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Three and a half lakh students reduced in government schools

सरकारी स्कूलों में कम हो गए साढ़े तीन लाख विद्यार्थी

जिला शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट पर लगी फटकार

Three and a half lakh students reduced in government schools : हरियाणा में कोरोना का असर अब दिखाई देने लगा है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल साढे तीन लाख से अधिक बच्चे कम हो गए। यह बच्चे कहां चले गए इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। पंजीकृत पतों पर बच्चे उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश के सभी जिलों से मिली रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं। निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को लताड़ लगाते हुए बिना किसी देरी के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने तथा गायब हुए बच्चों को तलाशने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा सत्र शुरू हुआ तो पता चला कर गए पलायन

Three and a half lakh students reduced in government schools: हरियाणा में कोरोना व लॉकडाउन के चलते पिछले एक साल से स्कूली शिक्षा प्रभावित हो रही है। हालांकि पिछले साल निजी स्कूलों से एक लाख 99 हजार बच्चों के सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने से सरकार खासी उत्साहित नजर आई। इस बीच पिछले एक साल से स्कूल बंद हैं। निदेशालय के निर्देशों के बावजूद अध्यापकों ने बच्चों के अभिभावकों से तालमेल नहीं रखा। जिसका परिणाम सबके सामने है। सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले तीन लाख 54 हजार 399 बच्चे गायब हो गए हैं।

Three and a half lakh students reduced in government schools: शिक्षा निदेशालय को इस बारे में पता तब चला जब प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से नए सत्र में हुए दाखिलों को लेकर रिपोर्ट ली गई। बैठक में ज्यादातर जिला शिक्षा अधिकारियों ने तर्क दिया कि बच्चे अपने मूल राज्यों में पलायन कर गए हैं। कईयों का तर्क था कि सरकार द्वारा खोले जा रहे संस्कृति मॉडल स्कूलों की तरफ रूझान अधिक होने के कारण सरकारी स्कूलों में बच्चे कम हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारियों के पास उनके जिलों से गायब हुए बच्चों के बारे में कोई ब्यौरा नहीं है। इनमें से कई बच्चे तो ऐसे हैं जो पिछले दो-तीन साल से स्कूलों में पढ़ रहे थे। प्रदेश में कई जिले तो ऐसे हैं जहां के सरकारी स्कूलों में बीस से 25 प्रतिशत तक छात्र संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। राज्य में इस साल औसत 19 फीसदी बच्चे कम हो गए हैं।

Three and a half lakh students reduced in government schools: प्रदेश के झज्जर व चरखी दादरी जिलों में सबसे अधिक 25 फीसदी बच्चे कम हो गए हैं। शिक्षा मंत्री कंवर पाल के गृह जिला यमुनानगर में 19 प्रतिशत, स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री अनिल विज के गृह जिला में 18 प्रतिशत, मुख्यमंत्री मनोहर लाल के गृह जिला करनाल में 17 फीसदी बच्चे कम हो गए हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबित पिछले साल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा तक 22 लाख 71 हजार विद्यार्थी थे। इस साल एक मई से शुरू हुए शिक्षा सत्र के दौरान 19 लाख 16 हजार 601 विद्यार्थी ही पंजीकृत हुए हैं। पिछले साल के मुकाबले तीन लाख 54 हजार 399 विद्यार्थी कम हो गए हैं।

सरकार ने बढ़ाई दाखिले की तिथि

सरकारी स्कूलों में अचानक विद्यार्थियों की संख्या कम होने के चलते सरकार ने दाखिलों की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। तर्क दिया गया है कि एक मई से शिक्षा सत्र शुरू हुआ और उसी दौरान दूसरे चरण का लॉकडाउन शुरू हो गया। जिसमें स्कूल बंद कर दिए गए। अब निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को बच्चों के बारे में पता लगाने तथा अगस्त माह तक दाखिले करने के निर्देश दिए हैं।

अब घर-घर होगा सर्वे

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का कम पंजीकरण होने के बाद निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने-अपने जिलों में विद्यार्थियों के पंजीकृत पतों पर जाकर तस्दीक करें। जो लोग कोरोना के चलते स्कूल बंद होने के कारण दाखिले नहीं करवा रहे हैं उन्हें फिर से स्कूलों की तरफ लाया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक विद्यार्थी के दाखिले नहीं लेने के पीछे क्या कारण रहे इसका भी पता लगाया जाएगा।

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