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There should be no partiality, fight together with Corona

न हो पक्षपात, मिलकर लड़ें कोरोना से युद्ध

कोरोना संक्रमण से युद्ध के बीच यह आरोप विचलित कर देता है कि केंद्र सरकार गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ पक्षपात कर रही है। क्या वास्तव में ऐसा है? अगर ऐसा है तो यह बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो राजनीतिकों को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए और वस्तुस्थिति को समझना चाहिए। केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पूरे देश से कोरोना संक्रमण के खात्मे की है, तब यह कहना किस प्रकार उचित होगा कि वह केवल भाजपा शासित राज्यों पर ही ध्यान दे रही है। बीते दिन झारखंड के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद जैसा बयान दिया था वह इसी आरोप के आधार पर था। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री भी ऐसा ही आरोप लगा चुके हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान की सरकारों की ओर से भी ऐसे ही आरोप सामने आए हैं।

हालांकि अब पंजाब सरकार ने भी आधिकारिक रूप से यह कह दिया है कि पंजाब को उसकी जनसंख्या के हिसाब से न वैक्सीन मिल रही है और न ही फंड। मुख्यमंत्री की सांसदों के साथ बैठक के दौरान यह कहा गया कि पंजाब के साथ पक्षपाती रवैया अपनाया जा रहा है। इस संबंध में विशेषज्ञों ने आंकड़े भी एकत्रित किए हैं। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से यह मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष उठाने को कहा गया है। बेशक राज्य सरकार की ओर से ऐसा आरोप लगा है, लेकिन केंद्र सरकार का इस संबंध में क्या मत है और क्या पक्ष है, इसका खुलासा नहीं हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से ऐसे आरोपों से इनकार किया जाता रहा है।

पंजाब भी उन राज्यों में शुमार है, जोकि आज कोरोना संक्रमण से बुरी तरह घिरे हुए हैं। बावजूद इसके राज्य सरकार हर मोर्चे पर पूरी शिद्दत से लड़ रही है। अब विश्व बैंक से लिए कर्ज की राशि को भी मेडिकल उपकरणों पर खर्च करने के मुख्यमंत्री ने आदेश दिए हैं। जाहिर है, यह समय दूसरे प्रोजेक्ट और योजनाओं को ठंडे बस्ते में रखकर कोरोना से लडऩे का है। बेशक, पंजाब सरकार से भी यह पूछा जाएगा कि उसने समय रहते संक्रमण को रोकने के प्रयास क्यों नहीं जारी रखे, लेकिन अब जब हालात बेहद संवेदनशील हो चुके हैं, तो सरकार के पास उपलब्ध हर मशीनरी को संक्रमण से राहत दिलाने के लिए इस्तेमाल करना ही श्रेयकर है। बावजूद इसके केंद्र सरकार से राज्य को मिलने वाली मदद में कोताही नजर आ रही है। आंकड़ों के हवाले से भी बताया गया है कि पंजाब को प्रति करोड़ आबादी के पीछे 12.19 लाख वैक्सीन मिली हैं, लेकिन पड़ोसी राज्य हरियाणा को 15.36, उत्तराखंड को 18.67 लाख डोज दी गई।

