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कल ईवीएम में बंद हो जाएगा प्रत्याशियों का भाग्य

चंडीगढ़ सीट पर कड़ा मुकाबला: किरण खेर, पवन कुमार बंसल, हरमोहन धवन और अविनाश शर्मा में कड़ी टक्कर

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ की एकमात्र लोकसभा सीट पर पंजाब की 13, हिमाचल-प्रदेश की चार सीटों पर रविवार को हो रहे मतदान के साथ ही वोट पड़ रहे हैं। सभी प्रत्याशियों ने इन चुनावों को लेकर जमकर प्रचार किया। चंडीगढ़ में जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं तीन मर्तबा लोकसभा सदस्य रहे पवन कुमार बंसल के लिए जहां ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित किया वहीं पर भाजपा प्रत्याशी किरण खेर के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी जनसभा को संबोधित किया।

चुनाव प्रचार थमने के साथ ही आज की रात प्रत्याशियों के लिए कयामत की रात होगी, लेकिन अभी तक मिले समीकरणों के अनुसार चंडीगढ़ की एकमात्र सीट जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, को लेकर अभी तक मिले संकेतों के अनुसार एक बात स्पष्ट हो चुकी है कि यहां पर लड़ाई नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के प्रत्याशी पवन बंसल के बीच हो रही है, न कि पवन बंसल और किरण खेर के बीच।

यद्यपि पवन बंसल चुनाव प्रचार में किरण खेर से काफी आगे निकल चुके हैं तथा भाजपा की ओर से प्रत्याशी की देर से की गई घोषणा का किरण खेर को नुकसान उठाना पड़ रहा है, तथापि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद पीछे चल रही किरण खेर कांग्रेस के प्रत्याशी पवन बंसल के बराबर आ खड़ी हो गई हैं। अब देखना यह है कि इन चुनावों में दोनों में से कौन बाजी मारता है, यह तो 23 मई को ही पता चलेगा।

लेकिन एक बात स्पष्ट देखने को मिल रही है कि पिछली बार कांग्रेस की तरफ से मनीष तिवारी व पवन बंसल के गुटों में खींचतान थी वह इस बार देखने को नहीं मिली और शहर में पवन बंसल की हवा भी नजर आई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद जहां लोग यह कहते सुने गए कि प्रधानमंत्री चंडीगढ़ व किरण खेर के लिए कुछ नहीं बोलकर गए वहीं भाजपा के कट्टर समर्थक हिन्दुत्व पर जोर देते हुए यह कहते दिखाई दिए कि राष्ट्रहित को देखते हुए नरेंद्र मोदी को मजबूत करने के लिए अपना वोट भाजपा को दें। अब यह मतदाताओं के हाथ में है कि वह अपना मत नरेंद्र मोदी को देखते हुए देंगे या पूर्व सांसद पवन बंसल को देखते हुए उन्हें कामयाब करेंगे। यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

मतदाता के मन में क्या है इसका पता 23 को चल पाएगा, जबकि दूसरी ओर आम आदमी पार्टी(आप) के हरमोहन धवन जो कई बार निर्दलीय भी चुनाव लड़े हैं, इससे पूर्व पिछली बार भाजपा में शामिल थे। वे किरण खेर को कितना नुकसान पहुंचा पाते हैं यह भी अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन कभी हरमोहन धवन की शहर में जो अच्छी पकड़ थी वह इस बार नजर नहीं आ रही। हालांकि उन्हें आप का वोट जरूर मिलेगा, क्योंकि पिछली बार आप प्रत्याशी गुलपनाग एक लाख आठ हजार 679 मत लेकर तीसरे नंबर पर रहीं थी। इस बार हरमोहन धवन गुल पनाग द्वारा लिए गए मतों का आंकड़ा पार कर पाते हैं अथवा नहीं, यह समय ही बताएगा।

वहीं, चंडीगढ़ की आवाज पार्टी के प्रत्याशी अविनाश सिंह शर्मा भी काफी देर से शहरवासियों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन पर भी निर्भर करता है कि वह कितने मतदाताओं को अपनी ओर मोड़ पाते हैं, लेकिन अभी तक मिले समीकरणों के अनुसार इस एकमात्र सीट पर यह स्पष्ट है कि यहां मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी टक्कर है। कांग्रेस के पवन बंसल, भाजपा की किरण खेर, आप के हरमोहन धवन, चंडीगढ़ की आवाज पार्टी के अविनाश सिंह शर्मा के अलावा 32 अन्य प्रत्याशी मैदान में हैं।

इनमें बसपा के प्रवीन कुमार, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के गुरमेल सिंह, हिन्दुस्तान शक्ति सेना के जगदीश निदान, अखिल भारतीय अपना दल की ज्योति, राष्ट्रीय लोक स्वराज पार्टी के नबाब अली, सर्वजन सेवा पार्टी की भूपिंदर कौर, अंबेडकर नेशनल कांग्रेस के मुकेश पाचरा, राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी के योगराज सहोता, भारतीय किसान पार्टी की रमनीत, कम्युनिस्ट पार्टी के लश्कर सिंह, समाज अधिकार कल्याण पार्टी के शम्भू, भारत प्रभात पार्टी से शर्मिला जोहरी, भारतीय मानव अधिकार पार्टी से सत्यबीर सिंह, बहुजन मुक्ति पार्टी के संदीप बिड़ला, जनरल समाज पार्टी के सतीश कुमार, भारतीय राष्ट्रवादी के सर्वजीत सिंह सोहल, भारतीय जन सम्मान पार्टी के संजय गुलाम, रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के सुभाष चंद्र गोयल, बहुजन समाज पार्टी के सुभाष तमोली, निर्दलीय अखिलेश कुमार, उदयराज, करण वासुदेव, तेजिन्द्र सिंह वालिया, देवी सिरोही, निधि कांसल, प्रेमलता, बूटा सिंह, मनजीत सिंह बहोत, योगेश ढींगरा, राज कुमार ङ्क्षसह, राम कुमार व सुनीता शामिल हैं। सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।

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