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वोटरों में सवाल : लाला सरकारू मल स्कूल का जनरल सेक्रेटरी एएस मैनेजमेंट का भला कैसे कर सकता

विपक्ष के विकास मेहता ने कहा – ऐसे व्यक्ति को खुद ही चुनाव लडऩे से पहले सोचना चाहिए

अर्थ प्रकाश/केवल कृष्ण।

Voters questions : खन्ना: शहर की सात शिक्षण संस्थाओं का संचालन करने वाली एएस हाई स्कूल खन्ना ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी के 24 जनवरी को होने वाले चुनावों को लेकर शहर का सियासी पारा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।

भाजपा समर्थित पैनल पहले ही आम आदमी पार्टी के नेता को पैनल में लेकर बुरी तरह से फंसा हुआ है। अब इस पैनल की अगुवाई कर रहे भाजपा नेता तथा नगर सुधार ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन राजेश डाली द्वारा शहर के नामवर लाला सरकारू मल स्कूल की कमेटी का जनरल सेक्रेटरी होने का विवाद भी गरमाने लगा है।

एएस मैनेजमेंट सोसायटी के वोटरों में आम यह सवाल उठ रहा है कि जो व्यक्ति पहले ही एक नामवर स्कूल का सेक्रेटरी चला आ रहा है वो एएस मैनेजमेंट के संस्थान के भले के बारे में कैसे सोच सकता है।

यह व्यक्ति या तो लाला सरकारू मल को तरजीह देगा या फिर एएस संस्थान को। यह सवाल वोटरों के मनों में है। इसे लेकर विरोधियों ने भी राजेश डाली को घेरना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस समर्थित पैनल के विकास मेहता ने कहा कि जो व्यक्ति पहले किसी एजुकेशन ट्रस्ट में है तो उसे दूसरे ट्रस्ट के चुनाव लडऩे से पहले सोचना चाहिए।

यह आम सी बात है कि अगर हम एक जैसे दो संस्थानों में होंगे तो भला एक संस्थान का ही कर पाएंगे। जनहित में देखते हुए राजेश डाली को खुद ही एक ट्रस्ट छोड़ देना चाहिए कि किसी को नुकसान न हो।

निजी हितों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं कुछ लोग : विजय शर्मा

वहीं बगैर किसी पैनल के आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे विजय शर्मा ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को एक ही संस्थान का पदाधिकारी रहना चाहिए। दूसरे संस्थान में जाकर चुनाव लडऩे का सीधा मतलब है कि ऐसे लोग निजी हितों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पिछली बार भी हाऊस में लिखित में प्रस्ताव रखा था कि जो व्यक्ति किसी दूसरे संस्थान का मेंबर है उसे एएस मैनेजमेंट चुनाव लडऩे की इजाजत नहीं होनी चाहिए। बड़े दुख की बात है कि सभी लोग आपस में मिले हुए हैं और निजी हितों के लिए काम कर रहे हैं।

क्या कहना है पूर्व मैनेजमेंट प्रधान राजीव राय मेहता का

प्रधान राजीव राय मेहता ने कहा कि जिस संस्था में जिस व्यक्ति ने पढ़ाई की हो उसे उसी संस्था में चुनाव लडऩा चाहिए और उसे संस्था को आगे बढ़ाने के लिए अपनी विचारधारा को रखना चाहिए दो नावों में सवार होना खतरनाक हो सकता है

 

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