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धर्म / संस्कृति

किसके कारण यह शरीर चल-फिर रहा है?: निरंकारी बाबा

मायापती को जाने बिना, यह माया भी सुख देने वाली नहीं होती। प्रभु से मिले बिना इन्सान की आत्मा व्याकुल होकर भटकती रहती है। महात्मा कहते हैं- कबीर चकई जउ निसि बीछुरै आई मिल परभाति, ज्यों नर बिछुरै राम सिउ ना दिन मिले न राति। अन्धेरी रात में चकवे को चकवी की आवाज़ सुनाई देती है। सुनकर वह उस तरफ …

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महान आत्मा थेश्री गुरु अर्जन देव जी

गुरु अर्जन देव का जन्म सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु रामदासजी व माता भानीजी के घर वैशाख वदी 7, (संवत 1620 में 15 अप्रैल 1563) को गोइंदवाल (अमृतसर) में हुआ था। श्री गुरु अर्जन देव साहिब सिख धर्म के 5वें गुरु है। वे शिरोमणि, सर्वधर्म समभाव के प्रखर पैरोकार होने के साथ-साथ मानवीय आदर्शों को कायम रखने के लिए …

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क्यों करवाये थे विष्णु जी ने माता लक्ष्मी को विराट रूप के दर्शन?

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु ने अपने विराट स्वरूप के दर्शन लक्ष्मी जी को करवाए थे। हालांकि कि इस बारे में अलग-अलग पुराणों में अलग-अलग जानकारी मिलती है। भगवान विष्णु के परम भक्त नारद जी को भी उन्होंने अपने विराट स्वरूप के दर्शन दिए हैं। विश्वरूप या कहें भगवान विष्णु के विराट स्वरूप का उल्लेख भगवद्गीता के …

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कर्ण और कृष्ण के बीच के रिश्तों के महत्वपूर्ण रहस्य

महाभारत कालीन रिश्ते और उनके द्वंद्व, जिसमें छल, ईर्ष्या, विश्वासघात और बदले की भावना का बाहुल्य है, लेकिन इसी में प्रेम-प्यार, अकेलापन और बलिदान भी है। आओ जानते हैं कि कर्ण और भगवान श्रीकृष्ण के संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बातें। कुंति पुत्र कर्ण एक महान योद्ध था जो कौरवों की ओर से लड़ा था। कुंती श्रीकृष्ण के पिता वसुदेव की …

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समय के साथ भक्ति के तरीके नहीं बदलते : निरंकारी बाबा

समय के बदलने से या युगों के बदलने से प्रभु प्राप्ति के तरीके नहीं बदल गए हैं, साधन नहीं बदल गए हैं। जैसे दुनिया में पुराने समय से ही पानी प्यास बुझाने के लिए है। यह तो नहीं कि उस वक्त भोजन किया करते थे या कोई अच्छे वस्त्र पहन लिया करते थे, तो इससे उनकी प्यास बुझ जाती थी। …

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कबीर जी का लोई को दिया गया ज्ञान कर सकता है किसी का भी बेड़ा पार

गंगा नदी के किनारे एक साधु की कुटिया थी। साधु का नाम वनखंडी वैरागी था। उनके पास एक कामधेनु गाय थी। उसी गाय के दूध से वैरागी संत-सेवा किया करते थे। वैरागी एक दिन गंगा नदी में स्नान कर रहे थे। एक काष्ठ के खुले बक्से में लोई में लपेटी हुई एक छोटी-सी बच्ची थी। वह बक्सा पानी में बहता …

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वरूथिनी एकादशी : इस दिन पूजा कर पाएं दस हजार वर्ष के तप जितना पुण्य

बैशाख के महीने के कृष्ण पक्ष में पडऩे वाली वरुथिनी एकादशी इस लोक और परलोक में भी सौभाग्य प्रदान करने वाली है। वरूथिनी के व्रत से सदा सौख्य का लाभ तथा पाप की हानि होती है। यह सबको भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली है। मान्यता है कि वरूथिनी के व्रत से मनुष्य दस हजार वर्षों तक की तपस्या का …

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क्या हुआ जब श्री गणेश ने धारण किया स्त्री का रूप, पैराणविक कथा

क्या कभी आपने सुना है कि गणेश जी ने भी स्त्री रूप लिया था? जी हां…. भगवान शिव एवं माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का स्त्री रूप पुराणों में दर्ज किया गया है। विनायक गणेश जी के इस स्त्री रूप को ‘विनायकीÓ के नाम से जाना जाता है। धर्मोत्तर पुराण में विनायकी के इस रूप का उल्लेख किया गया …

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कालाष्टमी पर होती है शिव के रौद्र रूप कालभैरव की पूजा

हर माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन कालभैरव की पूजा का विधान है जिन्हें शिवजी का अवतार माना जाता है। कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन दुर्गा जी की पूजा और व्रत भी किया जाता है। शिव पुराण के अनुसार भैरव, शंकर के ही रूप हैं, …

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संतों-महापुरुषों ने हमें हमेशा सहनशीलता का पाठ पढ़ाया : निरंकारी बाबा

आज कितनी ज्यादा असहनशीलता है और इसीलिए हम इतना ज्यादा उत्पीडऩ देख रहे हैं, इसीलिए हम इतना अधिक रक्तपात देख रहे हैं। इसलिए हम परिवारों में इतना ज्यादा बिखराव देख रहे हैं क्योंकि यदि परिवार के लोग एक-दूसरे के प्रति सहनशील नहीं होंगे तो परिवार का ताना-बाना ही बिखर जायेगा और इसके कारण खुशियां भी इसी तरह बिखर जाएगी जिस …

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