

बता दें साल भर में कुल बारह संक्रांतियां आती हैं, जिनमें से सूर्य की मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति सबसे खास होती है। इन दोनों ही संक्रांति पर सूर्य की गति में बदलाव होता है। जब सूर्य की कर्क संक्रांति होती है, तो सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन होते हैं और जब सूर्य की मकर संक्रांति होती है, तो सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव ही मकर संक्रांति कहलाता है। इसलिए कहीं-कहीं पर मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं।