Home » Photo Feature » OMG: असम के जंगलों में है ‘लादेन’! कइयों को उतार चुका है मौत के घाट
OMG: असम के जंगलों में है 'लादेन'! कइयों को उतार चुका है मौत के घाट

OMG: असम के जंगलों में है ‘लादेन’! कइयों को उतार चुका है मौत के घाट

नई दिल्ली: अरे भाई, हम उस वाले लादेन की बात नहीं कर रहे हैं, जिसके बारे में आप सोच रहे हैं वो तो आठ साल पहले ही 2011 में अमेरिकी नेवी सील के हाथों मारा जा चुका है|हम बात कर रहे हैं एक जंगली हाथी की, जिसका नाम है लादेन, जो इन दिनों असम में आतंक ढाये हुए है, लोगों में अपना खौफ पैदा किये हुए हैं|असम के गोलापारा जिले में लादेन हाथी सक्रिय है और अबतक न जाने कितने लोगों की जाने ले चुका है|

वहीँ, यह लादेन हाथी लोगों को मारकर गायब बड़ी जल्दी हो जाता है|वन्य अधिकारियों की एक बड़ी टीम इस जंगली हाथी की खोज में लगी हुई है, लेकिन लादेन महाशय मिलने का नाम नहीं ले रहे हैं|वन्य अधिकारियों का कहना है कि वह ड्रोन की मदद से असम के इंसानी इलाकों समेत जंगलों का चप्‍पा-चप्‍पा छान रहे हैं।वन्य अधिकारियों के मुताबिक यह हाथी और लोगों की जान ले उससे पहले इसे बेहोशी का इंजेक्‍शन लगाकर पकड़ना बेहद जरूरी है|

ड्रोन से कैप्चर किया गया जंगली हाथी

असम में इस साल अबतक जंगली हाथी के हमलों में 57 लोग की जान गई……

वन विभाग के मुताबिक, यहां जंगली हाथियों का काफी कहर है, यहां आप आतंक फ़ैलाने वाले एक हाथी को पकड़ेंगे तो दूसरा अपनेआप तैयार हो जाता है|यही वजह है कि जंगली हाथियों को यहां लादेन का नाम दिया गया है|इस साल यहां अब तक जंगली हाथी के हमलों में 57 लोग मारे जा चुके हैं।दूसरे राज्‍यों की तुलना में असम में हाथी के हमलों में मरने वालों की संख्‍या ज्यादा है|

पहली बार 2006 में हाथी बना था ‘लादेन’……

‘जंगली हाथी’ को ‘लादेन’ पहली बार तब कहा गया जब साल 2006 में सोनितपुर जिले में एक जंगली हाथी ने दर्जनों लोगों को मार डाला था, इसी समय आतंकवादी बिन लादेन भी चर्चा में था, और वह आतंक ढाये हुए थे और यह भी आतंक मचाये हुए था इसलिए इसका नाम लादेन रख दिया गया, जिसके बाद से तबाही मचाने वाले जंगली हाथियों को लादेन कहा जाने लगा|

कम होते जंगल हैं बड़ी वजह

वन्‍य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी तभी हमला करते हैं जब उनके आवास पर संकट हो या वे मस्‍त हों। गोलापारा के मौजूदा लादेन के बारे में कहा जा रहा है कि फिलहाल वह मस्‍त है, यह हालात तीन हफ्तों तक रहते हैं। कम होते वन्‍य संसाधन और रहने की जगहों की कमी मनुष्‍य और जंगली जानवरों के बीच होने वाले संघर्ष की बड़ी वजह है। संस्‍था ग्‍लोबल फॉरेस्‍ट वॉच के अनुसार 2001 से 2018 के बीच असम में 2388.46 वर्ग किलोमीटर जंगलों का सफाया हो चुका है।इसकी कीमत इंसान और जानवर दोनों को चुकानी पड़ रही है। 2010 से 2018 के बीच 249 हाथी और 761 इंसानों की जानें जा चुकी हैं|

देश में सबसे ज्‍यादा हाथी कर्नाटक में…..

वन विभाग के मुताबिक, देश के 23 राज्‍यों में हुई हाथियों की जनगणना के अनुसार असम में 5,719 हाथी हैं जो देश में दूसरे नंबर पर है।6,049 हाथी कर्नाटक में हैं, जो कि पहले नम्बर है|वहीँ, केरल में 3054, तमिलनाडु में 2761, ओडिशा में 1976 हाथी हैं|

Check Also

अंबाला हिसार नेशनल हाईवे पर हुआ दिल दहला देने वाला हादसा

हरियाणा:- अंबाला हिसार नेशनल हाईवे पर बस के पलट जाने का हादसा सामने आया है। …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel