Home » धर्म/संस्कृति

धर्म/संस्कृति

विश्वास के सहारे जीना संभव है?: मुनिश्री विनय कुमार

विश्वास एक मनभावना गुण है और इस किताब में हम जिन आदमियों और औरतों के बारे में अध्ययन करेंगे उन सबने इस गुण को बहुत अनमोल समझा था। लेकिन आज बहुत-से लोग विश्वास के बारे में ऐसा नहीं समझते क्योंकि उन्हें लगता है कि विश्वास का मतलब है किसी बात को यूं ही सच मान लेना, फिर चाहे उसका कोई …

Read More »

युद्ध के परिणाम पूरी मानव जाति के लिए हानिकारक हुआ करते हैं : निरंकारी बाबा

भक्तजनों का जीवन महान रहा है। उन्होंने महान देन दी है। आज उसी की जरुरत हर इन्सान को है ताकि सभी इस निरंकार प्रभु के साथ अपना नाता जोड़कर इन्सानियत के प्रति आस्थावान हो सकें। एक मानवता का रुतबा बुलन्द कर सकें। हमेशा ऐसे प्रयास कर सकें जिसमें अपनी भी भलाई हो और दूसरों की भी भलाई हो। इनन जब …

Read More »

सत्य एक पारदर्शी आंख

हे भगवन! आपकी अनेकान्तरूप दृष्टि सत्यार्थ है, उससे विपरीत एकान्तमत शून्यरूप असत् है इसलिए उस अनेकान्त दृष्टि से रहित सब कथन स्व- घातक होने से मिथ्यारूप है अथवा एकान्तमत के आश्रय से कहा हुआ समस्त वस्तु स्वरूप असत्य है तथा स्व- घातक होने से वह अनुचित भी है। महानुभाव! भारतीय दर्शन अनुभव को सर्वाधिक महत्व देता है। उसकी मान्यता है, …

Read More »

सीहोर का चिंतामण गणेश मंदिर : आज भी यहां साक्षात मूर्ति रूप में निवास करते हैं गणपति

देशभर में गणपति के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है सीहोर का चिंतामण गणेश मंदिर। कहते हैं यहां के गणेश जी प्रार्थना जल्दी सुनते हैं, चिंता दूर करते हैं व मुरादें पूरी करते हैं। यह चिंतामण गणेश भारत में स्थित चार स्वयंभू मूर्तियों में से एक माने जाते हैं। सीहोर के गणपति के बारे में कहा जाता है कि भगवान …

Read More »

ज्ञान की दौलत के सहारे सारे संसार को मालामाल करना है : निरंकारी बाबा

भक्तजन-महापुरुष-सन्तजन यही कार्य युगों से करते आ रहे हैं और जो भी इस कार्य में अपना योगदान देते हैं, उन्हीं को विवेकशील माना गया है। वही विवेक से कार्य कर रहे होते हैं। वही वास्तव में इस धरती को सजाने-संवारने का कार्य कर रहे होते हैं। यही कार्य करने योग्य है और इसी कार्य को प्रत्येक ने करना है। हर …

Read More »

कड़वे प्रवचन

आज रात्रि भोजन का त्याग और मंदिर जाने का संकल्प लेना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों को यह भी संकल्प लेना चाहिए कि वे अपने जीवन में मां- बाप को कभी वृद्धाश्रम नहीं भेजेंगे। बैल बूढ़ा हुआ, आपने उसे कसाईखाने भेज दिया। मां- बाप बूढ़े हुए, तो आपने उन्हें वृद्धाश्रम भेज दिया। दोनों में फर्क क्या हुआ है?

Read More »

संघर्ष को और गहरा करेंगे तो संदेह के बादल छटेंगे: मुनिश्री विनय कुमार

संघर्ष एक शब्द ही नहीं बल्कि जीवन का आधार है, जिसका जीवन में संघर्ष रूपी आग मे तपा नहीं है उसे जीवन के एक पल का अंदाजा भी नहीं है। संघर्ष और विश्वास से उसको नयी ताकत, नया विश्वास और नयी ऊर्जा मिलती है और इसी से संभवत: वह स्वार्थी बना तो परोपकारी भी बना। वह क्रूर बना तो दयालु …

Read More »

सत्य एक पारदर्शी आंख

मनुष्य व्यर्थ ही मिथ्या धारणाओं को ढो रहे हैं, शत्रुता का कोई आधार नहीं है। सत्य को जानना है, देखना है तो अनेकान्त की आंख से देखो। समन्वय की दृष्टि से देखो, सापेक्षता की दृष्टि से देखो जानो और वर्तो। विरोधी तत्व साथ-साथ रहते हैं इस सच्चाई को स्वीकारों, अनुभव करो। महानुभाव! सत्य की खोज का दूसरा प्रयोग है- श्वांस …

Read More »

कड़वे प्रवचन

पेड़, पशु और मनुष्य में एक अन्तर है। पेड़ के पास न तो गति है, और न ही दिशा। पशु के पास गति तो है लेकिन दिशा नहीं है मगर पृथ्वी पर मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसके पास गति भी है और दिशा भी है। मनुष्य सम्पूर्ण है। पशु कभी भी इंसान नहीं बन सकता, पर इंसान कभी भी …

Read More »

महालक्ष्मी मंदिर कोल्हापुर आस्था का केंद्र

आमतौर पर लोग अपने घर पर ही लक्ष्मी पूजन करते हैं पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित महालक्ष्मी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। हर घर में धन और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। अगर इनसे जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों की बात की जाए तो महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित महालक्ष्मी …

Read More »
Share
See our YouTube Channel