Home » संपादकीय » मोटर वाहन एक्ट सख्त ही सही

मोटर वाहन एक्ट सख्त ही सही

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन एक्ट को सख्त बनाकर सही किया लेकिन कई राज्य सरकारें हैं, जिन्होंने इस एक्ट को अपने यहां लागू करने से इनकार कर दिया। इसकी वजह राजनीतिक हैं। हालांकि अब विधि मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि राज्यों को मोटर जुर्माना घटाने का मनमाना अधिकार नहीं है। इन राज्यों ने जब एक्ट को नहीं लागू करने की बात कही थी तो सड़क परिवहन मंत्रालय ने विधि मंत्रालय से राय मांगी थी, जिसके जवाब में यह बात कही गई। इस बीच विधि मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अगर राज्य ऐसा तर्क देते हैं तो यह देखा जाना चाहिए कि उनके यहां हादसों का ग्राफ क्या है। यानी अगर हादसे ज्यादा हैं तो फिर नए एक्ट को लागू करने से वहां की सरकार मना नहीं कर सकती। कहा गया है कि राज्य केवल उन्हीं उल्लंघनों में जुर्माना कम कर सकती हैं, जिनमें हादसों का ग्राफ नीचे गिर रहा हो। हालांकि यह शर्त कौनसा राज्य पूरा सकेगा, इसमें पूरा संशय है। आज देश के प्रत्येक राज्य में अपार वाहन हैं, इसके साथ ही यातायात नियमों को तोडऩे वालों की संख्या भी कम नहीं है।

गौरतलब है कि पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, केरल आदि राज्यों ने एक सितंबर से लागू मोटर वाहन एक्ट के बढ़े जुर्माने लागू करने से इनकार कर दिया था। संसद में जब नया मोटर वाहन एक्ट पारित हुआ तो पूरे देश में इसका पुरजोर विरोध हुआ था, हालांकि अनेक राज्यों जैसे कि हरियाणा ने इसे तुरंत लागू कर दिया था वहीं संघशासित प्रदेशों में भी इसे लागू कर दिया गया था। वहां भी इसका विरोध हुआ लेकिन यातायात नियमों की परवाह करने वाले लोगों की सकारात्मक राय के चलते ऐसा विरोध खत्म होता गया और अब यह पूरी तरह अनदेखा किया जा चुका है। विरोध करने वाली राज्य सरकारों ने कंपाउंडेबल अपराधों में धारा 200 के प्रावधानों के तहत कम जुर्माना वसूलने की घोषणा की थी। मालूम हो, कंपाउंडेबल अपराध ऐसे मामलों को कहा जाता है जिन्हें कोर्ट के बाहर सुलह-समझौता करके किया जा सकता है। इन राज्यों की सरकारों को यह अच्छी तरह मालूम है कि उनके यहां यातायात नियमों की क्या हालत है, लेकिन इसके बावजूद एक्ट के खिलाफ खड़े होने वाले लोगों का राज्य सरकारों ने साथ दिया।

यह समझने वाली बात है कि शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए कोई सिर्फ अपनी जिंदगी को खतरे में नहीं डालता, अपितु दूसरे लोगों का जीवन भी संकटग्रस्त करता है। ऐसे में एक राज्य सरकार ने उस व्यक्ति को कमजोर मोटर वाहन एक्ट के तहत छूट दे दी हो, लेकिन उसका क्या जिसकी जान शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले की वजह से जा रही हो। इसे ऐसे समझा जाना चाहिए कि अगर किसी के पास वाहन की आरसी है, लाइसेंस है, प्रदूषण सर्टिफिकेट है, इंश्योरेंस हैं तो इसमें उसी का भला है, लेकिन अगर ये कागजात उसके पास नहीं हैं तो सरकार इस एक्ट के जरिए उसकी ही हिफाजत सुनिश्चित करना चाहती है। अगर सबकुछ नियमानुसार होगा तो स्पीड लिमिट भी मेंटेन होगी, बत्तियों पर रूकना सुनिश्चित होगा, हेलमेट, दोपहिया पर तय सवारियों का बैठना यकीनी होगा, इसके अलावा पुराने हो चुके वाहनों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम होगी आदि। मालूम हो, देश में हर साल पांच लाख लोग सड़क हादसों के दौरान मारे जाते हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, अगर इन असमय हुई मौतों को रोकना है तो मोटर वाहन एक्ट में सख्ती जरूरी है।

विधि मंत्रालय ने यह माना है कि संसद में पारित किया गया नया मोटर वाहन एक्ट सरकार के लिए राजस्व कमाने का जरिया नहीं अपितु सड़क हादसों में कमी लाना है। राज्य सरकारों को यह समझना चाहिए कि एक्ट में नरमी लाकर वे बेशक जनता की हितैषी कहलाएं और चुनाव के वक्त यह उन्हें फायदा पहुंचाए। लेकिन एक कल्याणकारी राज्य और सरकार का यह धर्म है कि वह अपने नागरिकों की रक्षा करेगी, उनकी भलाई और संवर्धन के लिए हर वह कदम उठाएगी जोकि संविधान की ओर से उसके लिए प्रदत्त है। ऐसे में सड़क दुर्घटना में घायल हुए किसी व्यक्ति का अस्पताल में अच्छा इलाज दिलाने की गारंटी लेने से पहले अगर सरकार ऐसे नियमों को सख्ती से लागू करती है जिससे वाहन चालकों के मन में कानून तोडऩे पर कार्रवाई का डर हो तो वे नियमों में ही रहेंगे, तब संभव है हादसे भी नहीं होंगे। संसद ने एक्ट में बदलाव लाकर सराहनीय कार्य किया है, किसी देश में अनुशासन सिर्फ बच्चों के क्लासरूम तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, अपितु यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होना चाहिए। सड़क को किसी के बाप की जागीर बनने से रोकना जरूरी है, यह तभी होगा जब सख्त यातायात कानून होंगे और उन्हें लागू भी उतनी ही सख्ती से किया जाएगा।

Check Also

हैदराबाद पुलिस को सैल्यूट !

क्या यह किसी बड़े बदलाव की गूंज है? देश की आजादी के बाद अनेक ऐसे …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel