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थ्री-टियर सिक्योरिटी सिस्टम अपनाया गया है ईवीएम और वीवीपैट के लिए

हरियाणा के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. इंद्रजीत से ‘अर्थ प्रकाश’ की रिपोर्टर सुमित्रा की बातचीत

हरियाणा के लोगों ने 12 मई को बड़े चाव से लोकतंत्र का उत्सव मनाया। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए चुनाव आयोग की तरफ से सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किये गए थे। राज्य में 70 फीसदी से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। मतदान के बाद ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को स्ट्रांग रूम्स में रख दिया गया है। छुटपुट घटनाओं को छोड़ कर मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। हरियाणा में लोकसभा की सभी दस सीटों के लिए छठे चरण में एक ही दिन में मतदान कराया गया था। चुनावों के बंदोबस्त और ईवीएम व वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा को लेकर राज्य के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. इंद्रजीत से सुमित्रा ने लंबी बात की। यहां प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश :

मतदान सम्पन्न हो गया है। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा के क्या बंदोबस्त किए गए हैं?

ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य में 39 स्थानों पर 90 स्ट्रांग रूम्स बनाए गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर स्ट्रांग रूम्स के बाहर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात रहेंगे। कमरों के अंदर सीसीटीवी कैमरों से पैनी नजर रहेगी।

इनके लिए किस तरह की सिक्योरिटी होगी?

स्ट्रांग रूम्स भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार तैयार किए गए हैं। आयोग के निर्देश के मुताबिक रिटर्निंग अधिकारी तीन बार स्ट्रांग रूम को विजिट करेंगे। स्ट्रांग रूम में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को रखने और कमरे को सील करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराएंगे। रूम का केवल एक ही दरवाजा होगा। यदि स्ट्रांग रूम में एक से अधिक दरवाजे हैं तो एक दरवाजे को छोड़ कर बाकी सभी दरवाजों और खिड़कियों को सील किया जायेगा। रूम को डबल लॉक किया जाएगा। मशीनों की सुरक्षा के लिए स्ट्रांग रूम्स में थ्री-टियर सिक्योरिटी सिस्टम अपनाया गया है।

अगर किसी वजह से स्ट्रांग रूम्स को शिफ्ट करना पड़ा तो क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?

ऐसी स्थिति में इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। लेकिन खोलने से पहले आयोग को बताना जरूरी होगा। आयोग की अनुमति प्राप्त होने पर ही स्ट्रांग रूम्स को खोला जा सकता है। आपातकालीन स्थिति में स्ट्रांग रूम्स से ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को रिटर्निंग अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, उम्मीदवारों या उनके चुनावी एजेंट और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की मौजूदगी में दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकेगा। इसमें उनकी उपस्थिति दर्ज की जाएगी। लॉग बुक को रिटर्निंग अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी अपनी देखरेख में रखेगा।स्ट्रांग रूम्स के परिसर तक आने-जाने वालों के लिए लॉग बुक लगाई गई है। आयोग की हिदायतों के अनुसार स्ट्रांग रूम्स को केवल आपातकालीन स्थिति, जैसे आग लगना, बाढ़ आना या भूकंप आने की स्थिति में ही खोला जा सकेगा।

शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव सम्पन्न कराने के लिए हरियाणा निर्वाचन विभाग सचमुच बधाई का पात्र है। कितने फीसदी मतदान दर्ज किया गया है?

हां, पूरे प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही है। हरियाणा में लोकसभा चुनाव, 2019 के लिए लगभग 70.34 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसमें पुरूष मतदाताओं की तादाद 71 फीसदी, जबकि महिला मतदाताओं की तादाद 69.61 फीसदी रही है। सिरसा संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक 75.97 प्रतिशत और फरीदाबाद में सबसे कम 64.12 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। शुरू में जहां कहीं भी ईवीएम की तकनीकी खराबी की सूचना मिली, उन्हें तुरंत बदल दिया गया। इसके बाद मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से सम्पन्न हो गई। मतदान प्रक्रिया शाम छह बजे तक चली। जो मतदाता छह बजे से पहले लाइन में लग गये थे, उन सब के वोट डलवाये गए।

दिव्यांग मतदाताओं के लिए इस बार क्या कुछ विशेष बंदोबस्त किये गए थे?

– हरियाणा के आम लोकसभा चुनाव 2019 में, विशेष कर दिव्यांग मतदाताओं को घर से लाने व छोडने के प्रबंधों का न केवल दिव्यांग मतदाताओं ने जोरदार स्वागत किया है, बल्कि आम नागरिकों ने भी आयोग की इस पहल को अनूठी बताकर खुले मन से इसकी तारीफ की है। आयोग की इस पहल ने दिव्यांग मतदाताओं में उत्साह पैदा किया और लोकसभा चुनाव में वे बढ़-चढ़ कर अपने मतदाधिकार का इस्तेमाल कर सके।

राज्य में दिव्यांग मतदाताओं की तादाद कितनी है?

प्रदेश भर में एक लाख चार हजार पांच सौ चौंतीस दिव्यांग मतदाताओं ने अपने नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाए हुए हैं। जिला स्तर पर निर्वाचन विभाग ने भी दिव्यांग मतदाताओं से सम्पर्क स्थापित किया था। विशेषकर, चलने-फिरने में असमर्थ मतदाताओं के लिए वाहनों की सुविधा प्रदान करने की पेशकश कर उनकी सूची तैयार की गई। इसके अलावा जिन मतदान केन्द्रों पर बीस से अधिक दिव्यांग मतदाता रजिस्टर्ड थे, उनके लिए व्हीलचेयर की भी व्यवस्था करवाई गई थी। आयोग ने प्रदेश में 2,631 व्हीलचेयर मुहैया करवा कर चलने फिरने में असहाय व्यक्तियों में मतदान के प्रति उत्साह पैदा किया। आयोग की इस पहल से ऐसा महसूस हुआ कि दिव्यांगजनों ने भी देश व राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

दिव्यांगों के मतदान के लिए क्या कुछ जगहों पर स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की भी नियुक्ति की गई थी?

आयोग ने दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए मतदान केन्द्रों पर रैम्प की व्यवस्था के साथ-साथ उनकी सहायता के लिए स्वैच्छिक कार्यकर्ता भी नियुक्त किये थे, ताकि मतदान केन्द्र मेें दिव्यांगजन आसानी से अपने मत का प्रयोग कर सकें। प्रदेश भर में 18 साल से कम आयु के 9,911 स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं को लगाया गया था, जिनमें विशेषकर एनसीसी, एनएसएस के स्कूली छात्र शामिल थे। पंचकूला के मोरनी पहाड़ी क्षेत्र में पूर्ण रूप से शरीर से अक्षम दिव्यांगजनों को मोटर बाईक पर बैठा कर मतदान केन्द्र तक लाया गया और मतदान करवाकर उन्हें वापिस घर भी छोड़ा गया। आरोग्यम बाईक एम्बुलेंस की भी इस बार चुनाव में अहम भागीदारी रही है।

सुना है नेत्रहीन मतदाताओं के लिए पहली बार बैलेट पेपर पर ब्रेल लिपि का इस्तेमाल किया गया?

प्रदेश के 237 मतदाताओं की सुविधा के लिए पहली बार बैलेट पेपर पर ब्रेल लिपि भाषा लिखवाई गई ताकि ऐसे मतदाता बिना किसी सहायता के अपनी पसंद के उम्मीदवार का नाम पढ कऱ अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

पिंक मतदान केन्द्र किस मकसद से स्थापित किये गए थे?

राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक पिंक मतदान केन्द्र बनाया गया था। इन केन्द्रों को ‘सखीÓ का नाम दिया गया। ऐसे मतदान केन्द्र महिलाओं के लिए स्थापित किए गए थे। इन केन्द्रों की स्थापना करना ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को मताधिकार के लिए प्रेरित करना था। नब्बे हलकों में बनाए गए सखी मतदान केन्द्रों को न केवल आकर्षक रूप दिया गया था, बल्कि इनमें महिला मोटिवेटरों को भी लगाया गया था। आयोग के इन प्रयासों की वजह से प्रदेश की महिलाओं ने भी इस बार लोक सभा चुनावों में खूब बढ़-चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया।

मतदाताओं को जन्म दिवस पर सैल्फी उपहार की भी ख़बरें छपी हैं?

प्रदेश के 20,428 मतदाताओं का जन्म दिवस 12 मई को था। उन्हें अपने परिवार व पडौसियों के साथ मतदान केन्द्र पर हैपी बर्थ डे बोलकर सैल्फी लेने की योजना तैयार की गई थी। इससे प्रोत्साहित होकर कुछेक युवाओं ने सेल्फी भी शेयर की। आयोग की इस पहल से उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग कर के अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया। इसी प्रकार जिन युवा मतदाताओं की आयु एक जनवरी, 2019 को 18 वर्ष हो गई और जो पहली बार मतदाता बने थे, ऐसे 2,375 मतदाताओं को भी ब्राण्ड एम्बेसडर मनोनीत कर आयोग ने उन्हें भी अधिक से अधिक मतदान के लिए उत्साहित किया।

कितने मतदान केंद्र इस बार संवेदनशील घोषित किये गए थे?

कुल 19,441 मतदान केन्द्रों में से 2,463 मतदान केन्द्रों को संवेदनशील, 2,734 अतिसंवेदनशील और 247 मतदान केन्द्र क्रिटिकल श्रेणी में रखे गये थे। इनमें शहरी क्षेत्रों में 5,510 और ग्रामीण क्षेत्रों में 13, 931 मतदान केंद्र थे। चुनाव करवाने के लिए लगभग सवा लाख अधिकारी/ कर्मचारी प्रत्यक्ष रुप से चुनावी डयूटी पर रहे। कुल 82,774 कर्मचारी व अधिकारियों को मतदान डयूटी के लिए पीठासीन अधिकारी लगाया गया। चुनावी ड्यूटी के लिए कुल ७७६० वाहन थे। 9,227 माईक्रो आब्जर्वर अलग-अलग मतदान केन्द्रों पर मौजूद रहे। इसके अलावा 1634 सैक्टर आफिसरों ने मतदान प्रक्रिया की मोनिटरिंग की। 900 जोनल मैजिस्ट्रेटस ने कानून व व्यवस्था बनाए रखने के लिए फी ल्ड में कमान संभाली। इसके अलावा 10,737 कर्मचारियों को आरओ/एआरओ/डीआरओ/नोडल अफसर/ऑब्जर्वर की सहायता के लिए विशेष रूप से तैनात किया गया था। इनके अलावा 537 उडऩ दस्ते व 29 ऑब्जर्वर निगाह रखे हुए थे।

शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की कितनी कंपनियां तैनात करनी पड़ीं ?

चुनाव डयूटी में केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की 95 कम्पनियों को तैनात किया गया था। इसके अलावा हरियाणा पुलिस, एसपीओ व होम गार्ड के लगभग 59000 जवान भी चुनाव डयूटी पर रहे। अब तक का यह सबसे बड़ा चुनावी इंतजाम था, जिसमें व्यापक स्तर पर कार्यबल व मशीनरी का उपयोग किया गया। आयोग के टोल फ्री नम्बर 1950 की 24 गुणा 7 घण्टे निगरानी रखने के लिए जिला स्तर कॉल सैंटर भी बनाए गए।

हरियाणा में इस बार के लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची में कुल कितने वोटर दर्ज किये गए थे?

संशोधित मतदाता सूची के अनुसार, जो 23 अप्रैल, 2019 को प्रकाशित की गई थी, प्रदेश में कुल एक करोड़ अस्सी लाख छप्पन हजार आठ सौ छियानवे मतदाता हैं, जिनमें एक लाख पांच हजार आठ सौ उनसठ सर्विस वोटर और एक लाख चार हजार पांच सौ चौंतीस दिव्यांग मतदाता शामिल हैं। पुरुष मतदाताओं की तादाद सतानवे लाख सोलह हजार पांच सौ सोलह और महिला मतदाताओं की तादाद तिरासी लाख चालीस हजार एक सौ तेहतर थी। राज्य में मतदाता सूची में दो सौ सात ट्रांसजेंडर मतदाता भी दर्ज हैं।

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