हजारीबाग में योगेंद्र साव के कार्यक्रम से तेज हुई राजनीतिक चर्चा, कांग्रेस प्रभारी के. राजू की मौजूदगी ने बढ़ाए सवाल
Yogendra Sao's event in Hazaribagh intensifies political speculation
रांची। Yogendra Sao's event in Hazaribagh intensifies political speculation, साेमवार को हजारीबाग में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की ओर से आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में जिला अध्यक्ष भले ही नहीं पहुंचे हों, प्रदेश स्तर से भी सीनियर नेताओं ने दूरी बरती हो, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के.राजू का पहुंचना सभी की आंखों में चमक पैदा कर गया, कुछ लोगों को तो खटका भी।
दरअसल, योगेंद्र साव कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जो झारखंड मुक्ति मोर्चा का विराेध करते रहे हैं और गठबंधन में भी कांग्रेस के रहने के हिमायती नहीं हैं। योगेंद्र साव को इन्हीं गतिविधियों के लिए मार्च महीने में कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। आखिर कांग्रेस भी अपने घटक दलों के हितों को ध्यान में रखकर राजनीति कर रही है।
निष्कासन के महज तीन माह के अंदर उनके खिलाफ कार्रवाई वापस ले ली गई और वे पार्टी में एक बार फिर सक्रिय हो गए। इसी सक्रियता के बीच उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई और उसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी भी पहुंच गए। प्रभारी का सीधे कार्यक्रम में पहुंचना कई सवाल पैदा करता है।
हजारीबाग में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने नई चर्चा छेड़ दी है। कार्यक्रम में खासकर जिन नेताओं की सक्रियता रही वह भी किसी से छिपी नहीं है। पूरी कैबिनेट में भले ही कांग्रेस के चार मंत्री रहे हों, कार्यक्रम में मात्र वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पहुंचे थे।
उनकी तस्वीर कार्यक्रम के बैनर पर दिखी तो कांग्रेसियों ने भी माथा पकड़ लिया। संभवत: यह तस्वीर उस वक्त की है जब किशोर भाजपा में सक्रिय थे और उन्होंने भगवा रंग के अंगवस्त्र को कंधे पर रखा हुआ है।

राधाकृष्ण किशोर की यह तस्वीर विरोधियों को भा रही
हाल के दिनों में डीजीपी को पत्र लिख सुर्खियां बटोर चुके राधाकृष्ण किशोर की यह तस्वीर उनके विरोधियों को बहुत भा रही है। बैनर पर तस्वीर होने के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री डा. इरफान अंसारी ने कार्यक्रम से दूरी बरती तो विधायक ममता देवी भी निमंत्रण के बावजूद नहीं गईं।
बताया कि दूसरे जगह पर पहले से कार्यक्रम निर्धारित था। कार्यक्रम में पूर्व विधायक जेपी भाई पटेल भी नहीं दिखे। इस प्रकार हजारीबाग और रामगढ़ के जिलाध्यक्षों की अनुपस्थिति में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी का पहुंचना कहीं ना कहीं पार्टी प्रोटोकाल के खिलाफ भी है।
कांग्रेस के सीनियर नेता बताते हैं कि इन तमाम गतिविधियों के पीछे प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के.राजू का हाथ है और उनकी इस तरह की गतिविधियां राज्यसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद से शुरू हुई हैं।
उन्होंने चुनाव परिणाम के आते ही सहयोगी दलों राजद और वामपंथियों पर धोखा देने का आरोप लगाया था। मीडिया को दिए बयान में स्पष्ट कहा था कि राजद के विधायकों और माले विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट नहीं दिया।
इससे गठबंधन में खटास शुरू हुई तो केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर तमाम सीनियर नेताओं और मंत्रियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर एक तरह से माफी मांगी और वामपंथी दलों पर लगाए आरोपों को वापस ले लिया। इधर कांग्रेस के कई सीनियर नेता साफ तौर पर कह रहे हैं कि माफी मांगने के बाद भी प्रभारी का रुख झामुमो के प्रति वैसा ही है।