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विनम्र होना सबसे बड़ी खूबसूरती : मुनिश्री आलोक

अगर हम विनम्र होंगे तो दूसरों के साथ भी हमारा रिश्ता अच्छा होगा। मिसाल के तौर पर, जो माता-पिता धन-दौलत के पीछे न भागते हुए गुजऱ-बसर की चीज़ों में ही खुश रहकर आध्यात्मिक बातों को पहला स्थान देते हैं, उनके बच्चे भी ज़रूर उन्हीं की मिसाल पर चलेंगे। ऐसे बच्चों को उनकी हर मनपसंद चीज़ चाहे न मिले तो भी वे शिकायत नहीं करेंगे बल्कि जो उनके पास है उसी से वे खुश रहेंगे। इस तरह वे भी विनम्रता से जीना सीखेंगे और परिवार में एक-दूसरे के बीच अच्छा संबंध होगा। विनम्र लोगों को मन की शांति मिलती है।

शब्द विनम्रता के कई मतलब हैं। जैसे अहंकार या घमंड न करना और अपनी कामयाबी, काबिलीयत और धन-दौलत के बारे में शेखी न मारना, वगैरह वगैरह। एक किताब के मुताबिक, विनम्रता का मतलब अपनी सीमाओं के अंदर रहना भी है। विनम्र व्यक्ति चालचलन के मामले में अपनी सीमाओं के अंदर ही रहता है। वह अपनी सीमाओं को जानते हुए वही काम करता है जो उसे करना चाहिए और जो उसके बस में है। वह यह भी जानता है कि कुछेक बातों में दखल देना उसके लिए गलत होगा। इसमें कोई शक नहीं कि विनम्र व्यक्ति को हर कोई पसंद करता है। विनम्र होना सबसे बड़ी खूबसूरती है।

मनीषीश्रीसंत ने कहा असिद्ध इंसानों में विनम्रता का गुण पैदाइशी नहीं होता। इसलिए हमें अपने अंदर इसे बढ़ाने के लिए कोशिश करने की ज़रूरत है। परमेश्वर के वचन में ऐसी कई घटनाओं का ब्यौरा दिया गया है, जिनसे हम विनम्रता दिखाने के अलग-अलग तरीके जान सकते हैं और अपने अंदर यह गुण बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।

मनीषीश्रीसंत ने अंत मे फरमाया विनम्रता से पेश आनेवाला इंसान कभी महत्वाकांक्षी नहीं होता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसकी ज़िंदगी में कोई लक्ष्य नहीं होते। मिसाल के तौर पर, अगर वह परमेश्वर की सेवा में ज़्यादा ज़िम्मेदारी पाना चाहता है तो इसके लिए वह परमेश्वर द्वारा ठहराए गए वक्त का इंतज़ार करेगा और जब उसे कोई मसीही ज़िम्मेदारी मिले तो वह यहोवा का बहुत शुक्रगुज़ार होगा। वह यह नहीं समझेगा कि उसने सब कुछ अपने-आप हासिल कर लिया है। इसलिए ‘शान्ति के सोतेÓ यानी यहोवा के साथ उसका रिश्ता और भी मज़बूत होगा।शायद कभी-कभी हमें लगे कि लोग हमें नजऱअंदाज़ कर देते हैं।

ऐसे में सीमाओं को पार करके दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के बजाय क्या अक्लमंदी इसमें नहीं होगी कि हम विनम्रता से पेश आएँ? जो लोग विनम्रता से पेश आते हैं उन पर दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने का जुनून सवार नहीं होता। इसलिए उनको मन में शांति मिलती है और ऐसी शांति इंसान के तन और मन की तंदुरुस्ती के लिए ज़रूरी है।मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक के सानिध्य में 217वां आचार्य भिक्षु चरम कल्याणक दिवस 11 सिंतबर को जिसमे सामुहिक जप 9 से 10 और 13 घंटे का अनुष्ठान प्रात 6 से शाम: 7 बजे तक होगा।

मनीषीसंत की दिनचर्या मै बहुत ही चकित : डिप्टी स्पीकर अजैब सिंह

पंजाब विधानसभा के डिप्टी स्पीकर अजैब सिंह भट्टी ने मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक से मुलाकात करते हुए कहा है जैन मुनियों की चर्या बहुत ही कठिन होती है। मनीषीसंत का शरीर व उनकी दिनचर्या देखकर मै बहुत ही चकित हूं। इतनी उम्र के बाद भी मनीषीसंत इतने एक्टिव व निरोगी है ये बहुत बडी बात है। भट्ी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्मशताब्दी वर्ष मनाने में अपना भरसक योगदान देने का वायदा किया।

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