धर्म / संस्कृति Archives - Arth Parkash
Sunday, December 16, 2018
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धन-संपत्ति और पत्नी से जुड़ी ये बातें किसी को नहीं बतानी चाहिए

महान चाणक्य ने बहुत सी ऐसी बातें कहीं हैं जिन्हें अगर अपने जीवन पर उतार लिया जाए तो मनुष्य आने वाली बहुत सी आपदाओं से बच सकता है। आज हम उनके कुछ ऐसे ही वचनों पर गौर करेंगे जो आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च । वञ्चनं चापमानं च मतिमान्न प्रकाशयेत॥ यह आचार्य ... Read More »

महापुरुषों की संगति से दुई का भाव दूर हो जाता है : निरंकारी बाबा

महापुरुष हमेशा यही कामना करते हैं कि सन्तों से ही हमारा सम्पर्क बढ़े, महापुरुषों से ही हमारा नाता जुड़े और गुरुमुखों से मिलाप हो कहा भी है कि गंगा के संग सरिता बिगरी, सो सरिता गगा होई निबरी, बिगरियो कबीरा राम दुहाई, साचु भईओ अन कलाहि न जाई, कहने का भाव यह है कि जिस तरह से चन्दन के पस ... Read More »

भीतर जो हृदय, उसके रास्ते को जानना ही मेरा कवच : मुनिश्री आलोक

अक्सर हम जिन चीजों से सहमत नहीं होते, उन्हें अनदेखा करते जाते हैं, हम उनसे खुद को बहुत दूर मानते हैं, जबकि सच्चाई कुछ और होती है। एक साधु थे, उनके जवाब बहुत अटपटे, मजेदार लेकिन जीवन दृष्टि से भरपूर थे. एक बार उनके पास कुछ लोग आए, उनसे पूछा कि अगर आपके ऊपर कभी कोई हमला कर दे, तो ... Read More »

कलयुग में हनुमान ही एकमात्र जाग्रत देव

नकी भक्ति से व्यक्ति के भीतर साहस और आत्म विश्वास का संचार होता है। हनुमानजी की भक्ति हर संकट से बचाती है। भक्तों ने अपनी भक्ति के चलते हनुमान जी के अलग-अलग रूप को पूजनीय बनाया है। कहते हैं कि हनुमानजी की भिन्न-भिन्न मूर्तियों की उपासना से भिन्न-भिन्न फलों की प्राप्ति होती है। वैसे हनुमाजी की और भी मुखों वाली ... Read More »

सत्संग में जुडऩे से मन को बल प्राप्त होता है : निरंकारी बाबा

एक बार एक सन्त ने दूसरे महापुरुष से पूछा कि काफी दिनों से संगतें कर रहा हूँ, लेकिन मुझ में तो गुण नही आए । उस सन्त महापुरुष ने एक बांस की टोकरी उस व्यक्ति को थमा दी और बोला, इसमें पानी भर लाओ। वह उस टोकरी को नदी में डाले और जब निकाले तो पानी उसमें टिके ही नहीं। ... Read More »

भष्टाचार आचरण नही आदत है: मुनिश्री आलोक

भ्रष्टाचार एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही बस एक बात ध्यान आती है कि किसी तरह यह शब्द हमारे शब्दकोश से गायब हो जाए। भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है या यूं के कि यह एक बीमारी है जो समय के साथ लोगो और संस्थानों को खोखला बनाते जा रही है। यह एक एक करके सारी व्यवस्था की नींव ... Read More »

मन निर्मल करने के लिए सत्संग जरुरी : निरंकारी बाबा

किसी ने कबीर जी से पूछ लिया कि हम क्यों रोज साध संगत करें। क्यों हम रोज जाकर महापुरुष का संग करें? क्या जरुरत है। एक दफा हम परमात्मा नाम ले ही लेते हैं। हमें और भी कई काम होते हैं, तो ये रोजाना संगत की क्या बात है। हम क्यों बार-बार संगत में जाकर बैठें और वहां सुनें, वहाँ ... Read More »

जाति, पंथ से ऊपर है नमस्कार महामंत्र : मुनिश्री आलोक

मस्कार महामंत्र का उद्गम कब हुआ, किसने किया ये अतीत के गर्भ में है। यह मंत्र प्राचीनतम मंत्र है उस मंत्र में किसी संप्रदाय या किसी आमनाय का सबंध नही है। उसमें विशुद्ध साधनशील मनीषीयों को नमस्कार किया गया है। अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय और मुनियों को नमस्कार किया गया है। ना इसमे जाति है, न धर्म और न ही ... Read More »

मन निर्मल करने के लिए सत्संग जरुरी : निरंकारी बाबा

हापुरुष अपने जीवन में हर पल साध संगत को महत्ता देते हैं। कोई भी मौका हो, आपके लिए सबसे पहले साध-संगत का सहारा ही है, साध संगत का मिलाप ही है जो जीवन की नैया को डोलने से बचाता है। निरन्तर गुरुमुख महापुरुष इस साध संगत की अपने मन में कदर बना कर रखते हैं । कदर वही जान सकता ... Read More »

भगवान ऋषभदेव : जैन धर्म के पहले तीर्थंकर

भगवान ऋषभदेव जी जैन धर्म के पहले तीर्थंकर हैं। ऋषभदेव जी ने जैन धर्म के उत्थान के लिए कई कार्य किए। कहा जाता है कि इनके पुत्र भरत के नाम पर ही भारत का नाम भारतवर्ष पड़ा। ऋषभदेव जी का वर्णन हिन्दू पुराणों में भी पाया जाता है। कई जगह इनका वर्णन भगवान विष्णु के अवतार के रूप में किया ... Read More »

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