हिंदुओं के इस गांव में है अकबर सम्राट की सोने की मूर्ति, साल में एक बार होती है पूजा, बकरा किया जाता है हलाल
Thursday, October 18, 2018
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हिंदुओं के इस गांव में है अकबर सम्राट की सोने की मूर्ति, साल में एक बार पूजा के दौरान, बकरा किया जाता है हलाल

हिंदुओं के इस गांव में है अकबर सम्राट की सोने की मूर्ति, साल में एक बार पूजा के दौरान, बकरा किया जाता है हलाल

चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के मलाणा गांव में मुगल सम्राट अकबर की पूजा करते हैं। यहां हर साल एक बार अकबर की मूर्ति को बाहर निकाला जाता है और ढ़ोल नगाड़ों के साथ इसकी पूजा की जाती है। हिमाचल प्रदेश के इस विचित्र गांव का अपना संविधान और अदालतें हैं जहां पर लोग अपने ही स्तर पर मामलों का निपटारा कर लेते हैं। इस गांव के मुकद्दमें सरकारी अदालतों में कम ही जाते हैं। यहां के लोग अपने को सिंकदर के वंशज मानते हैं।

अकबर के लिए किया जाता है बकरा हलाल….

स्थानीय लोग बताते हैं कि भीक्षा मांगते हुए दिल्ली पहुंचे दो साधुओं को सम्राट अकबर ने पकड़ कर उनसे उनकी झोली में से दक्षिणा छीन ली। इसके बाद जम्दग्नि ऋषि ने स्वप्न में अकबर को ये वस्तुएं लौटाने को कहा। अकबर ने फिर सैनिकों के हाथ यहां अपनी ही सोने की मूर्ति बनाकर बतौर दक्षिणा वापस भेजी। इस मूर्ति की तब से यहां पूजा होती है। यहां अकबर के लिए बकरा हलाल किया जाता है।

 प्राचीन काल से लोकतांत्रिक व्यवस्था…

कुल्लू जिले का मलाणा गांव अपने आप में कई विविधताओं को समेटे हुए है। यहां के लोग अपने देवता जमलू के सिवाए किसी भगवान को नहीं मानते। इस गांव में प्राचीन काल से लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम है। गांव में बसने वाले सिकंदर के वंशज बताए जाते हैं। कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर भी इस गांव को अपने अधीन नहीं कर पाया था। कहते हैं कि इस गांव को अपने अधीन करने के लिए अकबर ने यहां के देवता जमलू की परीक्षा लेनी चाही थी, मगर वह कामयाब नहीं हो पाया था। इसके बाद अकबर को जमलू देवता से माफी मांगनी पड़ी थी।

फागली उत्सव

इस गांव के रीति रिवाज हिंदुओं की तरह हैं यह लोग अपने आपको मानते भी हिंदू ही हैं। गांव में साल में एक बार यहां के मंदिर में अकबर की पूजा की जाती है। इस पूजा को बाहरी लोग नहीं देख सकते हैं। फागली उत्सव में अकबर की सोने की मूर्ति और चांदी के हिरण को भी बाहर निकाल कर इनकी पूजा की जाती है। कारदारों का कहना है कि अकबर के लिए समर्पित सिर्फ दो त्योहार हैं। उन्होंने बताया बताया कि जम्दग्नि ऋषि और अकबर के वचन के आधार पर सभी हिंदुओं को यहां परंपरा का विधिवत निर्वहन करना पड़ता है। महिलाएं तीन दिन तक शाम के समय जम्दगिभन ऋषि की धर्म पत्नी रेणुका के दरबार में नृत्य करती हैं।

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