Air India सिर्फ एक कारोबारी अवसर नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी; बदलाव चुनौतीपूर्ण लेकिन जरूरी: एन चंद्रशेखरन

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran

मुंबई: Tata Sons Chairman N Chandrasekaran: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शनिवार को कहा कि एयर इंडिया टाटा समूह के लिए सिर्फ़ एक व्यवसायिक सौदा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जिसे वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रहे हैं. जे. आर. डी. टाटा की 121वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत के एविएशन सेक्टर की चुनौतियों और दीर्घकालिक संभावनाओं पर चर्चा की.

उन्होंने कहा, “मेरे विचार में टाटा ग्रुप के लिए एयर इंडिया केवल एक बिजनेस अवसर नहीं है. यह एक ज़िम्मेदारी है.” चंद्रशेखरन ने बताया कि एयर इंडिया बड़े बदलावों से गुज़र रही है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण यह यात्रा उम्मीद से धीमी रही है.

उनके अनुसार, विमान के पुर्ज़ों की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी और नए विमानों की अनिश्चित डिलीवरी टाइमलाइन ने एयरलाइन की योजना बनाना बेहद कठिन कर दिया है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर का एविएशन सेक्टर इसी तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है—लागत बढ़ रही है और मुनाफ़ा बहुत कम है.

टाटा ग्रुप ने जनवरी 2022 में घाटे में चल रही एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को अपने हाथों में लेने के बाद संचालन को आधुनिक बनाने के लिए पांच वर्षीय योजना शुरू की थी. लेकिन विमान अपग्रेड और नई डिलीवरी में देरी के कारण समयसीमा आगे बढ़ गई है. इसके बावजूद, चंद्रशेखरन ने कहा कि समूह एयर इंडिया को फिर से मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

उन्होंने भारत के एविएशन बाज़ार की तेज विकास क्षमता पर भी जोर दिया. उनके अनुसार, भारत की जीडीपी में हर 1% वृद्धि से घरेलू एयर ट्रैवल में लगभग 2% की बढ़ोतरी होती है. अगर भारत 8% वार्षिक दर से बढ़ता रहा, तो एविएशन सेक्टर हर साल लगभग 16% की दर से विस्तार कर सकता है.

उन्होंने कहा कि यह रुझान आने वाले 30 वर्षों तक जारी रह सकता है, जिससे एयरलाइंस और इस उद्योग से जुड़ी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बनेगा. चंद्रशेखरन ने आने वाले वर्षों को भारत की अर्थव्यवस्था और एविएशन सेक्टर के लिए रोमांचक समय बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वैश्विक अस्थिरताएँ अब भी बड़ी चुनौती हैं. उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में आप जिस स्थिति का सामना करते हैं, उससे हर योजना कठिन हो जाती है.” चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने दोहराया कि टाटा समूह एयर इंडिया को बदलने और उसे फिर से दुनिया की प्रमुख एयरलाइन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.