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वैक्सीन के लिए कौन धमका रहा

Who is threatening for the vaccine: देश यह जरूर जानना चाहेगा कि वे शक्तिशाली लोग कौन हैं, जिन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला से उग्रतापूर्ण बातें की हैं, उन्हें डराया और धमकाया है। यह कैसी विडम्बना है कि जिस वैक्सीन निर्माता कंपनी से देश को इतनी उम्मीदें हैं, जिसकी वैक्सीन से कोरोना वायरस से बचाव का रास्ता मिलता है, उसके प्रमुख के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है।

हालांकि यह रहस्य ही है कि वास्तव में ऐसा हो रहा है या फिर किसी अन्य मंतव्य से पूनावाला ने देश छोड़ दिया। उन्होंने भारत के ऐसे नेताओं के खिलाफ बोलने के लिए जगह भी लंदन चुनी। क्या यह माना जाए कि एक सुरक्षित जगह पहुंचने के बाद उन्होंने अपने दिल की भड़ास निकाली है। क्या वे यही बातें भारत में रहते हुए नहीं कह सकते थे।

यह जाहिर बात है कि सीरम इंस्टिट्यूट पर इस समय बेहद दबाव है, लेकिन यह दबाव लोगों की जान बचाने का भी है। जितना उत्पादन सीरम में हो रहा है, उपाय इसका होना चाहिए कि उसे बढ़ाने की कोशिश हो, लेकिन अगर पूनावाला यह कहना चाह रहे हैं कि राजनीतिक रूप से वैक्सीन को पहले उन्हें देने की बात कही जा रही है, तो फिर यह संगीन मामला है। आखिर यह पहले आओ-पहले पाओ जैसा मामला नहीं है, और न ही जो चेहरा पसंद हो, उसके माथे पर बड़ा टीका और जो ना पसंद हो, उसे छोटा टीका जैसी प्रणाली माना जा सकता है।

कोरोना संक्रमण के लगातार घातक होते जाने के बाद देश में जहां ऑक्सीजन और बेड का संकट कायम है, वहीं सरकार संक्रमण से बचाने के लिए वैक्सीन लगवा रही है। वैक्सीनेशन के तीसरे चरण में अठारह से ज्यादा उम्र के लोगों को 15 से ज्यादा राज्यों में सीमित केंद्रों पर ही टीका लगा। कई राज्यों ने शिकायत की है कि उन्हें पर्याप्त वैक्सीन नहीं मिली।

ऐसे में अदार पूनावाला का यह कहना सही नजर आता है कि उनके ऊपर कोविड-19 की वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाने को लेकर भारी दबाव था, जबकि यह काम अकेले उनके वश का नहीं है। अकेले उनके वश की बात नहीं होने का मतलब क्या यह लगाया जाए कि सीरम में जितना उत्पादन हो रहा है, वह पूरे देश के लिए नाकाफी है, ऐसे में दूसरी वैक्सीन का उत्पादन और प्रयोग बढ़ाया जाए।

कहा यह भी जा रहा है कि केंद्र सरकार के ऑर्डर को सीरम में भलीभांति पूरा किया जा रहा था, लेकिन चूंकि महाराष्ट्र के पुणे में यह उत्पादन हो रहा है, ऐसे में कोरोना से बुरी तरह संक्रमित महाराष्ट्र को जितनी सप्लाई चाहिए वह नहीं मिल रही थी, तब कुछ अनचाही बातें घटी। क्या वे शक्तिशाली लोग जिनके संबंध में पूनावाला ने कहा है कि वे उनसे उग्रतापूर्वक बात कर रहे हैं, महाराष्ट्र सरकार से जुड़े लोग तो नहीं हैं। बेशक उनके साक्षात्कार से यह संकेत मिलते हैं कि वे फिलहाल जल्द भारत नहीं लौटने वाले हैं, लेकिन यह कहकर उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता देश के प्रति जाहिर की है कि पुणे में वैक्सीन का उत्पादन पूरी क्षमता से जारी है, वे लंदन में रहकर ही उत्पादन की निगरानी करेंगे।

देश में सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्टों की भरमार है, जिसमें इसका आकलन किया जा रहा है कि आखिर अदार पूनावाला क्यों देश छोडक़र लंदन चले गए। कुछ ज्ञानियों ने तो इसे केंद्र सरकार से जोड़ दिया है। यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले में बड़ा घोटाला हुआ है, जिसके चलते देश छोड़ दिया गया। जैसा कि आजकल देश में प्रचलित है, सही और जायज को समझने, करने के बजाय अफवाह और मनगढं़त बातें करके माहौल को दूषित किया जाता है, वैसा ही इस मामले में भी घटता दिख रहा है।

महाराष्ट्र में देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी के घर के बाहर पहले बारूद की छड़ें रखी जाती हैं, उन्हें धमकी दी जाती है। मुंबई पुलिस का एक अधिकारी ही गुर्गा बनकर ऐसी वारदात को अंजाम देता है, हत्या करता है, लेकिन महाराष्ट्र सरकार कुछ नहीं बोलती। अगर राष्ट्रीय जांच एजेंसी मामले की जांच शुरू करती है तो उसे सहयोग नहीं दिया जाता। आखिर महाराष्ट्र में चल क्या रहा है? अब अगर इस आरोप के तार भी महाराष्ट्र से जुड़ रहे हैं तो फिर यह क्यों नहीं माना जाना चाहिए कि कोई उद्योगपतियों के लिए मुसीबत बन रहा है।

अब अदार पूनावाला के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर उन्हें किससे खतरा है? आखिर किसके डर से उन्हें पत्नी और बच्चों के साथ देश गुपचुप तरीके से देश छोडक़र लंदन में शरण लेनी पड़ी? मालूम हो, 3 दिन पहले 28 अप्रैल को ही पूनावाला को ‘संभावित खतरे’ के मद्देनजर पूरे देश में ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि खतरे को देखते हुए पूनावाला को सुरक्षा दी गई है। उन्हें धमकियां मिल रही थीं। एक तरफ केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा में जुटी थी, लेकिन दूसरी तरफ वे चुपचाप देश से बाहर जा चुके थे। इस समय देश में वैक्सीनेशन के लिए फिलहाल सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का ही सहारा है।

तब यह साफ है कि इन दोनों कंपनियों पर वैक्सीन उत्पादन का अभूतपूर्व दबाव है। कंपनियों के ऊपर लोगों की उम्मीदों के साथ-साथ, केंद्र और राज्य सरकारों की मांगों पर खरा उतरने और वैक्सीन की गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए कीमत को कम से कम रखने का दबाव पड़ रहा है। ऐसे में किसी तरह की कोई चूक होने पर और किसी उम्मीद पर खरा न उतरने का इन निर्माताओं को गंभीर नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। ऐसे में अदार पूनावाला के डर को इससे भी जोडक़र देखा जा रहा है।

हालांकि ऐसी चुनौतियां अभूतपूर्व हैं, यह समय किसी सरकार या फिर किसी शक्तिशाली के दबाव में आने का नहीं है। अदार पूनावाला को सिर्फ अपने फर्ज को ध्यान में रखना चाहिए, वे अगर दवा बनाते हैं तो फिर यही करें। हमें अंतिम सांस तक अथक प्रयास करने होंगे। पूनावाला ने खुद कहा है, ‘मुझे नहीं लगता कि भगवान को भी अंदाजा होगा कि हालात इतने खराब होने वाले हैं।’ऐसे में हर कोई जान बचाने को भाग रहा है, यह दबाव झेलना होगा और इससे बाहर भी आना होगा।

 

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