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मामले को शीघ्र निपटारा जरूरी-

शहर के चुनिन्दा अधिवक्ताओं के साथ अर्थ प्रकाश की विशेष बातचीत-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली पर चार न्यायाधीश द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों को परिप्रेक्षम में चंडीगढ़ के कुछ चुनिंदा अधिवक्ताओं से बातचीत कर उनकी राय और प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया गया। पेश है उनके साथ बातचीत के कुछ अंश- चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली पर चार न्यायाधीश द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों को परिप्रेक्षम में चंडीगढ़ के कुछ चुनिंदा अधिवक्ताओं से बातचीत कर उनकी राय और प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया गया। पेश है उनके साथ बातचीत के कुछ अंश- पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद रहे, पेशे से वरिष्ठ एडवोकेट पवन कुमार बंसल ने कहा कि लोकतंत्र के बड़े स्तंभ न्यायपालिका को संचालित करने वाले देश के सर्वोच्च न्यायालय में इस प्रकार के सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इससे आज लोगों की आस्था एवं पूरी न्याय प्रणाली प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इसके द्ष्टिगत इस पूरे प्रकरण पर आत्मनिरीक्षण कर लोगों की विश्वास बहाली के लिए शीघ्र कदम उठाने की आवश्यकता है। नगर निगम के पूर्व मेयर एवं पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत कर रहे अरुण सूद ने कहा कि यह प्रकरण बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि पूरे तथ्य अभी सामने नहीं आए हैं। किन्तु न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए इस बात को शीघ्र निपटा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण का पूरे देश पर असर पड़ेगा। आगे से ऐसा कुछ न हो, इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। निगम के पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सतिन्दर सिंह ने कहा कि इस धमाकेदार खबर से हम स्तब्ध हैं और हतोत्साहित हैं। इससे न्यायपालिका से देश के लोगों का विश्वास टूटा है। उन्होंने कहा कि यह देश ही नहीं, अपितु पूरे विश्वास की सबसे बड़ी घटना कही जा सकती है। आम आदमी अब जाए तो कहां जाए।  निगम के पूर्व पार्षद रहे, भाजपा के युवा नेता एवं हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता सौरभ जोशी ने कहा कि इस प्रकरण से जन साधारण की आस्था प्रभावित होती है। इसे अंदर ही सुलझा लेना चाहिए था, न कि इसे सड़क पर लाने की आवश्यकता थी।  उल्लेखनीय है कि गत दिवस सुप्रीमकोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल उठाया था। जिसमें केसों के बंटवारे को लेकर उन पर सवाल खड़े किए गए थे।

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