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रुकना ही चाहिए विधानसभाओं में होने वाला बेवजह का शोरगुल

खास मुलाकात

हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता से सुमित्रा की बातचीत

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में इस बार करीब आधे विधायक पहली बार चुन कर सदन में पहुंचे हैं। इन नवनिर्वाचित विधायकों को विधायी कार्यों व विधानसभा के नियम-कायदों और परंपराओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि वे विधानसभा में और ज्यादा बेहतर तरीके से चर्चा में हिस्सा लेकर अपना योगदान दे सकें।

पंचकूला विधानसभा क्षेत्र से लगातार भाजपा के टिकट पर दूसरी बार चुन कर विधानसभा में पहुंचे ज्ञानचंद गुप्ता को सर्वसम्मति से स्पीकर चुना गया है। स्पीकर के तौर पर उनका मानना है कि पहली बार जीत कर विधानसभा में आये विधायकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था जरूरी है। जल्दी ही उन्हें प्रशिक्षण दे दिया जाएगा।

देहरादून में देश की विभिन्न विधानसभाओं के अध्यक्षों के सम्मलेन में हिस्सा लेकर लौटे और अब लखनऊ सम्मेलन में जाने की तैयारी कर रहे हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता से ‘अर्थप्रकाश’ की रिपोर्टर सुमित्रा ने उनसे लंबी बात की। यहां प्रस्तुत हैं इस बातचीत के मुख्य अंश :

नए चुन कर आये विधायकों के लिए विधानसभा की तरफ से प्रशिक्षण शिविर लगाया जाता रहा है। क्या इस बार भी ऐसा कोई शिविर लगाया जाएगा?

– हरियाणा विधानसभा की ओर से नए विधायकों को विधायी कार्यों की जानकारी देने और उन्हें विधानसभा के कामकाज बारे में प्रशिक्षित करने के लिए जनवरी महीने के आखिरी सप्ताह में एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा।

यह प्रशिक्षण शिविर कितने दिनों का होगा? नए विधायकों को कौन प्रशिक्षित करेगा?

– एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर होगा। इसमें दो या तीन सत्र रखे जाएंगे। हम प्रयास कर रहे हैं कि लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला जी इस प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर हरियाणा के विधायकों को विधायी कार्यों के बारे में प्रशिक्षित करें।

हाल ही में देहरादून में विभिन्न विधानसभाओं के अध्यक्षों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। आपने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन में क्या फैसले लिए गए?

– देहरादून में पिछले दिनों विभिन्न विधानसभाओं के अध्यक्षों के सम्मेलन में मेरे साथ हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने भी हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन में मुख्य तौर पर यह बात उभर कर सामने आई कि विधानसभाओं में बेवजह के शोर-गुल को रोकने और विधायकों को सार्थक चर्चा के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, ताकि विभिन्न कमेटियों की रिपोर्ट व अध्यादेशों को पारित करने अथवा स्वीकार करने से पहले उन पर व्यापक व गहरी चर्चा हो सके।

शोर-गुल कैसे रोका जा सकता है? विधायक तो वैल तक पहुंचते हैं। इससे सदन की कार्यवाही भी बाधित होती है। इसे रोकने के क्या उपाय हैं?

– बहुत से सुझाव आये। अभी तक तो ऐसा है कि कई बार ज्यादा शोरगुल होने पर सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी जाती है। जो विधायक शोरगुल में शामिल होते हैं, उन्हें नेम कर दिया जाता है। उनके खिलाफ यह कार्रवाई एक दिन के लिए या फिर सदन की शेष अवधि के लिए की जाती है। देहरादून के सम्मलेन में ऐसे भी सुझाव आये कि स्पीकर के व्यवस्था देने के बाद भी जो विधायक वैल में आ कर नारेबाजी करते हैं, सदन में धरने पर बैठते हैं, शोर-शराबा कर सदन की कार्यवाही चलने देने में बाधा डालते हैं, उन विधायकों की सदस्यता ही रद्द कर दी जाये।

क्या ऐसा संभव हो पायेगा?

– ऐसे सुझावों पर कहा गया कि यह फैसला बहुत सख्त होगा। इस पर सहमति नहीं बन पाई। अभी इस मुद्दे पर आगे भी विचार-विमर्श जारी रहेगा।

ऐसी सूचना मिल रही हैं कि पड़ोसी देशों के लोकसभा अध्यक्षों का भी सम्मलेन बुलाया जा रहा है। आप इसके बारे में कुछ बताइये ?

– हां , लखनऊ में 15 जनवरी को भारतीय विधानसभाओं के साथ-साथ पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल, भूटान जैसे देशों के विधानसभा व लोकसभा अध्यक्षों का सम्मेलन होने जा रहा है। इस सम्मलेन में विधानसभा जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूती देने पर विचार किया जाएगा। साथ ही विधानसभाओं को पेपरलैस करने के मसले पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

क्या आप को नहीं लगता कि दल-बदल कानून बनने के बावजूद इस पर रोक नहीं लग पा रही है?

– यह बात सही है। दल-बदल जैसे मामलों को कैसे रोका जा सकता है, इस मुद्दे पर भी हम सम्मलेन में विचार करेंगे।

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