वहीं एनडीआरएफ के जरिए मिलने वाली राहत राशि भी पंजाब को कम मिली है, राज्य को पहली किस्त के रूप में 71.87 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि हरियाणा को यह राशि 75.88 करोड़ रुपये है। दूसरी किस्त में भी हरियाणा को 62.42 करोड़ जबकि पंजाब को 59.35 करोड़ रुपये ही मिले। दूसरे राज्यों की जनसंख्या की तुलना में पंजाब के लिए यह राशि कमतर ही नजर आती है। इस बीच राज्य में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा दस हजार के पार हो चुका है, जोकि संक्रमण की तेजी को दर्शाता है। बेशक, राज्य में वैक्सीन लगाने का काम भी जारी है। इस बीच सरकार ने तीस लाख डोज का ऑर्डर और दिया है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि राज्यों के पास अभी भी वैक्सीन की 90 लाख से ज्यादा डोज उपलब्ध हैं, इसके अलावा अगले तीन दिनों में 10 लाख से अधिक डोज और उपलब्ध कराई जाएंगी। वैसे राज्यों में वैक्सीन डोज की कमी की रिपोर्ट सामने आ रही थी, एक मई से टीकाकरण अभियान शुरू होना था, लेकिन इसमें वैक्सीन डोज उपलब्ध न होने से देरी हुई। पंजाब में भी सोमवार से टीकाकरण की तैयारी करने के मुख्यमंत्री की ओर से निर्देश दिए गए हैं। वास्तव में इस समय कोरोना से लडऩे के लिए टीकाकरण को जरूरी समझा जा रहा है। अगर किसी देश में लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या को टीका लग गया तो तय माना जा रहा है कि वहां कोरोना का उन्मूलन हो जाएगा। कई देश इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ देश जल्दी ही पूरी जनसंख्या को टीका लगाने का लक्ष्य हासिल कर लेंगे। भारत में हालांकि खुद दुनिया की सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने वाली संस्थाएं हैं, लेकिन इस दौर में यह काफी पिछड़ गया है। इसकी वजह यह रही कि हमारी सरकार ने वैक्सीन की जरूरत के मुताबिक योजना बनाकर पहले ऑर्डर नहीं दिए। अब जब भारत में कोरोना की ताजा लहर भयावह रूप ले चुकी है, तब तेजी से टीके लगाने की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है। हालांकि इसी गति के साथ वैक्सीन का निर्माण होना भी जरूरी है, बीते दिनों सीरम इंस्ट्ीटयूट के मालिक की ओर से वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए धमकाने का आरोप भी सामने आया था।

जाहिर है, देश के प्रत्येक व्यक्ति को टीकाकरण का लक्ष्य लेकर चल रही केंद्र सरकार के लिए इतनी वैक्सीन उपलब्ध कराना चुनौती है। लेकिन इस बीच सरकार ने दूसरे देशों में बनी वैक्सीन को भी भारत में लगाने की मंजूरी दे दी है। अब अमेरिकी सरकार ने भी कोरोना की गंभीर स्थिति के मद्देनजर अपने यहां बनी वैक्सीन को बौद्धिक संपदा अधिकार के दायरे से बाहर रखने की बात कही है। अमेरिका और दूसरे देशों से लगातार भारत को मेडिकल मदद मिल रही है। ऐसे में वहां भी वैक्सीन भी देश में उपलब्ध हो रही है।

भारत जैसे देश में वैक्सीन सरकार की ओर से लगाए जाने का महत्व ज्यादा है।  वास्तव में कोरोना की मौजूदा दूसरी लहर से अगर मजबूती के साथ लड़ा जाए तो तीसरी लहर का भी मुकाबला किया जा सकता है। आज यह जरूरी है कि कड़े कदम उठाए जाएं और राज्यों से लेकर जिले और शहर स्तर तक कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो। हालांकि यह भी जरूरी है कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ खड़ी नजर आए। केंद्र को उन शिकायतों का तुरंत समाधान करना चाहिए, जिनमें फंड और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध न कराने या फिर कम कराने की बात कही गई है। किसी भी समय पक्षपात जैसे आरोप नहीं लगने चाहिए लेकिन कोरोना काल में तो ऐसा सोचा तक नहीं जाना चाहिए। क्योंकि पूरा देश एक महामारी से लड़ रहा है, कोरोना राज्य की सीमाएं नहीं देखता, वह कभी भी और कहीं भी पहुंच रहा है। ऐसे में हर राज्य में समान रूप से इसके खिलाफ संसाधन जुटाकर युद्ध होना चाहिए।

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