Breaking News
Home » धर्म / संस्कृति

धर्म / संस्कृति

दिमाग को हमने कल्याण में लगाना है : निरंकारी बाबा

दिमाग होना कोई बुरी बात नहीं। दिमाग तो होना ही चाहिए लेकिन इसे हमने कल्याण में लगाना है। अगर इसके द्वारा औरों के काम आया जा रहा है, महापुरुषों की शिक्षाओं के अनुसार कार्य हो रहे हैं तो इस दिमाग की महत्ता भी है और इसे यश भी प्राप्त होता है। वर्ना धिक्कार ही इसके हिस्से में आती है। इसीलिए …

Read More »

अंधकार को नकारात्मक का रूप न समझे : मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक

प्रकाश का अस्तित्व बस क्षणिक है, प्रकाश बहुत सीमित है, और खुद जलकर खत्म हो जाता है, लेकिन चाहे कुछ और हो या न हो, अंधकार हमेशा रहता है। लेकिन आप अंधकार को नकारात्मक समझते हैं। हमेशा से आप बुरी चीजों का संबंध अंधकार से जोड़ते रहे हैं। यह सिर्फ आपके भीतर बैठे हुए भय के कारण है। आपकी समस्या …

Read More »

शौच धर्म का सरताज : गुप्ति सागर जी महाराज

पर्युषण के इस पुनीत क्रम में उत्तम शौच धर्म का चतुर्थस्थान है। ज्यों-ज्यों मानव में क्षमा, मार्दव एवं आर्जव धर्म को जीवन में उतारने की दिशा में वृद्धि होती है त्यों-त्यों उसमें शौच धर्म का होना भी अनिवार्य है। शौच शब्द का अर्थ पवित्रता, आत्मिक शुद्धि, बाह्य शुद्धि से हमारे क्रिया कलापों पर कोई खास प्रभाव नहीं गिरता है क्योंकि …

Read More »

धनतेरस पर मां लक्ष्मी आएंगी आपके द्वार इन बातों को न करें नजरअंदाज

दीपों के पर्व दीपावली में कुछ ही दिन शेष हैं हिन्दुओं के इस सबसे बड़े त्यौहार की शुरुआत धनतेरस से ही हो जाती है। यादातर लोग धनतेरस के बारे में इतना ही जानते हैं कि इस दिन बर्तन और सोने-चांदी का सामान इत्यादि खरीदना शुभ होता है लेकिन यह तो अर्धसत्य है। धनतेरस का महत्व इतना ही नहीं है। धन …

Read More »

दिल और दिमाग को सत्य के साथ जोड़ें : निरंकारी बाबा

भक्तों के हृदय में सर्दव मानवता के उत्थान के लिए ऐसी भावना रहती है कि संसार में बसने वाले इन्सान इस जन्म का लाभ प्राप्त कर लें। मनुष्य जन्म के रुप में यह जा सुनहरी अवसर मालिक ने प्रदान किया है, इस जन्मए में ये अपनी आत्मा का कल्याण करे। आत्मा जो अपने मूल परमात्मा से बिछड़ी हुई है, अपने …

Read More »

सफलता के दायरे को करे ऊंचा : मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक

आमतौर पर समाज मे यह धारणा है कि सफल व्यक्ति बहुत सुखी होता है, हमेशा आंनद मे रहता है और हमेशा प्रसन्नचित रहता है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए सफलता के अलग अलग मायने हे। यहां तक कि सफलता को इतना संकीर्ण ओर छोटा मान लिया जाता है कि छोटी-छोटी राशि प्राप्ति करने को …

Read More »

आर्जव मिश्री सा मधुर : गुप्ति सागर जी महाराज

महानुभाव! कपटी की बड़ी दुर्दशा होती हैं। बाहर से वह कितने ही चेहरे ओढ़ ले दुनियां को छलने के लिए, लेकिन दुधमुंहा बच्चा भी जानता है कि कौन कितना राच्चा है? तब क्या आपकी पत्नी, बच्चे, बन्धुगण-रिपुजन एवं सम्माननीय-आदरणीय शासन-प्रशासन नहीं जानेगा। सब, सबको जानते हैं परन्तु कौन किसके आगे बुरा बने, हर आदमी की काट आपके पास है। बाहर …

Read More »

तारों को अघ्र्य देकर खोला जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

कार्तिक मास को त्यौहारों का मास कहा जाता है। इस महीने में हिंदू धर्म के कई बड़े त्यौहार आते हैं। ये व्रत और त्यौहार सनातन संस्कृति का अहम हिस्सा है जिससे सनातन परंपरा समृद्ध होती है और पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों की डोर मजबूत होती है। कार्तिक मास में आने वाला एक ऐसा ही व्रत है अहोई अष्टमी। यह व्रत …

Read More »

किसी भी प्रकार का अभिमान नहीं करना: निरंकारी बाबा

इन्सान अरसे से इस धरती पर जन्म ले रहा है, बस रहा है और आंखों से ओझल होरहा है। एक समय था जब गुंफाओं में रहता था इन्सान। वो नजारा बदलता गया। धीरे-धीरे वे गुफाएं झोपडिय़ों में बदली, झोपडिय़ां पक्के मकानों में बदलती गई। वे पक्के मकान आसमान को छूती इमारतों में बदलते गए। पहले इन्सान नग्न अवस्था में रहता …

Read More »

परिवर्तन सबसे बडा और सबसे अच्छा शिक्षक : मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक

हर घड़ी, हर पल बदल रहा है, यह सृष्टि का चक्र है, इसके साथ ताल मेल रखने के लिए, हमें समय के साथ निरंतर बदलाव लाना है, चाहे जीवन में कितने भी उतार-चढ़ाव आये, हमें बस निरंतर चलना है, नदी का पानी अगर बहता ही रहता है तो स्वच्छ निर्मल रहता है, अगर वह पानी बहने के जगह रुक जाये …

Read More »
Share
See our YouTube Channel