Breaking News
Home » धर्म / संस्कृति » कार्य की निश्चिता को समझकर करे कार्य : मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक

कार्य की निश्चिता को समझकर करे कार्य : मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक

अगर आपका स्वास्थ ठीक नही है खान पान तथा दिनचर्या समय से नही है तो लक्ष्य से दूरी बढ़ेगी। असमय किसी काम को करके जैसे -अगर आप सोचते हैं की यह काम करले फिर भोजन कर लेंगे तो इससे आप अपना लक्ष्य जल्दी हासिल कर लेंगे यह जरुरी नही है। काम में एक निर्धारित कुशलता और समय का उचित उपयोग आपको लक्ष्य तक ले जायगा। समय का ध्यान न रखने पर कार्य क्षमता प्रभावित होगी। किसी सफल व्यक्ति को अपना आदर्श बनाये उससे सीख सकते है, अपनी कल्पना को साकार रूप देने के लिए यह सब करना होगा । ये शब्द मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक ने सैक्टर 18सी गोयल भवन 1051 मे में कहे।

मनीषी संत ने आगे कहा स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन का होना भी जरुरी है। अपने कार्य स्थल पर आफिस हो या घर साफ़ रखना चाहिए। व्यर्थ में कागजो का अम्बार न रखे जो कागज़ काम के है उन्हें ठीक से लगा दे जो बेकार हो गए हैं उनको फेक दे। बिना वजह कागज जो पड़े रहते है वे तनाव का कारण बनते है और उनमे से कोई काम का कागज खोजने में भी समय लगता है तब मन की खिन्नता बढ़ती है।

जब आप अपने आस पास सब साफ और महकता हुआ रखते है तब आप भी खुश रहते है और जब इसे आप अपना लेते है तब यह सब आपकी आदत में शुमार हो जाता है फिऱ आप अनायास ही इसके आदि हो जाते है फिऱ आप साफ़ किए बिना नही रह सकते। यह आदत एक दिन आपकी सफलता की राह आसान कर देती है। आपके श्रेष्ठ कर्म का श्रेष्ठ फल मिलेगा निम्न कार्य का फल भी उसी प्रकार होगा। जरुर मिलेगा। साहस का काम करने वालों के लिए खतरा बना रहता है लेकिन काम को करने वाले इसी में अपना काम करते हैं और खतरों से सावधान रहते हैं वे काम में सावधानी का ख्याल रखते हैं।

मनीषी संत ने अंत मे फ रमाया किसी भी कार्य को जब आप खीचते है तो उसमे रूचि कम होती जाती है, उसकी उपयोगिता भी घट जाती है। कार्य को लंबा न खीचें यह न सोचें की कल कर लेंगे यह तो छोटा सा कार्य है चाहे जब कर लेंगे यह सोच अगर बन गई तो एक दिन निरर्थक कार्यों का ढेर लग जायगा और झंझट बढेगा इसलिए रोज के छोटे छोटे काम 10-15 मिनट का समय देकर करते चलें तो ठोस धरातल पर रहेंगे । महान पुरुषों को देंखे उनके एक -एक क्षण का हिसाब रहता है कब क्या करना है सब निर्धारित होता है । मैं यहां आपको एक उदहारण देती हूँ -बेंजामिन फ्रेंकलिन एक किताब की दुकान चलाते थे एक दिन एक ग्राहक ने किसी किताब का मूल्य पूछा उन्होंने बताया एक डालर।

वह ग्राहक मोल -तोल करने लगा कुछ समय इसमे बीता तब फ्रेंकलिन ने कहा अब इसका मूल्य डेढ़ डालर हो गया ग्राहक ने पूछा ऐसा क्यों -फ्रेंकलिन ने कहा अब इसमे मेरे समय की कीमत भी जुड़ गई है और अगर आप बार बार समय खराब करेंगे तो पुस्तक का मूल्य उसी तरह बढ़ता जायगा।

फिर उस ग्राहक ने आग्रह पूर्वक पुस्तक का उचित मूल्य देकर ले लिया। इसलिए समय की कीमत करो यह बड़ी कीमती चीज है व्यर्थ ही समय को बर्बाद न करो।

Check Also

दीपक जहां भी जलाएंगे, रोशनी ही फैलाएगा : निरंकारी बाबा

आज दुनिया में जिधर भी नजर घुमाकर देखते हैं, चाहे धरती का कोई हिस्सा हो …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel