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असम में 18 वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री के सम्‍बोधन का मूल पाठ

तेजपुर विश्वविद्यालय, असम में 18 वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री के सम्‍बोधन का मूल पाठ

Prime Minister’s address at Assam: असम के गवर्नर प्रोफेसर जगदीश मुखी जी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी, असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल जी, तेजपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर वी के जैन जी, अन्य फैकल्टी मेंबर्स और तेजपुर यूनिवर्सिटी के तेजस्वी, Talented, मेरे प्यारे Students, आज 1200 से ज्यादा Students के लिए, जीवन भर याद रहने वाला क्षण है। आपके शिक्षक-प्रोफेसर्स, आपके माता-पिता के लिए भी आज का दिन बहुत अहम है। और सबसे बड़ी बात कि आज से आपके करियर के साथ तेजपुर यूनिवर्सिटी का नाम हमेशा के लिए जुड़ गया है। आप आज जितना खुश हैं, उतना ही मैं भी हूं। आज आप अपने भविष्य को लेकर जितनी आशा से भरे हुए हैं, उतना ही मेरा आप सब पर अपार विश्वास है। मुझे भरोसा है कि आपने तेजपुर में रहते हुए तेजपुर यूनिवर्सिटी में जो सीखा है, वो असम की प्रगति को, देश की प्रगति को गति देगा, नई ऊंचाई देगा।

Prime Minister’s address at Assam: साथियों, इस भरोसे की कई वजहें भी हैं-पहला- तेजपुर का ये ऐतिहासिक स्थान, इसके पौराणिक इतिहास से मिलने वाली प्रेरणा। दूसरा- तेजपुर विश्वविद्यालय में आप जो काम कर रहे हैं, जो मुझे बताया गया है, वो बहुत उत्साह जगाता है। और तीसरा- पूर्वी भारत के सामर्थ्य पर, यहां के लोगों, यहां के नौजवानों की क्षमताओं पर, राष्ट्रनिर्माण के उनके प्रयासों पर सिर्फ मेरा ही नहीं देश का भी अटूट विश्वास है।

अभी अवार्ड और मेडल देने से पहले जो यूनिवर्सिटी एन्थम गाया गया है, उसमें निहित भाव तेजपुर के महान इतिहास को नमन करता है। मैं इसकी कुछ पंक्तियां दोहराना चाहता हूं और इसलिए भी दोहराना चाहता हूं क्योंकि ये असम के गौरव, भारत रत्न भूपेन हजारिका जी ने लिखीं हैं। उन्होंने लिखा है- अग्निगड़र स्थापत्य, कलियाभोमोरार सेतु निर्माण, ज्ञान ज्योतिर्मय, सेहि स्थानते बिराजिसे तेजपुर विश्वविद्यालय, यानि जहां अग्निगढ़ जैसा स्थापत्य हो, जहां कलिया-भोमोरा सेतु हो, जहां ज्ञान की ज्योति हो, ऐसे स्थान पर विराजमान है तेजपुर विश्वविद्यालय। इन तीन पंक्तियों में भूपेन दा ने कितना कुछ वर्णित कर दिया है। अग्निगढ़ का, राजकुमार अनिरुद्ध-राजकुमारी उषा-भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा इतिहास, महान ऑहोम शूरवीर कलिया-भोमोरा फुकन की दूरदृष्टि, ज्ञान का भंडार, ये तेजपुर की प्रेरणा हैं। भूपेन दा के साथ ही ज्योति प्रसाद अग्रवाल, बिष्णु प्रसाद राभा जैसे महान व्यक्तित्व तेज़पुर की पहचान रहे हैं। आप इनकी कर्मभूमि में, जन्मभूमि में पढ़े हैं और इसलिए आप पर गर्व का भाव होना और गौरव के कारण आत्‍मविश्‍वास से भरा हुआ आपका जीवन होना, यह बहुत स्‍वाभाविक है।

हमारा देश इस वर्ष अपनी आजादी के 75 वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सैकड़ों वर्षों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए असम के अनगिनत लोगों का योगदान है। जो उस समय थे, उन्होंने देश की आजादी के लिए जीवन दे दिया, अपनी जवानी खपा दी, अब आपको नए भारत के लिए, आत्मनिर्भर भारत के लिए जीकर दिखाना है, जीवन को सार्थक करके दिखाना है। अब से लेकर भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक, ये 25-26 साल आपके जीवन के भी स्वर्णिम वर्ष हैं। आप कल्‍पना कीजिए 1920-21 में जो नौजवान, जो बेटी आपकी उम्र की होगी, आज आप जिस उम्र के हैं, 1920-21 के कालखंड में वो क्‍या सपने देखते होंगे। वो अपने किन बातों के लिए जीवन ढालते होंगे, किन बातों की पूर्ति के लिए अपने-आपको खपाते होंगे। अगर थोड़ा सा स्‍मरण करें, 100 साल पहले आपके उम्र के लोग क्‍या करते थे तो आज आगे के लिए आपको क्‍या करना है, ये सोचने में देर नहीं लगेगी ये आपके लिए Golden Period है। तेजपुर का तेज पूरे भारत में, पूरे विश्व में फैलाइए। असम को, नॉर्थ ईस्ट को विकास की नई उंचाइयों पर ले जाइए। हमारी सरकार आज जिस तरह नॉर्थ ईस्ट के विकास में जुटी है, जिस तरह कनेक्टिविटी, एजुकेशन, हेल्थ, हर सेक्टर में काम हो रहा है, उससे आपके लिए अनेकों नई संभावनाएं बन रही हैं। इन संभावनाओं का पूरा लाभ उठाइए। आपके प्रयास ये बताते हैं कि आपमें क्षमता भी है, नया सोचने, नया करने का सामर्थ्य भी है।

तेज़पुर यूनिवर्सिटी की एक पहचान अपने Innovation Center के लिए भी है। आपके Grassroots Innovations, Vocal for Local को भी नई गति देते हैं, नई ताकत देते हैं। ये Innovations स्थानीय समस्याओं को सुलझाने में काम आ रहे हैं, जिससे विकास के नए द्वार खुल रहे हैं। अब जैसे मुझे बताया गया है कि आपके डिमार्टमेंट ऑफ केमिकल साइंस ने पीने के पानी को साफ करने के लिए एक कम कीमत वाली आसान टेक्नॉलॉजी पर काम किया है। इसका लाभ असम के अऩेक गांवों को हो रहा है। बल्कि मुझे तो यह बताया गया है कि अब ये नई टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़ में, ओडिशा में, बिहार में, कर्नाटका और राजस्थान जैसे राज्यों तक भी पहुंच रही है, मतलब आपकी ये कीर्ति पताका अब फैल रही है। भारत में इस प्रकार की टेक्नोलॉजी के विकास से हर घर जल पहुंचाने का- जल जीवन मिशन का जो सपना है, उसका एक सशक्तिकरण होगा।

पानी के अलावा गांवों में Waste को Energy में बदलने का जो बीड़ा आपने उठाया है, उसका प्रभाव भी बहुत बड़ा है। फसलों के अवशेष हमारे किसानों और हमारे पर्यावरण दोनों के लिए बहुत बड़ी चुनौती हैं। बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर से जुड़ी एक सस्ती और प्रभावी टेक्नोलॉजी को लेकर जो काम आप अपनी यूनिवर्सिटी में कर रहे हैं, उससे देश की एक बहुत बड़ी समस्या हल हो सकती है।

मुझे ये भी जानकारी दी गई है कि तेज़पुर यूनिवर्सिटी, नॉर्थ ईस्ट की Bio-Diversity और Rich Heritage को संरक्षित करने का भी अभियान चला रही है। नॉर्थ ईस्ट के आदिवासी समाज की वो भाषाएं जिन पर विलुप्त होने का खतरा है, उनको Document करना बहुत सराहनीय काम है। इसी तरह, संत श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि, नगांव के बाताद्रव थान में सदियों पुरानी लकड़ी पर उकेरी गई कला का Preservation हो, या फिर गुलामी के कालखंड में लिखी गईं असम की किताबों और पेपर्स का डिजिटलीकरण, आप वाकई इतने विविध कामों पर लगे हुए हैं। कोई भी सुनेगा, उसको गर्व होगा कि इतना दूर हिन्‍दुस्‍तान के पूर्वी छोर पर तेजपुर में ये तपस्‍या हो रही है, साधना हो रही है, आप वाकई कमाल कर रहे हैं।

मैंने जब इतना कुछ जाना तो मन में ये सवाल भी आया कि स्थानीय विषयों पर, स्थानीय आवश्यकताओं पर इतना काम, इतनी रिसर्च करने की प्रेरणा आपको कहां से मिलती है? इसका जवाब भी तेज़पुर यूनिवर्सिटी कैंपस में ही है। अब जैसे आपके हॉस्टल्स। चराईदेव, नीलाचल, कंचनजंगा, पटकाई, धानसिरी, सुबनसिरी, कोपिली, ये सभी पर्वतों, चोटियों और नदियों के नाम पर हैं। और ये सिर्फ नाम नहीं हैं। ये जीवन की जीती-जागती प्रेरणा भी हैं। जीवन यात्रा में हमें अनेक मुश्किलों, अनेक पर्वतों का सामना करना पड़ता है, कई नदियों को पार करना पड़ता है। ये एक बार का काम नहीं होता। आप एक पर्वत चढ़ते हैं और फिर दूसरे की तरफ बढ़ते हैं। हर पर्वतारोहण के साथ आपकी जानकारी भी बढ़ती है, आपकी Expertise भी बढ़ती है और नई चुनौतियों को लेकर आपका Perspective तैयार होता है। इसी तरह नदियां भी हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। नदियां, कई सहायक धाराओं से मिलकर बनती हैं और फिर समंदर में मिल जाती हैं। हमें भी जीवन में अलग-अलग लोगों से ज्ञान लेना चाहिए, सीखना चाहिए और उस सीख के साथ आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए।

जब आप इसी अप्रोच के साथ आगे बढ़ेंगे, तो असम, नॉर्थ ईस्ट, देश के विकास में अपना योगदान दे पाएंगे। आपने देखा होगा, कोरोना के इस काल में आत्मनिर्भर भारत अभियान हमारी Vocabulary का अहम हिस्सा हो चुका है। हमारे सपनों के अंदर वह घुल मिल गया है। हमारा पुरुषार्थ, हमारे संकल्‍प, हमारी सिद्धि, हमारे प्रयास, सब कुछ उसके इर्द-गिर्द हम अनुभव कर रहे हैं लेकिन आखिर ये अभियान है क्या? आखिर बदलाव क्या आ रहा है? क्या ये बदलाव सिर्फ Resources में है? क्या ये बदलाव सिर्फ Physical Infrastructure में है?

