Breaking News
Home » धर्म / संस्कृति » प्रभु-परमात्मा के सिवाय कोई शक्ति नहीं है: निरंकारी बाबा

प्रभु-परमात्मा के सिवाय कोई शक्ति नहीं है: निरंकारी बाबा

हम सुनते आ रहे हैं कि परमात्मा बहुत विशाल है, लेकिन कितना विशाल है, यह देखने से ही पता लगता है। कबीर जी ने देखा तभी कहा। आज लोग कहते हैं कि निराकार को कैसे देखा जा सकता है? अगर न देखा जा सकता होता तो कबीर जी यह क्यों कहते कि-

मैं कहूं आंखन की देखी।

भाव, उन्होंने इसे देखकर इसका वर्णन किया। उन्हें ऐसी निगाह प्राप्त हुई सद्गुरु से। मीरा को भी यही निगाह प्राप्त हुई तो उसने श्याम को चारों ओर मौजूद पाया। मीरा बचपन से ही साकार के प्रति समर्पित थी। वह भगवान कृष्ण की मूर्ति हमेशा अपने पास रखती थी; लेकिन भगवान कृष्ण के असल निराकार स्वरुप के साथ उसका नाता जुड़ा गुरु रविदास जी के चरणों में जाने से। तभी उसकी भक्ति को पूर्णता प्राप्त हुई। जहां भी यही बात कही जा रही है कि जिस प्रभु-परमात्मा का जिक्र हम कर रहे हैं, इसका जब तक हमें बोध नहीं होता, तब तक हम भ्रमों में रहते हैं और यही भ्रम हमारे दुखों का कारण बने हुए हैं। हम दूसरों को पराया मान रहे हैं। हमारे लिए दूसरों की जाति नीची हो गई है और अपनी जाति ऊंची। ऐसी भावनाओं से हम नुकसान का कारण बन रहे हैं।

ऐसी भावनाएँ तभी समाप्त हो सकती है जब इस सत्य के साथ नाता जुड़ जाता है। सत्य की परिभाषा हम उसी को दे सकते हैं जो सदैव एकरस रहने वाला हो और प्रभु-परमात्मा के सिवाय कोई शक्ति एकरस रहने वाली नहीं है। हर किसी में तबदीलियां हैं। सदैव एकरस रहने के कारण ही प्रभु-परमात्मा को ‘युनिवर्सल ट्रूथ (अटल सत्य) कहा गया है, ‘अल्टीमेट ट्रूथÓ कहा गया है। एक प्रभु-परमात्मा को छोड़कर सभी में तबदीली आ जाती है। अगर मैं जोर से कहूं कि अभी रात है तो यह स्टेटमेंट इस वक्त तो ठीक है लेकिन चन्द घंटों के बाद में फिर कहूं कि अभी रात है तो सभी हँसेंगे कि सूरज चढ़ा हुआ है और यह कह रहे हैं कि अभी रात है।

इसी प्रकार हम कहते हैं कि अभी बचपन है, यह सत्य है लेकिन कुछ वर्षों बाद जवानी में कदम रखते ही बचपन झूठ हो जाता है और जवानी सत्य हो जाती है। इसी प्रकार गर्मी-सर्दी में तबदील हो रही है, ऊंचाई-गहराई में तबदील हो रही है।

भाव, हर चीज क्षण-प्रतिक्षण बदल रही है। केवल परमात्मा, निराकार, अकाल पुरख को ही सत्य की संज्ञा दी गई है। जो भी इस सत्य के साथ िनाता जोड़ लेते हैं, वही हकीकत में विचरण करते हैं वरना अनेक लोग बचपन से ही कुरान, रामायण, गुरुवाणी आदि धर्मग्रन्थों का पाठ करते आ रहे हैं लेकिन जब इस सत्य का बोध हुआ तभी एक मंच पर इक_े होकर एक जेसी आवाज दे पाने में सफल हुए हैं। मुसलमान भाई भी यह कह रहा है कि जिस ‘शाहरकÓ से नजदीक के बारे में मैंने सुना था, उसका बोध हो गया है।

Check Also

बिल्वेश्वर मंदिर में मंदोदरी को दिए थे भगवान शिव ने दर्शन

मेरठ का श्री बिल्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर रामायण कालीन है। बताया जाता है कि इसी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel