दुष्कर्म पीड़िता को गर्भसमापन के लिए तुरंत सीएमओ के पास ले जाए पुलिस, हाई कोर्ट के आदेश पर डीजीपी का निर्देश
DGP issues directive following High Court order
लखनऊ। डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी जिलों की पुलिस को निर्देश दिए हैं कि दुष्कर्म या लैंगिक उत्पीड़न के मामले में गर्भवती पीड़िता को तत्काल मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के समक्ष पेश किया जाए।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद डीजीपी ने सभी पुलिस अधिकारियों को महिलाओं व बच्चों के लैंगिक उत्पीड़न को लेकर यह निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने दुष्कर्म पीड़िता के संरक्षण, गर्भसमापन व देखरेख का कड़ाई के अनुपालन करने के भी निर्देश दिए हैं।
उन्होंने जारी निर्देश में स्पष्ट किया है कि पीड़िता के नाबालिग होने पर पाक्सो अधिनियम के तहत तैयार की गई मेडिको लीगल रिपोर्ट, पीड़िता का बयान, एफआइआर की प्रति, लैंगिक हिंसा संबंधी चिकित्सीय विधिक रिपोर्ट व अन्य संबंधित दस्तावेज भी सीएमओ के सामने प्रस्तुत किए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता के नाबालिग व अविवाहित होने पर थाना प्रभारी पुलिस आयुक्त या एसपी को सूचना दें, जिससे वह यह सुनिश्चित कर सकें कि पीड़िता को गर्भसमापन चिकित्सा अधिनियम 1971 व पाक्सो एक्ट के अनुसार संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
इस संबंध में की गई सभी कार्यवाही को जनरल डायरी (जीडी) में दर्ज किए जाने के निर्देश भी डीजीपी ने दिए हैं। सात ही डीएम व एसएसपी 24 घंटे में सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करें।