क्या बदलाव सिर्फ Technology में है? क्या बदलाव सिर्फ बढ़ती Economic और Strategic Might का है? ऐसे हर सवाल का जवाब हां में है। लेकिन, इनमें से भी जो सबसे बड़ा परिवर्तन है, वो है Instinct का, Action और Reaction के नज़रिए का है। हर चुनौती, हर समस्या से निपटने का हमारे युवा देश का अंदाज, देश का मिजाज, अब कुछ हटकर है। इसका एक ताज़ा उदाहरण तो अभी हमें क्रिकेट की दुनिया में दिखा है। आप लोगों में से बहुतों ने भारतीय क्रिकेट टीम के ऑस्ट्रेलिया टूर को फॉलो किया होगा। इस टूर में क्या-क्या चुनौतियां हमारी टीम के सामने नहीं आई? हमारी इतनी बुरी हार हुई लेकिन उतनी ही तेजी से हम उबरे भी और अगले मैच में जीत हासिल की। चोट लगने के बावजूद हमारे खिलाड़ी मैच बचाने के लिए मैदान पर डटे रहे। Challenging Conditions में निराश होने के बजाय हमारे युवा खिलाड़ियों ने Challenge का सामना किया, नए समाधान तलाशे। कुछ खिलाड़ियों में अनुभव जरूर कम था, लेकिन हौसला उतना ही बुलंद दिखा। उनको जैसे ही मौका मिला, उन्होंने इतिहास बना दिया। एक बेहतर टीम को अपने Talent और Temperament में वो ताकत थी, जिसमें उन्‍होंने इतने अनुभवी टीम को, इतने पुराने खिलाडि़यों के टीम को पराजित कर दिया।

क्रिकेट के मैदान पर हमारे खिलाड़ियों की ये Performance सिर्फ Sports के लिहाज़ से ही Important नहीं है। ये एक बहुत बड़ा Life Lesson भी है। पहला Lesson ये कि हमें अपनी Ability पर विश्वास होना चाहिए, Confidence होना चाहिए। दूसरा Lesson हमारे माइंडसेट को लेकर है। हम अगर पॉजिटिव माइंडसेट को लेकर आगे बढ़ेंगे तो, रिजल्ट भी पॉजिटिव ही आएंगे। तीसरा और सबसे अहम Lesson, अगर आपके पास एक तरफ Safe निकल जाने का Option हो और दूसरी तरफ मुश्किल जीत का विकल्प हो, तो आपको विजय का Option ज़रूर explore करना चाहिए। अगर जीतने की कोशिश में कभी-कभार असफलता भी हाथ लगे, तो उसमें कोई नुकसान नहीं है। रिस्क लेने से, प्रयोग करने से डरना नहीं है। हमें proactive और fearless होना ही पड़ेगा। हमारे भीतर जो Failure का डर होता है, हम जो Unnecessary Pressure अपने ऊपर लेते हैं, उससे जब आप बाहर निकलेंगे तो fearless बनकर उभरेंगे भी।

हौसले से भरा हुआ, अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित भारत सिर्फ क्रिकेट की फील्ड पर दिखता है, ऐसा नहीं है। आप भी तो इसी ही एक तस्वीर हैं। आप आत्मविश्वास से, Self-confidence से भरे हैं। आप लीक से हटकर सोचने और चलने से डरते नहीं हैं। आपके जैसी इसी युवा ऊर्जा ने कोरोना के खिलाफ अपनी लड़ाई में भी भारत को बहुत मजबूती दी है। आपको याद होगा, इस लड़ाई की शुरुआत में ऐसी आशंकाएं जताई गई थीं कि इतनी बड़ी आबादी वाला भारत, Resources के अभाव में कोरोना से तबाह हो जाएगा। लेकिन भारत ने दिखाया कि, Resolve और Resilience आपके पास है तो Resources तैयार होते देर नहीं लगती। भारत ने यही किया। भारत ने हालात से समझौता करने के बजाय, मुसीबत बढ़े इसका इंतजार करने के बजाय, तेजी से फैसले लिए, Proactive होकर फैसले लिए। इसी का परिणाम है कि भारत वायरस से ज्यादा प्रभावी रूप से बढ़ पाया, प्रभावी रूप से लड़ पाया। Made in India Solutions से हमने वायरस के फैलाव को कम किया, अपने हेल्थ इंफ्रा को बेहतर किया। अब हमारे Vaccine से जुड़ी Research और Production की क्षमता भारत के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों को सुरक्षा कवच का विश्वास दे रही है।

 

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